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लोकसभा: 'स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लोकतंत्र की नींव पर हमला', अमित शाह का विपक्ष पर वार; अहम बातें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 11 Mar 2026 05:42 PM IST
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सार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आज जोरदार हंगामा हुआ, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमले किए, वहीं विपक्ष सदस्य भी नारेबाजी करते रहे। पढ़िए गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की अहम बातें-
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/संसद टीवी
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विस्तार
लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ की भूमिका दी है। आप उसी मध्यस्थ पर शक कर रहे हैं। 75 वर्षों में दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है। विपक्ष ने उस गहरी नींव की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़ा किया है। अपने संबोधन में गृह मंत्री शाह ने क्या-क्या कहा, पढ़िए-
'सदन कोई मेला नहीं, नियमों के अनुसार चलना पड़ेगा'
शाह ने कहा, मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है। लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वह संरक्षक होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जिन बातों को सदन अनुमति नहीं देता है, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।
ये भी पढ़ें: लोकसभा में राहुल गांधी पर गृह मंत्री अमित शाह का करारा हमला; विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा
'भाजपा और एनडीए कभी नहीं लाए लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव'
उन्होंने कहा, विपक्ष जब स्पीकर की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है, तो मान्यवर यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है। यह हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बहुत अफसोसजनक घटना है। उन्होंने कहा, हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा के स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए। हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षित करने का काम किया है और हमने स्पीकर से हमारे कानूनी और सांविधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी की है।
उन्होंने कहा, किसी के सलाहकार कार्यकर्ता हो सकते हैं। किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं। लेकिन आंदोलनकारी और कार्यकर्ता को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं, उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है। इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।
पहले जो तीन बार प्रस्ताव आए थे, वे तब आए, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लेकर आए। तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी, तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे। लेकिन ओम बिरला एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने नैतिक जमीन पर जबसे इन्होंने उन्हें नामित किया, तबसे वो नहीं आए हैं।
'कांग्रेस के सदस्यों को भाजपा से ज्यादा बोलने का समय मिला'
मुझे विधायक, सांसद रहते हुए लगभग 30 साल हो गए। लेकिन रात के 12 बजे तक सदस्यों को शून्यकाल उठाने का मौका हमारे लोकसभा स्पीकर साहब ने दिया है, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा। लेकिन ये कहते हैं कि उन्हें मौका ही नहीं मिलता है। 2019 में रिकॉर्ड 78 महिलाएं संसद में चुनकर आईं। स्पीकर ने सभी महिला सांसदों को बोलने का मौका दिया। उन्होंने कहा, (लोकसभा स्पीकर) ओम बिरला के आग्रह पर सदन के अंदर क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग भी बढ़ा और लगभग 14 भाषाओं में यहां भाषण दिया गया।
शाह ने कहा, मैं कांग्रेस पार्टी को बताना चाहता हूं कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे। इसकी तुलना में भाजपा को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या 303 थी। इस प्रकार भाजपा से कांग्रेस पार्टी को छह गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर साहब ने किया है।
इसी प्रकार, 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को कल तक 71 घंटे का समय मिला, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं। भारतीय जनता पार्टी को (सदन में बोलने के लिए) 122 घंटे मिले हैं, जबकि हमारे 239 सदस्य हैं। इसमें भी कांग्रेस पार्टी को भाजपा से दोगुना समय मिला। लेकिन ये कहते हैं कि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया। बोलने के समय तो इनके नेता जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं।
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- गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, यह कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब चार दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। यह संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए अफसोसजनक घटना है, क्योंकि अध्यक्ष किसी दल के नहीं, सदन के होते हैं।
- उन्होंने आगे कहा कि स्थापित परंपरा के अनुसार इस सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर होती है। स्पीकर एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में काम करते हैं, जो सरकार और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- शाह ने कहा कि लोकसभा के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं, जिनके अनुसार स्पीकर को सत्र चलाना चाहिए। यह सदन कोई बाजार नहीं है।सदस्यों से उम्मीद की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार बोलें और भाग लें।
- उन्होंने कहा, मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि वर्तमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेताओं ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया। इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है।
- केंद्रीय गृह मंत्री कहा कि स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है। इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया।
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'सदन कोई मेला नहीं, नियमों के अनुसार चलना पड़ेगा'
शाह ने कहा, मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है। लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वह संरक्षक होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जिन बातों को सदन अनुमति नहीं देता है, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।
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'भाजपा और एनडीए कभी नहीं लाए लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव'
उन्होंने कहा, विपक्ष जब स्पीकर की निष्ठा पर सवाल खड़ा करता है, तो मान्यवर यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय भी है। यह हमारी परंपरा, उच्च परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बहुत अफसोसजनक घटना है। उन्होंने कहा, हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा के स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव आया, मगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए विपक्ष में रहते हुए कभी लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास का प्रस्ताव नहीं लाए। हमने स्पीकर पद की गरिमा को संरक्षित करने का काम किया है और हमने स्पीकर से हमारे कानूनी और सांविधानिक अधिकारों के लिए संरक्षण की मांग भी की है।
उन्होंने कहा, किसी के सलाहकार कार्यकर्ता हो सकते हैं। किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं। लेकिन आंदोलनकारी और कार्यकर्ता को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं, उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है। इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।
पहले जो तीन बार प्रस्ताव आए थे, वे तब आए, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लेकर आए। तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी, तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे। लेकिन ओम बिरला एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने नैतिक जमीन पर जबसे इन्होंने उन्हें नामित किया, तबसे वो नहीं आए हैं।
'कांग्रेस के सदस्यों को भाजपा से ज्यादा बोलने का समय मिला'
मुझे विधायक, सांसद रहते हुए लगभग 30 साल हो गए। लेकिन रात के 12 बजे तक सदस्यों को शून्यकाल उठाने का मौका हमारे लोकसभा स्पीकर साहब ने दिया है, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा। लेकिन ये कहते हैं कि उन्हें मौका ही नहीं मिलता है। 2019 में रिकॉर्ड 78 महिलाएं संसद में चुनकर आईं। स्पीकर ने सभी महिला सांसदों को बोलने का मौका दिया। उन्होंने कहा, (लोकसभा स्पीकर) ओम बिरला के आग्रह पर सदन के अंदर क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग भी बढ़ा और लगभग 14 भाषाओं में यहां भाषण दिया गया।
शाह ने कहा, मैं कांग्रेस पार्टी को बताना चाहता हूं कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे। इसकी तुलना में भाजपा को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या 303 थी। इस प्रकार भाजपा से कांग्रेस पार्टी को छह गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर साहब ने किया है।
इसी प्रकार, 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को कल तक 71 घंटे का समय मिला, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं। भारतीय जनता पार्टी को (सदन में बोलने के लिए) 122 घंटे मिले हैं, जबकि हमारे 239 सदस्य हैं। इसमें भी कांग्रेस पार्टी को भाजपा से दोगुना समय मिला। लेकिन ये कहते हैं कि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया। बोलने के समय तो इनके नेता जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं।
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