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RAW: 'पाकिस्तान के साथ शांति नहीं हो सकती', जानिए भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख ने क्यों कही ये बात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 11 Jan 2026 02:14 AM IST
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सार
भारत की शीर्ष खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ शांति नहीं हो सकती। उन्होंने इसकी वजह भी बताई और कहा कि पाकिस्तान को अपने रवैये में बुनियादी बदलाव लाना होगा।
विक्रम सूद
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ तब तक शांति संभव नहीं है, जब तक इस्लामाबाद के रवैये में बुनियादी बदलाव नहीं आ जाता। उन्होंने भारत से रणनीतिक ताकत और आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह भी किया। मंगलुरू साहित्य सम्मेलन में 'वैश्विक शक्ति गतिशीलता' पर एक सत्र को संबोधित करते हुए विक्रम सूद ने कहा कि पाकिस्तान की स्थापित नीतियों और बार-बार की दुश्मनी को देखते हुए उसके साथ समझौता या बातचीत करने से कोई फायदा नहीं होगा।
अमेरिका के वैश्विक हस्तक्षेपों की आलोचना की
विक्रम सूद ने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक उसके साथ बातचीत सफल होने की संभावना नहीं है। सूद ने श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय संकटों में भारत की मददगार भूमिका की भी तारीफ की। उन्होंने वेनेजुएला मामले का जिक्र करते हुए अमेरिका द्वारा वैश्विक हस्तक्षेपों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका, अपनी सैन्य शक्ति के बावजूद, 1940 के दशक के बाद से पारंपरिक युद्धों में सीधे तौर पर विजयी नहीं हुआ है। सूद ने कहा, 'प्रभावी शासन के लिए ताकत, सैन्य क्षमता और शक्ति जरूरी है।
भारत की राजनयिक रणनीति पर, सूद ने कहा कि देश को बाहरी समर्थन पर निर्भर रहने के बजाय, अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ तार्किक रूप से जुड़ना चाहिए। उन्होंने भारत की बढ़ती रणनीतिक मुखरता का भी जिक्र किया और हाल के भारतीय सैन्य अभियानों, जिसमें बालाकोट हवाई हमला और उरी जवाबी हमला शामिल है, का जिक्र किया।
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अमेरिका के वैश्विक हस्तक्षेपों की आलोचना की
विक्रम सूद ने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक उसके साथ बातचीत सफल होने की संभावना नहीं है। सूद ने श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय संकटों में भारत की मददगार भूमिका की भी तारीफ की। उन्होंने वेनेजुएला मामले का जिक्र करते हुए अमेरिका द्वारा वैश्विक हस्तक्षेपों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका, अपनी सैन्य शक्ति के बावजूद, 1940 के दशक के बाद से पारंपरिक युद्धों में सीधे तौर पर विजयी नहीं हुआ है। सूद ने कहा, 'प्रभावी शासन के लिए ताकत, सैन्य क्षमता और शक्ति जरूरी है।
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भारत की राजनयिक रणनीति पर, सूद ने कहा कि देश को बाहरी समर्थन पर निर्भर रहने के बजाय, अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख शक्तियों के साथ तार्किक रूप से जुड़ना चाहिए। उन्होंने भारत की बढ़ती रणनीतिक मुखरता का भी जिक्र किया और हाल के भारतीय सैन्य अभियानों, जिसमें बालाकोट हवाई हमला और उरी जवाबी हमला शामिल है, का जिक्र किया।
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