थम गई सपनों की उड़ान: फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली को मुंबई में दी गई अंतिम विदाई, पिता बोले- जिम्मेदार थी बेटी
बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली को मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हुई थी। पिंकी का पार्थिव शरीर बारामती से ठाणे और फिर मुंबई लाया गया। अंतिम विदाई के समय पिंकी के पिता बेटी के सपने को बताते हुए फूट-फूट कर रोने लगे।
विस्तार
बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली को गुरुवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हुई थी। मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर हुए अंतिम संस्कार के दौरान परिवार, दोस्त और परिचित गहरे शोक में डूबे नजर आए।
पिंकी माली उस चार्टर्ड विमान में सवार थीं, जो बुधवार सुबह पुणे जिले के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान रनवे से करीब 200 मीटर पहले गिरा और आग की चपेट में आ गया। हादसे में विमान में सवार कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बच सका। इस त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
श्मशान घाट में छलका परिवार का दर्द
गुरुवार को जब पिंकी का पार्थिव शरीर शिवाजी पार्क श्मशान घाट लाया गया, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। चिता के पास खड़े उनके परिजन अपने आंसू रोक नहीं पाए। मां-बाप और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार के दौरान सिसकियों और विलाप से माहौल गमगीन हो गया।
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पिता ने सुनाए बेटी के सपने
मीडिया से बात करते हुए पिंकी के पिता शिवकुमार माली ने बताया कि उनकी बेटी का सपना था कि वह अपने बड़े भाई को पायलट बनाए। उन्होंने कहा कि पिंकी मेहनती, जिम्मेदार और अपने परिवार के सपनों को पूरा करने वाली बेटी थी। उसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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पांच साल का उड़ान भरा करियर
- पिंकी माली पिछले पांच वर्षों से फ्लाइट अटेंडेंट के रूप में कार्यरत थीं।
- उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एयर इंडिया से की थी।
- बाद में वह निजी चार्टर्ड उड़ानों से जुड़ गईं।
- अपने करियर में उन्होंने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ उड़ान भरी।
- हादसे के समय वह चौथी बार अजित पवार के साथ यात्रा कर रही थीं।
बारामती से ठाणे और फिर मुंबई तक अंतिम यात्रा
हादसे के बाद पिंकी माली का पार्थिव शरीर पहले एंबुलेंस से बारामती से ठाणे के खारीगांव इलाके लाया गया, जहां वह अपने पति के साथ पिछले चार महीनों से रह रही थीं। इसके बाद शव को मध्य मुंबई के प्रभादेवी स्थित उनके मायके ले जाया गया। यहीं उनकी परवरिश हुई थी। पड़ोसी और बचपन के मित्र अंतिम दर्शन के दौरान खुद को संभाल नहीं पाए।
परिवार और दोस्तों के लिए अपूरणीय क्षति
पिंकी की उम्र मात्र 29 वर्ष थी और उनकी शादी तीन साल पहले हुई थी। उनके पति एक भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रबंधकीय पद पर कार्यरत हैं। पिंकी की मौत ने न केवल परिवार बल्कि उनके मित्रों और सहकर्मियों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। सभी ने उन्हें एक मेहनती, विनम्र और सपनों से भरी युवा महिला के रूप में याद किया।
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