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राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: CBI जांच और FIR के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, करोड़ों भक्तों की आस्था का हवाला
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 22 Jun 2026 06:54 PM IST
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सार
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें तुरंत एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई के नेतृत्व में जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने यूपी सरकार की मौजूदा एसआईटी जांच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और दान के पैसे की सुरक्षा के लिए एक पेशेवर और स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना बेहद जरूरी है।
सु्प्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर कर इस पूरे मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने और समयबद्ध जांच कराने की गुहार लगाई गई है। दो प्रैक्टिसिंग वकीलों की ओर से दायर इस याचिका ने राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की देखरेख करने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाली एक बहु-विषयक विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी जानी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों और अन्य कथित गैर-कानूनी गतिविधियों की गहन और स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि पूरी सच्चाई देश के सामने आ सके।
केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर इस याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में अदालत से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे जनहित की रक्षा के लिए एक मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन करें।
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याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसा करना करोड़ों भक्तों और दानदाताओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। याचिका में साफ कहा गया है, 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लापता फंड और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें अंततः सच साबित होती हैं या नहीं, लेकिन ऐसी खबरों ने अयोध्या के गौरव की बहाली के लिए संघर्ष करने वाली पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।'
यूपी सरकार की एसआईटी पर उठाए सवाल
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में गठित की गई एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार की एसआईटी ने बिना किसी एफआईआर या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए ही इस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जो कानूनन सही नहीं है। अदालत को बताया गया कि लापता फंड और अन्य गड़बड़ियों की सच्चाई को एक पेशेवर एजेंसी के माध्यम से ही सामने लाया जा सकता है। ऐसी एजेंसी के पास जटिल वित्तीय और आपराधिक जांच को संभालने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत तंत्र मौजूद होते हैं।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला: गणनाकर्मी हटे, ट्रस्ट से जुड़े लोगों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश
करोड़ों राम भक्तों की आस्था का मामला
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल संभावित संज्ञेय अपराधों के होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश-विदेश के अनगिनत भक्तों और आम जनता की आस्था, भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मामले में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में प्राप्त दान की राशि में हेराफेरी के आरोपों के बाद, खुद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बीती 13 जून को एक एसआईटी का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, लेकिन अब इस जांच को सीबीआई के सुपुर्द करने की मांग तेज हो गई है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाली एक बहु-विषयक विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी जानी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों और अन्य कथित गैर-कानूनी गतिविधियों की गहन और स्वतंत्र जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि पूरी सच्चाई देश के सामने आ सके।
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केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को निर्देश देने की मांग
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर इस याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में अदालत से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे जनहित की रक्षा के लिए एक मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन करें।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसा करना करोड़ों भक्तों और दानदाताओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। याचिका में साफ कहा गया है, 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लापता फंड और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें अंततः सच साबित होती हैं या नहीं, लेकिन ऐसी खबरों ने अयोध्या के गौरव की बहाली के लिए संघर्ष करने वाली पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।'
यूपी सरकार की एसआईटी पर उठाए सवाल
याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में गठित की गई एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार की एसआईटी ने बिना किसी एफआईआर या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए ही इस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जो कानूनन सही नहीं है। अदालत को बताया गया कि लापता फंड और अन्य गड़बड़ियों की सच्चाई को एक पेशेवर एजेंसी के माध्यम से ही सामने लाया जा सकता है। ऐसी एजेंसी के पास जटिल वित्तीय और आपराधिक जांच को संभालने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत तंत्र मौजूद होते हैं।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला: गणनाकर्मी हटे, ट्रस्ट से जुड़े लोगों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश
करोड़ों राम भक्तों की आस्था का मामला
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा केवल संभावित संज्ञेय अपराधों के होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश-विदेश के अनगिनत भक्तों और आम जनता की आस्था, भावनाओं और विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मामले में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर में प्राप्त दान की राशि में हेराफेरी के आरोपों के बाद, खुद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बीती 13 जून को एक एसआईटी का गठन किया था। इस तीन सदस्यीय एसआईटी में लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, लेकिन अब इस जांच को सीबीआई के सुपुर्द करने की मांग तेज हो गई है।