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राष्ट्रीय सुरक्षा मामला: अमेरिकी-यूक्रेनी नागरिक 11 दिन की एनआईए की हिरासत में, यूएपीए के तहत हुई थी गिरफ्तारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 19 Mar 2026 03:19 PM IST
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सार
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक अमेरिकी नागरिक और कई यूक्रेनी नागरिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में 11 दिनों की एनआईए हिरासत में भेजा है। यूएपीए के तहत गिरफ्तार इन आरोपियों पर प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश, म्यांमार सीमा पार करने और विद्रोही समूहों से संबंध के आरोप लगे हैं।
एनआईए
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डायक और कई यूक्रेनी नागरिकों को 11 दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी इन विदेशी नागरिकों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में पूछताछ करेगी। कोर्ट ने माना कि यह मामला सामान्य कानूनी उल्लंघन से कहीं ज्यादा बड़ा है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
जांच एजेंसी ने क्या कहा?
इन सभी आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि ये लोग एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। आरोप है कि इन लोगों ने पहले भारत के प्रतिबंधित इलाकों में अवैध रूप से प्रवेश किया और फिर बिना किसी अनुमति के म्यांमार की सीमा पार की। कोर्ट ने कहा कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
क्या हैं आरोप?
एनआईए की जांच में यह बात सामने आई है कि इन विदेशी नागरिकों के संबंध कुछ हथियारबंद जातीय समूहों और प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों से हो सकते हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने विद्रोही गुटों को हथियारों की सप्लाई में मदद की और उन्हें ट्रेनिंग भी दी। इसके अलावा, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में भी इनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
ये भी पढ़ें: West Asia: ट्रंप ने कहा- इस्राइल तब तक शांत, जब तक ईरान.., क्या कतर में LNG संयंत्र पर हमले से बदला US का रुख?
रिकॉर्ड के अनुसार, कई यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग वीजा पर भारत आए थे। वे उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों में पहुंचे और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए। एनआईए का दावा है कि यह पूरी आवाजाही चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ी एक सोची-समझी योजना का हिस्सा थी।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने गिरफ्तारी को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत उन्हें दूतावास से संपर्क करने की सुविधा नहीं मिली। बचाव पक्ष ने इसे इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन बताया।
वहीं, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ है और विदेश मंत्रालय को भी इसकी जानकारी दी गई है। यूक्रेनी दूतावास के माध्यम से कानूनी मदद दिलाने के कदम भी उठाए गए हैं।
27 मार्च को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक साजिशें अक्सर गुप्त तरीके से रची जाती हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अभी जांच शुरुआती दौर में है और डिजिटल सबूतों की जांच होनी बाकी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि हर 48 घंटे में आरोपियों की मेडिकल जांच की जाए। उन्हें अपने वकीलों और परिवार से वीडियो कॉल के जरिए बात करने की सीमित अनुमति दी गई है। अब इन आरोपियों को 27 मार्च 2026 को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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जांच एजेंसी ने क्या कहा?
इन सभी आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि ये लोग एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। आरोप है कि इन लोगों ने पहले भारत के प्रतिबंधित इलाकों में अवैध रूप से प्रवेश किया और फिर बिना किसी अनुमति के म्यांमार की सीमा पार की। कोर्ट ने कहा कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
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क्या हैं आरोप?
एनआईए की जांच में यह बात सामने आई है कि इन विदेशी नागरिकों के संबंध कुछ हथियारबंद जातीय समूहों और प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों से हो सकते हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने विद्रोही गुटों को हथियारों की सप्लाई में मदद की और उन्हें ट्रेनिंग भी दी। इसके अलावा, ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में भी इनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
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रिकॉर्ड के अनुसार, कई यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग वीजा पर भारत आए थे। वे उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों में पहुंचे और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए। एनआईए का दावा है कि यह पूरी आवाजाही चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ी एक सोची-समझी योजना का हिस्सा थी।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने गिरफ्तारी को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत उन्हें दूतावास से संपर्क करने की सुविधा नहीं मिली। बचाव पक्ष ने इसे इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन बताया।
वहीं, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाओं का पालन हुआ है और विदेश मंत्रालय को भी इसकी जानकारी दी गई है। यूक्रेनी दूतावास के माध्यम से कानूनी मदद दिलाने के कदम भी उठाए गए हैं।
27 मार्च को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक साजिशें अक्सर गुप्त तरीके से रची जाती हैं, इसलिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अभी जांच शुरुआती दौर में है और डिजिटल सबूतों की जांच होनी बाकी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि हर 48 घंटे में आरोपियों की मेडिकल जांच की जाए। उन्हें अपने वकीलों और परिवार से वीडियो कॉल के जरिए बात करने की सीमित अनुमति दी गई है। अब इन आरोपियों को 27 मार्च 2026 को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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