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Politics: 'पीएम मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं', थरूर बोले- पार्टी नेतृत्व के सामने रखूंगा अंदर के मतभेद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:44 AM IST
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सार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर खुले मंच से पीएम मोदी और सरकार के कुछ कदमों की सराहना कर रहे हैं। वे संविधान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग बोल रहे हैं। वहीं, तमाम मतभेदों पर उनका कहना है कि वे पार्टी छोड़ने की बात नहीं कर रहे, बस अपने मतभेदों को अंदरूनी बातचीत से सुलझाना चाहते हैं।
शशि थरूर, कांग्रेस सांसद
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे पार्टी और उनके बीच बढ़ती दूरी की चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को पवित्र यानी बहुत ही सम्मान की नजर से देखते हैं। थरूर ने याद दिलाया कि 2016 में जब पीएम मोदी ने अमेरिकी संसद को संबोधित किया था, तब उन्होंने भारतीय संविधान को अपनी पवित्र ग्रंथ बताया था।
यह भी पढ़ें - Justice Ujjal Bhuyan: सरकार के खिलाफ फैसलों पर जज का तबादला क्यों? सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश का बड़ा सवाल
आरएसएस को लेकर भी बोले थरूर
केरल के कोझिकोड में हुए केरल लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते हुए थरूर ने कहा कि भारतीय संविधान समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि 'ऐसी पार्टी भी सत्ता में आई, जिसके वैचारिक पूर्वज (आरएसएस) कभी संविधान को स्वीकार नहीं करते थे, फिर भी संविधान सुरक्षित और मजबूत बना रहा।' थरूर ने यह भी याद दिलाया कि जब भाजपा सत्ता में आई थी, तब यह चर्चा चल पड़ी थी कि पार्टी संविधान बदल देगी या खत्म कर देगी। उन्होंने आरएसएस के विचारक केएन. गोविंदाचार्य का उदाहरण दिया, जिनके बारे में खबरें आई थीं कि वे नए संविधान का मसौदा तैयार कर रहे हैं।
थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपना रुख दोहराया
इसी कार्यक्रम में थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे 'बिल्कुल भी माफी नहीं मांगेंगे'। उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने एक समाचार पत्र में एक लेख लिखा था, जिसमें कहा था कि आतंकवाद को बिना सजा दिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जवाब सीमित, सटीक और आतंकियों के ठिकानों तक ही होना चाहिए। बाद में मोदी सरकार ने वही किया, जिसकी उन्होंने सिफारिश की थी। इसलिए थरूर ने उसका समर्थन किया। उनका कहना था, 'जब सरकार ने वही किया जो मैंने कहा था, तो मैं उसकी आलोचना कैसे कर सकता था?'
'पार्टी नेतृत्व के सामने रखूंगा अंदर के मतभेद'
वहीं कांग्रेस सांसद ने आगे कहा है कि उन्हें अपनी पार्टी को लेकर कुछ मुद्दे या समस्याएं हैं, जिन्हें वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत में उठाएंगे। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी की तय लाइन के खिलाफ कोई काम नहीं किया है। थरूर ने कहा कि पार्टी के अंदर के मतभेदों को मीडिया में नहीं, बल्कि पार्टी के मंच पर सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जो भी बातें हैं, मैं उन्हें दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व के सामने रखूंगा। आमने-सामने बैठकर ठीक से चर्चा करूंगा।' थरूर ने यह भी कहा कि वे पिछले 17 साल से कांग्रेस में हैं और पार्टी से उनका रिश्ता बहुत पुराना और मजबूत है। जो भी गलतफहमी या परेशानी है, उसे सही जगह पर उठाया जाएगा और सुलझाया जाएगा।
यह भी पढ़ें - Cong v BJP: खरगे बोले- केंद्र ने राज्यपालों को कठपुतली बनाया; राहुल का आरोप- EC वोट चोरी में सहभागी, गुजरात...
