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Passive Euthanasia: 'हमारे लिए मुश्किल निर्णय', हरीश की इच्छामृत्यु पर फैसला सुनाते हुए भावुक हुए न्यायमूर्ति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Rahul Kumar Updated Wed, 11 Mar 2026 03:53 PM IST
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सार

हमारे देश में शीर्ष अदालत की तरफ से किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु की अनुमति देने का पहला मामला सामने आया है। इच्छामृत्यु - यूं तो यह शब्द सुनने को अक्सर मिल जाता है, लेकिन जब इस पर सभी पहलुओं से विचार किया जाता है, तो यह काफी पीड़ादायक होता है। आज सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने जब यह फैसला गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए सुनाया तो उनकी भी आखें नम हो गई और वे फैसला सुनाते वक्त भावुक हो गए।

Supreme Court Justice Pardiwala tears up while delivering Harish Rana euthanasia verdict
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु की दी इजाजत - फोटो : एएनआई
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विस्तार

करीब 13 साल से कोमा में पड़े गाजियाबाद के 30 वर्षीय हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है। हरीश के परिवार की याचिका पर न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला सुनाया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट का माहौल काफी भावुक दिखा। यहां तक की न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला भी भावुक हो गए। 

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भावुक नजर आए जस्टिस पारदीवाला
हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला कुछ देर के लिए बहुत ही भावुक नजर आए। फैसला पढ़ते समय जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि हरीश राणा कभी एक मेधावी छात्र थे और अपने भविष्य के सपने देख रहे थे, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। कोर्टरूम में मामले की परिस्थितियों का जिक्र करते-करते जस्टिस पारदीवाला भावुक हो गए और कुछ देर के लिए उनकी आंखें नम हो गईं। 

हमें आखिरी फैसला लेना होगा- न्यायमूर्ति पारदीवाला
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह बेहद दुखद है। यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है, लेकिन इस लड़के (हरीश) को यूं अपार दुख में नहीं रख सकते। हम उस स्टेज में है, जहां हमें आखिरी फैसला लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिवार की प्रशंसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि उनके परिवार ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। किसी से प्यार करने का मतलब है, सबसे बुरे समय में भी उनकी देखभाल करना।

क्या है पूरा मामला?
चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रहे हरीश 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं थी। उसके बाद से वह लगातार बिस्तर में अचेत हालत में है। लगातार बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उनके शरीर पर घाव हो गए हैं। लकवाग्रस्त हरीश को सांस लेने, भोजन करने और रोजमर्रा की देखभाल के लिए चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। एम्स के डॉक्टरों की टीम ने राणा के घर जाकर उनकी जांच की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया कि हरीश ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब के जरिए सांस ले रहे हैं और गैस्ट्रोस्टॉमी ट्यूब के माध्यम से उन्हें भोजन दिया जा रहा है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले खारिज की थी याचिका
हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि भारतीय कानून के तहत सक्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति नहीं है। इसके बाद अगस्त 2024 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मानवीय समाधान तलाशने को कहा गया था।

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