{"_id":"6a82b7b8a296781ff50c6a5c","slug":"air-india-pilot-testing-non-negative-results-300-400-pilots-tested-august-13-2026-08-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Air India Pilot Test: 400 पायलटों की जांच पूरी, दो के नतीजे सामान्य से अलग; क्या है पूरा मामला?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Air India Pilot Test: 400 पायलटों की जांच पूरी, दो के नतीजे सामान्य से अलग; क्या है पूरा मामला?
Mon, 17 Aug 2026 12:57 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:57 PM IST
सार
एअर इंडिया समूह में 13 अगस्त से पायलटों की जांच का सिलसिला शुरू हुआ। अब तक करीब 300 से 400 पायलटों की जांच हो चुकी है, जिनमें दो के शुरुआती नतीजे सामान्य नहीं मिले। पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
एअर इंडिया में पायलटों की जांच
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एअर इंडिया समूह ने 13 अगस्त से सभी पायलटों के लिए जांच अनिवार्य कर दी है। अब तक करीब 300 से 400 पायलटों की जांच की जा चुकी है। इनमें से दो पायलटों की शुरुआती जांच में सामान्य से अलग (नॉन-नेगेटिव) नतीजे आए हैं। इनकी पक्की जांच रिपोर्ट का अभी इंतजार है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
ये भी पढ़ें: UGC-NET Retest: NTA की गलती की सजा छात्र क्यों भुगतें? पेपर दोबारा कराने को लेकर कांग्रेस ने क्या-क्या कहा?
सूत्रों ने बताया कि अभी तक किसी भी पायलट को जांच में फेल नहीं पाया गया है। शुरुआती जांच में नॉन-नेगेटिव नतीजे आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें दवाइयों का सेवन भी एक कारण हो सकता है।
विज्ञापन
बीते हफ्ते एअर इंडिया की थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस की वजह से कई यात्री घायल हो गए थे। इस घटना की तब विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जांच शुरू कर दी थी। कुछ रिपोर्ट्स में फ्लाइट के पायलट के डोप टेस्ट के पॉजिटिव आने के भी कई दावे किए गए। हालांकि, बाद में सवालों के घेरे में आए पायलट के गांजे के नशे में फ्लाइट उड़ाने की पुष्टि हुई। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले उस पुनर्परीक्षण की पुष्टि की, जिसमें पायलट के डोपिंग की बात कही गई।
पोस्ट-फ्लाइट: भारत के बाहर से आने वाली उड़ानों के लिए, भारत में पहले लैंडिंग पोर्ट पर पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ-एनालाइजर टेस्ट लिया जाता है।
ड्रग्स या नशीले पदार्थों की जांच के लिए एक बहुत ही संवेदनशील और कानूनी रूप से सुरक्षित बहु-चरणीय प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह परीक्षण केवल एनएबीएल सर्टिफाइड लैब में ही किया जा सकता है। विमानन कंपनी का आंतरिक चिकित्सा अधिकारी भी सैंपल कलेक्शन के दौरान मौजूद रहता है, जो गवाह के तौर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करता है।
अगर विमान दुर्घटना हवाई अड्डे के पास या उससे दूर होती है, तो इसके लिए आपातकालीन नियम तय हैं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: UGC-NET Retest: NTA की गलती की सजा छात्र क्यों भुगतें? पेपर दोबारा कराने को लेकर कांग्रेस ने क्या-क्या कहा?
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि अभी तक किसी भी पायलट को जांच में फेल नहीं पाया गया है। शुरुआती जांच में नॉन-नेगेटिव नतीजे आने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें दवाइयों का सेवन भी एक कारण हो सकता है।
विज्ञापन
बीते हफ्ते एअर इंडिया की थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस की वजह से कई यात्री घायल हो गए थे। इस घटना की तब विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जांच शुरू कर दी थी। कुछ रिपोर्ट्स में फ्लाइट के पायलट के डोप टेस्ट के पॉजिटिव आने के भी कई दावे किए गए। हालांकि, बाद में सवालों के घेरे में आए पायलट के गांजे के नशे में फ्लाइट उड़ाने की पुष्टि हुई। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले उस पुनर्परीक्षण की पुष्टि की, जिसमें पायलट के डोपिंग की बात कही गई।
कब-कैसे की जा सकती है पायलट-क्रू के नशे से जुड़ी जांचें?
शराब के लिए अनिवार्य परीक्षण जरूरी
प्री-फ्लाइट: भारत से उड़ान भरने वाली सभी शेड्यूल्ड उड़ानों के पायलटों का हवाई अड्डे पर प्री-फ्लाइट ब्रेथ-एनालाइजर टेस्ट अनिवार्य है।पोस्ट-फ्लाइट: भारत के बाहर से आने वाली उड़ानों के लिए, भारत में पहले लैंडिंग पोर्ट पर पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ-एनालाइजर टेस्ट लिया जाता है।
नशीले पदार्थों के लिए रैंडम परीक्षण
- विमानन कंपनियों को हर साल अपने कम से कम 10% उड़ान क्रू और हवाई यातायात नियंत्रकों (एटीसीओ) की औचक ड्रग जांच एक वैज्ञानिक रूप से मान्य औचक तरीके से करनी होती है। यह जांच पायलट की छुट्टी या आराम की अवधि के दौरान नहीं की जा सकती।
- नशीले पदार्थों की जांच के लिए नमूना लेने (मूत्र का नमूना, न्यूनतम 45 मिलीलीटर) और ऑन-साइट स्क्रीनिंग की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से की जाती है और इसे छह महीने तक सुरक्षित रखा जाता है।
ड्रग्स या नशीले पदार्थों की जांच के लिए एक बहुत ही संवेदनशील और कानूनी रूप से सुरक्षित बहु-चरणीय प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह परीक्षण केवल एनएबीएल सर्टिफाइड लैब में ही किया जा सकता है। विमानन कंपनी का आंतरिक चिकित्सा अधिकारी भी सैंपल कलेक्शन के दौरान मौजूद रहता है, जो गवाह के तौर पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करता है।
विमान दुर्घटना की स्थिति में कौन-कैसे करता है जांच
अगर विमान दुर्घटना हवाई अड्डे के पास या उससे दूर होती है, तो इसके लिए आपातकालीन नियम तय हैं।
- हवाई अड्डे या उसके आसपास दुर्घटना होने पर हवाई अड्डे का प्रभारी अधिकारी पायलट और क्रू का तुरंत मेडिकल चेक-अप सुनिश्चित करता है। यह जांच हवाई अड्डे के मेडिकल सेंटर या पास मौजूद अस्पताल के डॉक्टर करते हैं। यहां जांच के लिए रक्त और मूत्र के नमूने लिए जाते हैं।
- हवाई अड्डे से दूर किसी क्षेत्र में दुर्घटना होने पर अगर घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन पहले पहुंचता है, तो जीवित बचे हुए क्रू सदस्यों के रक्त और मूत्र के नमूने स्थानीय पुलिस अधिकारी करीब के अस्पताल में डॉक्टरों के जरिए लेते हैं। इन नमूनों को स्थानीय फॉरेंसिक लैब भेजा जाता है।
- लैब से रिपोर्ट सीधे विमानन कंपनी के मेडिकल इन-चार्ज और डीजीसीए को एक साथ भेजी जाती है। अगर टेस्ट 'नॉन-नेगेटिव' है, तो एक मेडिकल रिव्यू ऑफिसर (एमआरओ) पायलट से संपर्क कर यह जांच करता है कि कहीं यह परिणाम किसी डॉक्टर की दवा प्रिस्क्रिप्शन के कारण तो नहीं आए।