कई कांग्रेस नेताओं ने किया थरूर का समर्थन
दरअसल, खबरें चल रही थीं कि थरूर नाराज हैं क्योंकि कोच्चि के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने उन्हें ठीक से तवज्जो नहीं दी। केरल के कुछ कांग्रेस नेता उन्हें बार-बार किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि थरूर ने इन बातों पर खुलकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कुछ खबरें सही हो सकती हैं, कुछ गलत भी। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने थरूर का समर्थन किया। उन्होंने कहा थरूर पार्टी का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने बैठक में न आने की सूचना पहले ही दे दी थी। वे सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि लेखक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय वक्ता भी हैं। वे फुल-टाइम पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारियां अलग तरह की हैं। चेन्निथला ने साफ कहा, 'कोई भी शशि थरूर को कांग्रेस से अलग नहीं कर सकता।' केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी यही बात दोहराई कि थरूर ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी थी। इस पर कोई बेवजह का विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
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आरएसएस को लेकर भी बोले थरूर
केरल के कोझिकोड में हुए केरल लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते हुए थरूर ने कहा कि भारतीय संविधान समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि 'ऐसी पार्टी भी सत्ता में आई, जिसके वैचारिक पूर्वज (आरएसएस) कभी संविधान को स्वीकार नहीं करते थे, फिर भी संविधान सुरक्षित और मजबूत बना रहा।' थरूर ने यह भी याद दिलाया कि जब भाजपा सत्ता में आई थी, तब यह चर्चा चल पड़ी थी कि पार्टी संविधान बदल देगी या खत्म कर देगी। उन्होंने आरएसएस के विचारक केएन. गोविंदाचार्य का उदाहरण दिया, जिनके बारे में खबरें आई थीं कि वे नए संविधान का मसौदा तैयार कर रहे हैं।
थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपना रुख दोहराया
इसी कार्यक्रम में थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे 'बिल्कुल भी माफी नहीं मांगेंगे'। उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने एक समाचार पत्र में एक लेख लिखा था, जिसमें कहा था कि आतंकवाद को बिना सजा दिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जवाब सीमित, सटीक और आतंकियों के ठिकानों तक ही होना चाहिए। बाद में मोदी सरकार ने वही किया, जिसकी उन्होंने सिफारिश की थी। इसलिए थरूर ने उसका समर्थन किया। उनका कहना था, 'जब सरकार ने वही किया जो मैंने कहा था, तो मैं उसकी आलोचना कैसे कर सकता था?'
'पार्टी नेतृत्व के सामने रखूंगा अंदर के मतभेद'
वहीं कांग्रेस सांसद ने आगे कहा है कि उन्हें अपनी पार्टी को लेकर कुछ मुद्दे या समस्याएं हैं, जिन्हें वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत में उठाएंगे। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी की तय लाइन के खिलाफ कोई काम नहीं किया है। थरूर ने कहा कि पार्टी के अंदर के मतभेदों को मीडिया में नहीं, बल्कि पार्टी के मंच पर सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जो भी बातें हैं, मैं उन्हें दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व के सामने रखूंगा। आमने-सामने बैठकर ठीक से चर्चा करूंगा।' थरूर ने यह भी कहा कि वे पिछले 17 साल से कांग्रेस में हैं और पार्टी से उनका रिश्ता बहुत पुराना और मजबूत है। जो भी गलतफहमी या परेशानी है, उसे सही जगह पर उठाया जाएगा और सुलझाया जाएगा।
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कई कांग्रेस नेताओं ने किया थरूर का समर्थन
दरअसल, खबरें चल रही थीं कि थरूर नाराज हैं क्योंकि कोच्चि के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने उन्हें ठीक से तवज्जो नहीं दी। केरल के कुछ कांग्रेस नेता उन्हें बार-बार किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि थरूर ने इन बातों पर खुलकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कुछ खबरें सही हो सकती हैं, कुछ गलत भी। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने थरूर का समर्थन किया। उन्होंने कहा थरूर पार्टी का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने बैठक में न आने की सूचना पहले ही दे दी थी। वे सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि लेखक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय वक्ता भी हैं। वे फुल-टाइम पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारियां अलग तरह की हैं। चेन्निथला ने साफ कहा, 'कोई भी शशि थरूर को कांग्रेस से अलग नहीं कर सकता।' केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी यही बात दोहराई कि थरूर ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी थी। इस पर कोई बेवजह का विवाद नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
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