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Railway:चुनाव के एलान से पहले तमिलनाडु-केरल को PM मोदी का रेलवे गिफ्ट, राज्यों से शुरू होगी ये 6 नई ट्रेनें
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Asmita Tripathi
Updated Wed, 11 Mar 2026 01:59 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। जबकि केरल के एर्नाकुलम से भी एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
तमिलनाडु-केरल से शुरू होंगी 6 नई ट्रेनें।
- फोटो : Istock
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विस्तार
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तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चली है। चुनाव से पहले ही दोनों राज्यों को चुनावी सौगात मिल रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। जबकि केरल के एर्नाकुलम से भी एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
पोदनूर-धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: उद्योगों को जोड़ेगी नई कड़ी
कोयंबटूर को दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है। यहा कपड़ा उद्योग और मशीन निर्माण का बड़ा केंद्र है। जबकि झारखंड का धनबाद भारत की कोयला राजधानी के रूप में जाना जाता है। लंबे समय से इन दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सीधा रेल संपर्क शुरू करने की मांग की जा रही थी, जिसे अब अमृत भारत एक्सप्रेस के जरिए पूरा किया जा रहा है। यह ट्रेन कोयंबटूर के पास स्थित पोदनूर जंक्शन से अपनी यात्रा शुरू करेगी। इसका पहला प्रमुख ठहराव कोयंबटूर जंक्शन होगा। इसके बाद ट्रेन तमिलनाडु के सलेम से गुजरते हुए रेनिगुंटा, विजयवाड़ा, झारसुगुड़ा और रांची होते हुए झारखंड के धनबाद तक पहुंचेगी।
यह ट्रेन साप्ताहिक सेवा के रूप में चलाई जाएगी। यह हर शनिवार सुबह पोदनूर से रवाना होगी और सोमवार तड़के धनबाद पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन सोमवार को धनबाद से चलकर अपने तय मार्ग से पोदनूर के लिए रवाना होगी। इस ट्रेन से कई क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। सलेम स्टील प्लांट को कोयला धनबाद से मिलता है, ऐसे में अब मालगाड़ियों के साथ-साथ यहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी सफर आसान हो जाएगा। वहीं तिरुप्पुर और कोयंबटूर में काम करने वाले झारखंड के हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए भी यह ट्रेन बड़ी राहत साबित होगी।
नागरकोइल-चर्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस: दक्षिण के सिरे से डेक्कन तक सीधा रेल संपर्क
भारत के दक्षिणी छोर कन्याकुमारी और नागरकोइल के तटीय क्षेत्रों को पहली बार तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (चर्लापल्ली) से सीधा रेल संपर्क मिल रहा है। इससे दक्षिण भारत के इन इलाकों के बीच यात्रा पहले के मुकाबले अधिक आसान हो जाएगी। यह ट्रेन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कोच से ज्यादा जिलों से होकर गुजरेगी, जिससे रास्ते में आने वाले कई शहरों और कस्बों को भी फायदा मिलेगा। इस सेवा से हैदराबाद में पढ़ाई करने वाले कन्याकुमारी के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा केरल-तमिलनाडु तट के व्यापारियों और दक्षिण भारत में काम करने वाले तेलंगाना के पेशेवरों के लिए भी सीधी और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा।
तीर्थयात्रियों और तटीय यात्रियों के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेन
प्रधानमंत्री दो नई एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाने वाले हैं, जिनसे सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इनमें एक रामेश्वरम–मंगलुरु एक्सप्रेस है। यह ट्रेन पवित्र रामेश्वरम मंदिर को कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु से जोड़ेगी। इस रूट से तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा और तीर्थयात्रा भी आसान हो जाएगी। दूसरी तिरुनेलवेली–मंगलुरु एक्सप्रेस है। यह ट्रेन कोयंबटूर कॉरिडोर के रास्ते कर्नाटक के तटीय इलाके तक जाएगी। इससे व्यापारियों और छात्रों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी। बड़ी ट्रेनों के साथ स्थानीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत कुछ नई पैसेंजर ट्रेनों की शुरुआत की जा रही है, जो क्षेत्रीय यात्रियों के लिए काफी मददगार साबित होंगी।
मॉयिलादुथुरई–तिरुवारूर–कराइकुडी पैसेंजर: यह ट्रेन कावेरी डेल्टा के कृषि प्रधान जिलों जैसे तंजावुर और शिवगंगा को बेहतर रेल संपर्क देगी। इससे किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए आवागमन और माल ढुलाई दोनों ही आसान हो जाएंगे।
पलक्कड़–पोलाची पैसेंजर: पोलाची नारियल और केले के व्यापार के लिए जाना जाता है। अब केरल के पलक्कड़ से यहां तक सीधी इलेक्ट्रिक रेल सेवा शुरू होने से छात्रों और मरीजों के लिए दोनों शहरों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
केरल को मिला आधुनिक रेल बुनियादी ढांचा
