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पश्चिम एशिया संकट पर संसद में चर्चा की मांग: खरगे का आरोप- सरकार को पहले से थी जंग की जानकारी, नहीं की तैयारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Wed, 11 Mar 2026 04:29 PM IST
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सार

कांग्रेस ने पश्चिम एशिया संकट पर संसद में पूरी चर्चा और प्रधानमंत्री से जवाब देने को कहा। उन्होंने दावा किया कि ईंधन और ऊर्जा संकट किसानों, उद्योगों और आम जनता को प्रभावित कर रहा है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व चेतावनियों के बावजूद सरकार पर तैयारी न करने का आरोप लगाया। पढ़िए रिपोर्ट-

Country deserves to know truth: Kharge seeks discussion in Parliament on West Asia crisis
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार

कांग्रेस ने बुधवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट पर संसद में पूरी चर्चा कराने की मांग की। पार्टी ने कहा कि इस संकट के कारण देश में उर्जा की कमी हो रही है। देश की जनता को सच जाने का अधिकार है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश में उर्जा संकट गहराता जा रहा है। लोग इसकी वजह से परेशानियों का सामना कर रहे हैं। 
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उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, मोदी सरकार की ओर से सूत्रों के हवाले से दिया जा रहा भरोसा पूरी अक्षमता को दिखाते हैं। केंद्र सरकार को पश्चिम एशिया में संभावित युद्ध की जानकारी थी। लेकिन उसने भारत की उर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा, देश को सच्चाई जानने का हक है। इसलिए इस संकट पर संसद में पूरी चर्चा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री को देश के सामने जवाब देना चाहिए। 
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खरगे ने दावा किया ईंधन की कमी को सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे खेती और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी शुरू हो गई है और सिलेंडर भरवाने के लिए गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।  

उन्होंने दावा किया कि व्यावसायिक सिलेंडरों की भारी कमी है। घरेलू सिलेंडर के लिए 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके कारण रेस्तरां और खाने-पीने के छोटे ठिकाने बंद हो रहे हैं। जमाखोरी व कालाबाजारी बढ़ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 60 हजार टन बासमती चावल का निर्यात अटक गया है। गेहूं का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। कच्चे माल की कीमत करीब 30 फीसदी बढ़ने से दवाइयों की कीमतें बढ़ने की आशंका है। 

'उद्योगों पर बढ़ रहा दबाव, महंगे हो रहे उत्पाद'
उन्होंने कहा, कपड़ो उद्योग पर लागत का दबाव बढ़ रहा है। विमान ईंधन महंगा हो रहा है, जिससे हवाई यात्रा भी महंगी होती जा रही है। इस्पात कंपनियों पर कच्चे माल की लागत का भारी दबाव है। खरगे मुताबिक, सिरेमिक (मिट्टी से बनी और भट्ठी में पकाई गई मजबूत चीजें), कांच, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल जैसे कई क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ रहा है। लगभग हर उत्पाद महंगा हो रहा है। 

पुरानी घटनाओं को किया याद खरते हुए क्या कहा?
उन्होंने कहा, सरकार का इनकार करने का यह तरीका सही नहीं है। नोटबंदी के समय कहा गया था कि 50 दिनों में नकदी की कमी खत्म हो जाएगी। लोगों से कहा गया था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री को सजा दे सकते हैं। कोविड महामारी के दौरान भी कहा गया था कि यह गंभीर आपात स्थिति नहीं है। लेकिन देश ने गंगा नदी में बहते शव और अव्यवस्था देखी है।

भारत के उर्जा भंडार की स्थिति पर जताई चिंता
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर उन्होंने कहा, अब बताया जा रहा है कि भारत के पास केवल 74 दिनों का तेल और उर्जा भंडार है। लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सोमवार को संसद में भी विरोध किया। पार्टी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर असंतुष्टि जताई और राज्यसभा से वॉकआउट किया और लोकसभा में भी विरोध जताया। 

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भारत ने तनाव कम करने की अपील में क्या कहा?
भारत ने सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव को कम करने की अपील की। भारत ने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिये होना चाहिए। साथ ही भारत ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। साथ ही उर्जा व व्यापार सुरक्षा भी जरूरी है। 

कब शुरू हुआ युद्ध और अब तक कितनी मौतें?
अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक ईरान में 1,230, लेबनान में 397 और इस्राइल में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। संसद में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने मानवीय आधार पर एक ईरानी जहाज (आईआरआईएस लावन) को भारतीय बंदरगाह पर ठहरने की अनुमति देने के फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, भारत सरकार इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। संघर्ष प्रबावित क्षेत्र से अभ तक 67 हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। 


 
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