सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   Plea over NAT in blood banks: Why should we pretend we know medical science, says SC

'हम मेडिकल साइंस के विशेषज्ञ नहीं': ब्लड बैंक में NAT टेस्ट अनिवार्य करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई PIL

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 13 Mar 2026 03:37 PM IST
विज्ञापन
सार

देश के सभी ब्लड बैंकों में एनएटी अनिवार्य करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि अदालत के पास इस विषय में विशेष तकनीकी ज्ञान नहीं है।

Plea over NAT in blood banks: Why should we pretend we know medical science, says SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के सभी ब्लड बैंकों में न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण (एनएटी) को अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए उसे फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मेडिकल साइंस का विषय है और अदालत खुद को विशेषज्ञ मानकर फैसला नहीं दे सकती। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता संस्था सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन से कहा कि वह इस मुद्दे पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग के सचिवों के सामने विस्तृत प्रस्ताव पेश करे। अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह लेकर इस विषय पर उचित निर्णय ले सकते हैं।
Trending Videos


यह भी पढ़ें - संसद डायरी: अगस्त 2024-फरवरी 2026 तक बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर 3100 हमले, संसद में सरकार ने दी जानकारी
विज्ञापन
विज्ञापन


'हम मेडिकल साइंस के विशेषज्ञ नहीं'
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि अदालत के पास इस विषय में विशेष तकनीकी ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम मेडिकल साइंस के विशेषज्ञ नहीं हैं, फिर हमें ऐसा दिखावा क्यों करना चाहिए कि हम सब जानते हैं।' इसलिए अदालत इस मामले में सीधे कोई आदेश देने की स्थिति में नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका में मांगी गई राहत का आर्थिक असर भी काफी बड़ा हो सकता है, क्योंकि एनएटी टेस्ट लागू करने के लिए बड़ी संख्या में मशीनें और संसाधन चाहिए होंगे। हर राज्य की अपनी वित्तीय सीमाएं होती हैं, इसलिए इस तरह का फैसला सरकार और विशेषज्ञों को मिलकर करना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने क्या की थी मांग?
इससे पहले 25 फरवरी को अदालत ने याचिकाकर्ता से यह जानकारी मांगी थी कि देशभर के सरकारी अस्पतालों में एनएटी टेस्ट लागू करने की लागत कितनी होगी और क्या यह सुविधा सभी जगह उपलब्ध है, ताकि गरीब मरीज भी इसका लाभ ले सकें। दिल्ली की इस एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा था कि सुरक्षित खून मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा होना चाहिए। याचिका में मांग की गई थी कि सभी ब्लड बैंकों में एनएटी टेस्ट अनिवार्य किया जाए ताकि खून में मौजूद एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफलिस जैसे संक्रमणों का जल्दी पता लगाया जा सके।

यह भी पढ़ें - PM Modi Assam Speech Highlights: पीएम ने असम दौरे पर कांग्रेस पर चुन-चुन कर प्रहार किए, डबल इंजन सरकार पर जोर

'भारत में थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या बहुत अधिक'
याचिका में यह भी कहा गया कि भारत में थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है और उन्हें हर 15-20 दिन में खून चढ़ाना पड़ता है। अगर खून ठीक से जांचा न जाए तो उन्हें गंभीर संक्रमण होने का खतरा रहता है। याचिका में हाल के कुछ मामलों का भी जिक्र किया गया। इसमें बताया गया कि मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में 2025 में खून चढ़ाने के बाद छह थैलेसीमिया बच्चों में एचआईवी पाया गया, जबकि झारखंड के चाईबासा में पांच बच्चों में इसी तरह संक्रमण मिला। उत्तर प्रदेश में भी 2023 में एक मेडिकल कॉलेज में खून चढ़ाने के बाद कई बच्चों को हेपेटाइटिस और एचआईवी होने की खबर सामने आई थी। एनजीओ का कहना था कि ऐसे मामले दिखाते हैं कि देश में ब्लड सेफ्टी सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त खून मिल सके।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed