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Parliament: मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर सरकार ने दिया जवाब; अखिलेश बोले- पश्चिम एशिया संकट पर हो चर्चा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 09 Mar 2026 06:49 PM IST
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New Parliament Building
- फोटो : Amar Ujala
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सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि वाराणसी का मणिकर्णिका घाट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है और पुराने घाट पर चल रहा काम उसकी मजबूती बढ़ाने और उसे पुनर्स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। संसद में लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने घाट पर चल रहे काम को एक पुनरुद्धार और संरक्षण परियोजना बताया।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ऐतिहासिक घाट पर हो रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर विवाद पैदा गया था। कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि इस काम के दौरान पत्थर से बने ऐतिहासिक घाट के मूल तत्वों को नुकसान पहुंचा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र से पूछा कि क्या मणिकर्णिका घाट अपनी ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान खो रहा है और क्या सरकार ने इस नुकसान की स्वतंत्र जांच कराई है।
शेखावत ने जवाब में कहा, मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है। हालांकि, जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी की जानकारी के अनुसार घाट पर चल रहा कार्य पुनरुद्धार और संरक्षण परियोजना है, जिसका मकसद घाट की मजबूती को बहाल करना और अंतिम संस्कार करने आने वाले परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, साथ ही गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है।
मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या भारी कंक्रीट निर्माण से गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह और घाट की नींव को खतरा है। शेखावत ने कहा कि जारी पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य घाट की नींव को मजबूत करेंगे और गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखेंगे। मंत्री ने कहा, स्थानीय प्रशासन घाटों पर सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाता है। यह संरक्षण परियोजना स्थानीय प्रशासन और स्थानीय समुदायों के सहयोग से तैयार और कार्यान्वित की जा रही है।
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हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ऐतिहासिक घाट पर हो रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर विवाद पैदा गया था। कई राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि इस काम के दौरान पत्थर से बने ऐतिहासिक घाट के मूल तत्वों को नुकसान पहुंचा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने केंद्र से पूछा कि क्या मणिकर्णिका घाट अपनी ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान खो रहा है और क्या सरकार ने इस नुकसान की स्वतंत्र जांच कराई है।
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शेखावत ने जवाब में कहा, मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है। हालांकि, जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी की जानकारी के अनुसार घाट पर चल रहा कार्य पुनरुद्धार और संरक्षण परियोजना है, जिसका मकसद घाट की मजबूती को बहाल करना और अंतिम संस्कार करने आने वाले परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, साथ ही गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है।
मंत्री से यह भी पूछा गया कि क्या भारी कंक्रीट निर्माण से गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह और घाट की नींव को खतरा है। शेखावत ने कहा कि जारी पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य घाट की नींव को मजबूत करेंगे और गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखेंगे। मंत्री ने कहा, स्थानीय प्रशासन घाटों पर सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाता है। यह संरक्षण परियोजना स्थानीय प्रशासन और स्थानीय समुदायों के सहयोग से तैयार और कार्यान्वित की जा रही है।
अखिलेश यादव ने की पश्चिम एशिया संघर्ष पर लोकसभा में चर्चा की मांग
अखिलेश यादव
- फोटो : एएनआई
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया के जारी संघर्ष पर चर्चा की मांग की। उन्होंने सरकार से अपनी विदेश नीति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिका के दबाव में काम कर रहा है।
संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस स्थिति से कैसे निपट रही है, खासकर उन भारतीयों के संदर्भ में, जो खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कई पत्रकार जो हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस्राइल गए थे, अब उस क्षेत्र में फंस गए हैं।
उन्होंने कहा, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हुए हैं। प्रधानमंत्री की इस्राइल यात्रा में राजनीतिक पत्रकार के रूप में गए पत्रकार अब युद्ध पत्रकार बन गए हैं। वे कैसे लौटेंगे? उन्होंने केंद्र की विदेश नीति की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को अपने शर्तों के अनुसार निर्देश दे रहा है। यादव ने कहा, एक तरफ हम आत्मनिर्भर बनने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ हम अमेरिका के आदेशों का पालन कर रहे हैं। अमेरिका हमें यह तय करने के लिए निर्देश दे रहा है कि हम कितना तेल खरीद सकते हैं और कितने दिनों के लिए।
लोकसभा में बहस की मांग करते हुए यादव ने कहा कि सरकार को संघर्ष पर अपनी स्थिति और भारत की व्यापक विदेश नीति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा, इन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और यह बताया जाना चाहिए कि सरकार ने अपनी विदेश नीति को किस तरह संभाला है।
संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह इस स्थिति से कैसे निपट रही है, खासकर उन भारतीयों के संदर्भ में, जो खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कई पत्रकार जो हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस्राइल गए थे, अब उस क्षेत्र में फंस गए हैं।
उन्होंने कहा, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हुए हैं। प्रधानमंत्री की इस्राइल यात्रा में राजनीतिक पत्रकार के रूप में गए पत्रकार अब युद्ध पत्रकार बन गए हैं। वे कैसे लौटेंगे? उन्होंने केंद्र की विदेश नीति की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि अमेरिका भारत को अपने शर्तों के अनुसार निर्देश दे रहा है। यादव ने कहा, एक तरफ हम आत्मनिर्भर बनने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ हम अमेरिका के आदेशों का पालन कर रहे हैं। अमेरिका हमें यह तय करने के लिए निर्देश दे रहा है कि हम कितना तेल खरीद सकते हैं और कितने दिनों के लिए।
लोकसभा में बहस की मांग करते हुए यादव ने कहा कि सरकार को संघर्ष पर अपनी स्थिति और भारत की व्यापक विदेश नीति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा, इन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और यह बताया जाना चाहिए कि सरकार ने अपनी विदेश नीति को किस तरह संभाला है।
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