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विपक्षी एकता और कुनबे में खटपट ने बढ़ाई भाजपा की चुनौती
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 01 Jun 2018 12:56 AM IST
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चुनावी वर्ष में प्रवेश करते हुए लोकसभा की 4 और विधानसभा की 10 सीटों पर हुए उपचुनाव ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है। जदयू-शिवसेना का इकट्ठा हमला और उत्तर प्रदेश में गोरखपुर-फूलपुर के बाद कैराना-नूरपुर में मिली हार के संदेश साफ हैं। मिशन 2019 फतह करने केलिए भाजपा को न सिर्फ राजग को दुरुस्त करना होगा, बल्कि यूपी में सपा-बसपा-रालोद-कांग्रेस और कर्नाटक में जदएस-कांग्रेस की तर्ज पर राज्यों में उसके खिलाफ इसी तरह का मोर्चा बनाने की कोशिशों क काट ढूंढनी होगी।
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एकता की काट के बिना अगले लोकसभा चुनाव में नहीं बनेगी बात
भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि जहां राज्यों में उसके खिलाफ विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं, वहीं राजग में असंतोष बढ़ रहा है। नतीजे आने के बाद जिस प्रकार जदयू और फिर शिवसेना ने सरकार पर निशाना साधा है, उससे राजग के कुनबे में कलह बढने की संभावना जताई जा रही है। बीते एक महीने से बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बदले-बदले सुर नई सियासी पटकथा लिखे जाने का संदेश दे रहे हैं तो शिवसेना मोदी सरकार में शामिल अपने इकलौते मंत्री अनंत गीते का इस्तीफा कराने और बाहर से समर्थन देने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है।
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जदयू और शिवसेना निकट भविष्य में बढ़ा सकते हैं परेशानी
मोदी मंत्रिमंडल से गीते का इस्तीफा कराने पर शिवसेना कर रही विचार
दरअसल कर्नाटक में विधानसभा चुनाव बाद राजनीति की नई करवट ने भाजपा की उलझन बढ़ा दी है। कांग्र्रेस का मुख्यमंत्री पद के लिए जदएस को समर्थन, इसके ठीक बाद कैराना-नूरपुर में विपक्षी गठबंधन का सहयोग के जरिए कांग्रेस ने संकेत दिया है कि उसकी प्रमुख प्राथमिकता भाजपा को हराना है। कांग्रेस केइस स्टैंड से क्षेत्रीय दलों को केंद्रीय राजनीति में अपनी मजबूत संभावना दिख रही है।
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नीतीश पर सबकी नजर
उपचुनाव के नतीजे के बाद सबकी निगाहें हाल ही में कई मुद्दों पर अपने सुर बदलने वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर है। नोटबंदी के फैसले का समर्थन के बाद नीतीश ने इसकी आलोचना कर सबको चौंका दिया था। फिर विशेष राज्य का दर्जा जैसे मुद्दे वह नए सिरे से मुखर हुए हैं। नतीजे आने के बाद पार्टी महासचिव केसी त्यागी का मोदी सरकार और भाजपा पर हमले को भी नीतीश से जोड़ कर देखा जा रहा है। जदयू सूत्रों का कहना है कि जोकीहाट में मुसलिम वोट बैंक के बुरी तरह नाराज होने का संदेश मिला है। ऐसे में जदयू निकट भविष्य में विशेष राज्य और निजी क्षेत्र में आरक्षण मामले में कड़ा तेवर अपना सकते हैं।