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Paper Leak: ये '10 मिनट' का फॉर्मूला लागू हो जाए तो नहीं होगा पेपर लीक, ज्यादा हाथों से टूट रहा सुरक्षा चक्र
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आईपीएस मुक्तेश चंद्र ने बताया परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने का तरीका।
- फोटो :
अमर उजाला।
विस्तार
नीट की परीक्षा का विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि यूजीसी नेट एग्जाम के रद्द होने की खबर आ गई। शिक्षा मंत्रालय ने कहा, परीक्षा में सामने आई अनियमितता के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई है। नए सिरे से परीक्षा कराई जाएगी। इस मामले में विपक्ष, सरकार पर हमलावर है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (एनटीए) पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली पुलिस में स्पेशल सीपी के पद से रिटायर हुए डॉ. मुक्तेश चंद्र (आईपीएस) के समक्ष परीक्षाओं की गड़बड़ी से जुड़े कई केस आए थे। उनका कहना है कि नीट जैसी परीक्षा में गड़बड़ी 'पेपर लीक' रोकी जा सकती है। बस एक मजबूत इच्छाशक्ति के साथ '10 मिनट' का फॉर्मूला लागू करना पड़ेगा। पेपर तैयार करने से लेकर उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना, यह प्रक्रिया सौ फीसदी इलेक्ट्रोनिकली कर दी जाए। पेपर सेट करने से लेकर उसके परीक्षा केंद्र में वितरित होने तक, इस राह में जितने ज्यादा हाथ शामिल होंगे, पेपर लीक की संभावना भी उतनी ही अधिक बनती चली जाएगी।14सी से मिली परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी
नीट परीक्षा का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। डॉक्टर बनने की यह परीक्षा विवादों के घेरे में हैं। नीट को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन हुए हैं। गुजरात और बिहार सहित कई राज्यों में पुलिस को पेपर लीक के सुराग भी मिल रहे हैं। दूसरी तरफ 18 जून को हुई यूजीसी नेट की परीक्षा में गड़बड़ी की बात सामने आने पर उसे रद्द करने की घोषणा कर दी गई। इस परीक्षा में 11 लाख से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था 'एनटीए' ने इस परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न होने का दावा किया था। शिक्षा मंत्रालय ने कहा था, गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (14सी) की नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जानकारी दी थी। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।
ये कोई रॉकेट साइंस तो है नहीं
दिल्ली पुलिस में स्पेशल सीपी के पद से रिटायर हुए डॉ. मुक्तेश चंद्र (आईपीएस), गोवा के डीजीपी और दिल्ली में स्पेशल सीपी 'यातायात' सहित कई अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं। उन्होंने क्राइम ब्रांच में भी कार्य किया है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से साइबर सिक्योरिटी विषय में पीएचडी की है। साल 2019 में उन्होंने ब्रिटेन में जाकर 'चिवनिंग साइबर सिक्योरिटी फेलोशिप' के तहत 'भारत और यूके के साइबर सुरक्षा ढांचे का तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर रिसर्च रिपोर्ट तैयार की थी। उसके बाद डॉ. मुक्तेश के 'साइबर सिक्योरिटी' विषय पर कई लेख प्रकाशित हो चुके हैं। विभिन्न पदों पर रहते हुए परीक्षाओं में गड़बड़ी के कई केस उन्होंने सुलझाए थे। डॉ. मुक्तेश ने बताया, देखिये ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है कि जिसमें सफलता के लिए दशक लगेंगे। नीट हो या यूजीसी नेट, इसमें परीक्षा के सफल संचालन के लिए केवल दृढ़ इच्छा की जरूरत है।
सारा खेल ही दस मिनट का है
