Sansad Diary: दूसरे चरण में होगी जातिगत जनगणना, सवाल पहले होंगे अधिसूचित, सरकार ने संसद में दी जानकारी
सरकार ने बताया कि जनगणना 2027 में जाति गणना दूसरे चरण में होगी। जाति सहित सभी सवाल दूसरे चरण से पहले अधिसूचित किए जाएंगे। जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, स्व-गणना का विकल्प मिलेगा और इसके लिए ₹11,718 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
विस्तार
सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि जनगणना 2027 के दौरान जाति गणना दूसरे चरण में कराई जाएगी। यह चरण जनसंख्या गणना कहलाता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से जुड़े जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किए जाएंगे।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार की जनगणना 2027 कराने की मंशा अधिसूचित कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे चरण के लिए जाति से जुड़े सवालों सहित सभी प्रश्न निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम रूप देकर, चरण शुरू होने से पहले अधिसूचित किए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि जाति गणना को लेकर तमिलनाडु सहित कई राज्यों के विभिन्न संगठनों से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए हैं।
जनगणना दो चरणों में होती है
- पहला चरण (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन- एचएलओ): इसमें प्रत्येक परिवार की आवास स्थिति, संपत्तियां, सुविधाएं आदि का विवरण लिया जाता है।
- दूसरा चरण (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन-पीई): इसमें हर व्यक्ति के जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विवरण जुटाए जाते हैं।
पहले चरण के प्रश्न अधिसूचित किए जा चुके हैं
सरकार ने बताया कि पहले चरण के प्रश्न 22 जनवरी को अधिसूचित किए जा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण के प्रश्न, जिसमें जाति से जुड़े सवाल भी शामिल होंगे। दूसरे चरण से पहले अधिसूचित किए जाएंगे।
डिजिटल उपकरण से होगी गणना
यह विशाल प्रक्रिया देशभर में करीब 30 लाख गणनाकर्ताओं व पर्यवेक्षकों और लगभग 1.3 लाख जनगणना अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि मोबाइल एप्स, सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम और स्व-गणना पोर्टल विकसित किए जा चुके हैं। डेटा संग्रह, प्रसारण और सर्वर-स्तर पर उचित सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि मोबाइल एप्स में ऑफलाइन डेटा संग्रह की सुविधा होगी। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में कागजी फॉर्म का उपयोग होगा और तब डेटा चार्ज स्तर पर ही डिजिटाइज किया जाएगा। गणनाकर्ता घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे ताकि किसी भी आधार पर बहिष्करण न हो। स्व-गणना की सुविधा अतिरिक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध रहेगी। स्व-गणना का विकल्प हाउस-लिस्टिंग शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों के लिए दिया जाएगा। हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तय 30 दिनों की अवधि में 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच कराया जाएगा।
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