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पश्चिम एशिया में फंसा विमान तो ऐसे भारत पहुंचे वरुण: पूरा किया दोहा से रियाद होते हुए चेन्नई का सफर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 11 Mar 2026 04:25 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया में ईरानी हमलों के बीच, भारतीय यात्री वरुण कृष्णन दोहा में फंस गए। हवाई मार्ग बाधित होने पर उन्होंने सऊदी अरब के रेगिस्तानी रास्ते से सड़क यात्रा करना तय किया। तीन गाड़ियों बदलते हुए और सीमावर्ती जांच पार करते हुए उन्होंने 55 घंटे में सुरक्षित चेन्नई वापसी की। आइए उनके इस साहसिक यात्रा पर एक नजर डालते हैं।

Varun Krishnan plane was stranded in West Asia so he reached India He completed the journey from Riyadh
वरुण कृष्णन - फोटो : एक्स@varunkrish
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और लगातार हो रहे ईरानी हमलों के बीच भारतीय यात्री वरुण कृष्णन का भारत लौटना एक साहसिक और चुनौतीपूर्ण सफर साबित हुआ। वरुण, जो चेन्नई से बार्सिलोना जा रहे थे, कतर की राजधानी दोहा में फंस गए, जब ईरान में हुए हमलों और बढ़ते तनाव के कारण कतर एयरवेज की उड़ानें प्रभावित हुईं। देखा जाए तो सामान्य परिस्थितियों में यह यात्रा हवाई मार्ग से पूरी की जाती, लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह असामान्य थी। हवाई मार्ग बाधित होने के बाद वरुण ने सऊदी अरब के रेगिस्तानी मार्ग के माध्यम से सड़क यात्रा करने का फैसला किया। उन्होंने दोहा से रियाद होते हुए 55 घंटे में चेन्नई की लंबी यात्रा पूरी की।

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वरुण ने वीडियो साझा करते हुए अपने इस साहसी यात्रा के अनुभव के बारे में बताया। वीडियो में उन्होंने अपनी यात्रा के शुरुआत से अंत तक, सभी चुनौतियों के बारे में बताया। शुरुआत में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने दोहा छोड़ने का फैसला किया क्योंकि हिंसा बढ़ रही थी और अमेरिकी सरकार की ओर से लोगों, खासकर अमेरिकी नागरिकों को दोहा छोड़ने की कई चेतावनियां दी गई थीं।
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55 घंटे की यात्रा कर सुरक्षित वापसी और संदेश
बता दें कि 55 घंटे की यात्रा पूरी करने के बाद वरुण और उनके साथी सुरक्षित रूप से चेन्नई पहुंचे। उनकी इस यात्रा ने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में साहस, तत्काल निर्णय और सहयोग से जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। वरुण ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि जीवन अप्रत्याशित है और कभी-कभी यह आपको एक अलग रास्ते पर ले जाता है। मैं बस सुरक्षित और घर वापस आकर खुश हूं।

शुरुआत में थी कई मुश्किलें, लेकिन हिम्मत से पूरी की यात्रा
वीडियो में वरुण ने बताया कि उन्हें शुरुआती समय में असमंजस था। उन्होंने जिक्र किया कि वो सोच रहे थे कि कतर एयरवेज से 6 मार्च को आने वाली अगली जानकारी का इंतजार करूंगा, लेकिन फिर हिंसा बढ़ने लगा और मुझे लगा कि निकलना ही बेहतर रहेगा। मेरे एक दोस्त ने बताया कि उनकी कार में जगह है और वे भी भारतीय यात्रियों का एक समूह हैं जो फंसे हुए थे। 

वरुण ने बताया कि यह सफर इतना आसान नहीं था।
वीडियो में वरुण ने बताया कि यह सफर थोड़ा मुश्किल भरा था क्योंकि उन्हें तीन गाड़ियां बदलनी पड़ीं, क्योंकि गाड़ियां पूरे रास्ते के लिए अधिकृत नहीं थीं। उन्होंने कहा कि जब हम सीमा पार कर रहे थे और आव्रजन और वीजा का काम करवा रहे थे, तो आव्रजन नियंत्रण केंद्र में फोन दोहा पर हमलों के बारे में लगातार बज रहे थे और हमने दूर कुछ धमाकों की आवाजें भी सुनी। 

क्यों सड़क यात्रा ही सुरक्षित विकल्प थी?
वरुण की कहानी इस समय के भू-राजनीतिक तनाव की गंभीरता को भी दर्शाती है। ईरान में अमेरिकी और इस्राइली हमलों के बाद क्षेत्र में अचानक हिंसा बढ़ गई थी। कतर में फंसे यात्री, विशेषकर विदेशी नागरिक, के लिए हवाई मार्ग असुरक्षित और अनिश्चित हो गया।

वहीं, सऊदी अरब की रेगिस्तानी सड़कें लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और यातायात के लिए जानी जाती हैं। हालांकि यह मार्ग लंबा और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसके माध्यम से वरुण और उनके साथी सुरक्षित रूप से सीमा पार कर सके। यह यात्रा लगभग 55 घंटे चली, जिसमें रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों, रात और दिन की चरम तापमान की चुनौती और सीमावर्ती जांच केंद्रों पर वीजा और पासपोर्ट प्रक्रिया जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा।

सड़क के रास्ते की तैयारी और चुनौतियां
वरुण ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें तीन अलग-अलग गाड़ियों का उपयोग करना पड़ा क्योंकि कोई भी कार पूरी दूरी के लिए अधिकृत नहीं थी। इस प्रकार की तैयारी और तत्काल निर्णय लेना यात्रा की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। साथ ही, यह यात्रा केवल भौगोलिक चुनौती ही नहीं थी, बल्कि मानसिक रूप से भी कठिन थी। दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान, सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा जांच और लगातार क्षेत्रीय तनाव ने यात्रा को साहसिक और तनावपूर्ण बना दिया।

पश्चिम एशिया में संघर्ष और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
गौरतलब है कि वरुण की कहानी उन हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा की आवश्यकता को भी उजागर करती है जो विदेशों में संकट के समय फंस जाते हैं। कतर और सऊदी अरब में भारतीय दूतावासों ने लगातार नागरिकों को सुरक्षित मार्ग और यात्रा विकल्प देने के लिए निर्देश जारी किए थे। वरुण ने बताया कि रास्ते में यात्रा के दौरान दूर-दूर तक धमाकों की आवाजें भी सुनाई दीं। ऐसे समय में सुरक्षा और सावधानी ही सर्वोपरि थी।

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