केरल के रेल यात्रियों को दो बड़े तोहफे मिले हैं, जिनसे सुविधाएं बेहतर होंगी और यात्रा भी अधिक आरामदायक बनेगी। इनमें तीन अमृत भारत स्टेशन बनाए। जाएंगे। इनमें शोरनूर, कुट्टीपुरम और चेंगनसेरी रेलवे स्टेशनों का करीब 52 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर, मुफ्त वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही स्टेशन का डिजाइन स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाला बनाया गया है। जबकि शोरनूर–निलांबुर लाइन का विद्युतीकरण भी किया जाएगा। 65 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के विद्युतीकरण पर लगभग 90 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब इस मार्ग पर डीजल इंजनों की जगह इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलेंगी, जिससे प्रदूषण कम होगा और यात्रा का समय भी घटेगा।
पोदनूर-धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस: उद्योगों को जोड़ेगी नई कड़ी
कोयंबटूर को दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है। यहा कपड़ा उद्योग और मशीन निर्माण का बड़ा केंद्र है। जबकि झारखंड का धनबाद भारत की कोयला राजधानी के रूप में जाना जाता है। लंबे समय से इन दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सीधा रेल संपर्क शुरू करने की मांग की जा रही थी, जिसे अब अमृत भारत एक्सप्रेस के जरिए पूरा किया जा रहा है। यह ट्रेन कोयंबटूर के पास स्थित पोदनूर जंक्शन से अपनी यात्रा शुरू करेगी। इसका पहला प्रमुख ठहराव कोयंबटूर जंक्शन होगा। इसके बाद ट्रेन तमिलनाडु के सलेम से गुजरते हुए रेनिगुंटा, विजयवाड़ा, झारसुगुड़ा और रांची होते हुए झारखंड के धनबाद तक पहुंचेगी।
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यह ट्रेन साप्ताहिक सेवा के रूप में चलाई जाएगी। यह हर शनिवार सुबह पोदनूर से रवाना होगी और सोमवार तड़के धनबाद पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन सोमवार को धनबाद से चलकर अपने तय मार्ग से पोदनूर के लिए रवाना होगी। इस ट्रेन से कई क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। सलेम स्टील प्लांट को कोयला धनबाद से मिलता है, ऐसे में अब मालगाड़ियों के साथ-साथ यहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी सफर आसान हो जाएगा। वहीं तिरुप्पुर और कोयंबटूर में काम करने वाले झारखंड के हजारों प्रवासी मजदूरों के लिए भी यह ट्रेन बड़ी राहत साबित होगी।
नागरकोइल-चर्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस: दक्षिण के सिरे से डेक्कन तक सीधा रेल संपर्क
भारत के दक्षिणी छोर कन्याकुमारी और नागरकोइल के तटीय क्षेत्रों को पहली बार तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (चर्लापल्ली) से सीधा रेल संपर्क मिल रहा है। इससे दक्षिण भारत के इन इलाकों के बीच यात्रा पहले के मुकाबले अधिक आसान हो जाएगी। यह ट्रेन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कोच से ज्यादा जिलों से होकर गुजरेगी, जिससे रास्ते में आने वाले कई शहरों और कस्बों को भी फायदा मिलेगा। इस सेवा से हैदराबाद में पढ़ाई करने वाले कन्याकुमारी के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा केरल-तमिलनाडु तट के व्यापारियों और दक्षिण भारत में काम करने वाले तेलंगाना के पेशेवरों के लिए भी सीधी और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा।
तीर्थयात्रियों और तटीय यात्रियों के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेन
प्रधानमंत्री दो नई एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाने वाले हैं, जिनसे सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इनमें एक रामेश्वरम–मंगलुरु एक्सप्रेस है। यह ट्रेन पवित्र रामेश्वरम मंदिर को कर्नाटक के तटीय शहर मंगलुरु से जोड़ेगी। इस रूट से तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा और तीर्थयात्रा भी आसान हो जाएगी। दूसरी तिरुनेलवेली–मंगलुरु एक्सप्रेस है। यह ट्रेन कोयंबटूर कॉरिडोर के रास्ते कर्नाटक के तटीय इलाके तक जाएगी। इससे व्यापारियों और छात्रों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी। बड़ी ट्रेनों के साथ स्थानीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत कुछ नई पैसेंजर ट्रेनों की शुरुआत की जा रही है, जो क्षेत्रीय यात्रियों के लिए काफी मददगार साबित होंगी।
मॉयिलादुथुरई–तिरुवारूर–कराइकुडी पैसेंजर: यह ट्रेन कावेरी डेल्टा के कृषि प्रधान जिलों जैसे तंजावुर और शिवगंगा को बेहतर रेल संपर्क देगी। इससे किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए आवागमन और माल ढुलाई दोनों ही आसान हो जाएंगे।
पलक्कड़–पोलाची पैसेंजर: पोलाची नारियल और केले के व्यापार के लिए जाना जाता है। अब केरल के पलक्कड़ से यहां तक सीधी इलेक्ट्रिक रेल सेवा शुरू होने से छात्रों और मरीजों के लिए दोनों शहरों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
केरल को मिला आधुनिक रेल बुनियादी ढांचा
केरल के रेल यात्रियों को दो बड़े तोहफे मिले हैं, जिनसे सुविधाएं बेहतर होंगी और यात्रा भी अधिक आरामदायक बनेगी। इनमें तीन अमृत भारत स्टेशन बनाए। जाएंगे। इनमें शोरनूर, कुट्टीपुरम और चेंगनसेरी रेलवे स्टेशनों का करीब 52 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर, मुफ्त वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही स्टेशन का डिजाइन स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाला बनाया गया है। जबकि शोरनूर–निलांबुर लाइन का विद्युतीकरण भी किया जाएगा। 65 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के विद्युतीकरण पर लगभग 90 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब इस मार्ग पर डीजल इंजनों की जगह इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलेंगी, जिससे प्रदूषण कम होगा और यात्रा का समय भी घटेगा।
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