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एम्स की रिपोर्ट का दावा: दिल्ली के 30% लोगों को आंखों की परेशानी, मोबाइल फोन से बच्चों में बढ़ी नजर की समस्या

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Mon, 09 Mar 2026 07:30 PM IST
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AIIMS report claims 30 pc Delhi residents have eye problems mobile phones increase vision problems in children
बच्चों में बढ़ रही नजर की समस्या - फोटो : Amarujala.com
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अधिक उपयोग के कारण लोगों में आंखों से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के करीब हर तीसरे व्यक्ति (30 प्रतिशत) को किसी न किसी प्रकार की आंखों की समस्या से गुजरना पड़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अधिक इस्तेमाल के कारण दिल्ली के बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) की समस्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली के 13.1 प्रतिशत बच्चों में मायोपिया रिकॉर्ड की गई है। खराब रहन-सहन और बिगड़ती जीवनशैली के कारण लोगों के समूचे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है जिसमें आंखों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। एम्स की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया के अनेक देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। भारत में भी कई राज्य इस तरह की पहल करने की तैयारी कर रहे हैं।  

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ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), दिल्ली द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली के करीब 60 लाख लोग अनकरेक्टेड रिफ्रैक्टिव एरर या प्रेसबायोपिया (बढ़ती उम्र के बाद देखने की क्षमता में कमी आने की समस्या) से प्रभावित हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या 70 प्रतिशत तक लोगों में पाई गई है। इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स के अधिक इस्तेमाल और अच्छी गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ न खाने से बच्चों की आंखों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे कम उम्र में ही उनमें यह समस्या बढ़ रही है।
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राजधानी दिल्ली स्वास्थ्य के मामले में देश में सबसे बेहतर स्थानों में गिनी जाती है, लेकिन रिपोर्ट का दावा है कि आबादी की तुलना में यहां आप्थाल्मालॉजिस्ट  चिकित्सकों की काफी कमी है। यहां आंखों की बीमारी के बेहतर इलाज के लिए 249 नेत्र चिकित्सालय हैं, जिसमें 77.5 प्रतिशत निजी क्षेत्र, 14.5 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र और करीब आठ प्रतिशत गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। 

इस तरह हुआ अध्ययन   
दिल्ली के एम्स अस्पताल के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थल्मिक साइंसेज के कम्युनिटी ऑप्थल्मोलॉजी विभाग ने यह अध्ययन किया है। इस अध्ययन को करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक टूल का सहारा लिया गया है। रिपोर्ट का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यही है कि स्मार्ट फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के कारण लोगों की देखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। लोगों की बदलती जीवनशैली और बेहतर खानपान में कमी इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।

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