बतौर डॉ. मुक्तेश, ओएमआर सीट यानी मैनुअली परीक्षा आयोजित करते समय इन बातों का ध्यान रखें। सबसे पहले तो जो भी व्यक्ति पेपर सैट करता है, वह प्रक्रिया पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिकली हो। पेपर सैट होने के बाद उसे इलेक्ट्रॉनिकली लॉक कर दें। उसका पासवर्ड, परीक्षा शुरू होने से दस मिनट पहले, सुरक्षित मेल आईडी पर भेजा जाए। पासवर्ड, एसएमएस या सुरक्षित मेल आईडी से भेजा जा सकता है। परीक्षा केंद्र में एक या उससे ज्यादा प्रिंटिंग मशीन रखी जा सकती हैं। प्रिंटिंग मशीन बड़ी होगी तो सात आठ मिनट में 200 से ज्यादा कॉपी निकाल देगी। परीक्षार्थियों को पेपर वितरित कर दो। इस प्रक्रिया में लीकेज की गुंजाइश न के बराबर होगी। देखिये, पेपर जितने अधिक हाथों में जाएगा, उसका सुरक्षा घेरा उतना ही कमजोर पड़ता जाएगा। मौजूदा परीक्षा प्रणाली में क्या होता है, ये नहीं मालूम, लेकिन कुछ बातें तो सामान्य ही रहती हैं। जैसे पेपर कितने लोगों ने सेट किया है। उन्होंने मैनुअली किया है या इलेट्रॉनिकली। उसे प्रिंट कहां से कराया गया है। पेपर को सील बंद किसने किया है। प्रशासनिक अनिवार्यता के हिसाब से उसकी अतिरिक्त कॉपी कराई गई हैं, तो वह कहां से और किसने उसे फोटोस्टेट किया है। किसी ने पेपर को कंम्प्यूटर पर टाइप भी किया होगा। इन सभी प्रक्रियाओं में भाग लेने वालों के पास मोबाइल फोन तो होगा ही। पेपर सेट होने के बाद सबसे पहले वह किसके हाथों में जाता है।
सील और हस्ताक्षर के साथ पेपर
कौन सा पेपर फाइनल हुआ है, ये जानकारी भी कई लोगों को होती है। सबसे बड़ा रोल प्रिंटिंग प्रेस का रहता है। स्ट्रांग रूम पर भी नजर रहनी चाहिए। 2000 के दशक में दिल्ली पुलिस की सिपाही की परीक्षा में कुछ गड़बड़ी की बात सामने आई। डॉ. मुक्तेश ने तय किया कि वे खुद सारा काम करेंगे। उन्होंने पेपर तैयार किया। परीक्षा केंद्र के सभी सुपरवाइजर से कहा गया कि तीस मिनट पहले मेरी सील और हस्ताक्षर के साथ पेपर, परीक्षा केंद्र में पहुंचेगा। पेपर के बंडल पर जो टेप लगी है, उस पर भी साइन कर दिए गए। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका ही खत्म हो गई। हालांकि ये केवल एक सेंटर की बात थी। इच्छाशक्ति हो तो इस फॉर्मूले को अनेक सेंटरों पर भी लागू किया जा सकता है।
बड़ी चुनौती, डमी व असली उम्मीदवार का फोटो मर्ज
डॉ. मुक्तेश बताते हैं कि आजकल परीक्षा केंद्र पर एक बड़ी चुनौती सामने आ रही है। गोवा के डीजीपी पद पर कार्य करने के दौरान एक ऐसा ही मामला सामने आया था। 2017 में नीट का पेपर था। एक उम्मीदवार, परीक्षा केंद्र पर दस मिनट देरी से पहुंचा। उसके पास एडमिट कार्ड था। मालूम हुआ कि उसके नाम वाला कैंडिडेट तो पहले से ही अंदर बैठा है। अब दूसरा कैंडिडेट भी आ गया। पुलिस को सूचना मिली। जो कैंडिडेट देर से आया था, वह कहता है मैं ही असली हूं। परीक्षा केंद्र में बैठा उम्मीदवार भी अपने सही दस्तावेज दिखा रहा था। गहराई से पूछताछ हुई, तो मामला खुला। ये पता लगाया गया है कि असली उम्मीदवार के दस्तावेज, फर्जी उम्मीदवार के पास कैसे पहुंच गए। केस में सामने आया कि उसकी एक लंबी चेन थी। उसके पिता ने 30 लाख रुपये में सौदा किया था। परीक्षा केंद्र में असल की बजाए नकली कैंडिडेट बैठाया जाएगा।
50 फीसदी शक्ल एक दूसरे से मिल जाती है
जांच में एक नई तकनीक सामने आई। परीक्षा पास कराने का ठेका लेने वाला गैंग, डमी उम्मीदवार व असली उम्मीदवार का फोटो सॉफ्टवेयर के जरिए मर्ज कर देते हैं। इससे 50 फीसदी शक्ल एक दूसरे से मिल जाती है। जब वह शक्ल, प्रिंट होती है तो जल्दबाजी में चेक करने वाला आदमी नकली और असली में पहचान नहीं कर पाता। वह कन्फ्यूज सा हो जाता है। इस बाबत तब नीट को भी लिखा गया था। गोवा पुलिस से ऐसे लोगों की लिस्ट भी मांगी थी, जो लंबी दूरी वाले राज्यों से वहां परीक्षा देने आते हैं। बाद में नीट का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
कैंडिडेट का बायोमेट्रिक ले लिया गया
दिल्ली पुलिस में सिपाही भर्ती के दौरान भी इसी तरह का केस सामने आया था। परीक्षा में कोई और बैठता था, शारीरिक परीक्षा कोई दूसरा युवक देता था और ज्वाइन कोई तीसरा ही करता था। इसका तोड़ निकाला गया। परीक्षा में बैठने वाले सभी कैंडिडेट का बायोमेट्रिक ले लिया गया। ऐसे में जब भी वह युवक परीक्षा में बैठेगा तो उंगली लगाएगा। अगर नकली हुआ तो पकड़ा जाएगा। अगली परीक्षा में जब बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया गया तो गड़बड़ी बंद हो गई। मेडिकल परीक्षा और ज्वाइनिंग के वक्त भी बायोमेट्रिक जांच होने लगी। ऐसे में किसी तरह की गड़बड़ी होने की आशंका ही खत्म हो गई। बायोमेट्रिक बेस्ड आधारित सिस्टम लागू करने से उम्मीदवारों का फर्जीवाड़ा बंद हो सकता है। नीट एग्जाम को बायोमेट्रिक बेस्ड आधारित प्रक्रिया से जोड़ दें।