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मोदी की कमाई पर राहुल की नजर: परीक्षा पर चर्चा बनाम शिक्षा पर सवाल, नीट-यूजी पेपर लीक से CBSE मूल्यांकन तक

Rajkishor राजकिशोर
Updated Mon, 01 Jun 2026 05:32 AM IST
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सार

देश में अब छात्रों और युवाओं के बीच प्रभाव स्थापित करने की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती दिख रही है। पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन और शिक्षा से जुड़े मुद्दों के जरिए राहुल गांधी युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी पहले से इस वर्ग में मजबूत पकड़ रखते हैं।

PM Modi-Rahul Gandhi: Pariksha pe Charcha vs Shiksha par Sawal, from NEET-UG paper leak to CBSE evaluation
मोदी की कमाई पर राहुल की नजर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

देश की राजनीति में इस समय एक मूक लड़ाई शुरू हो चुकी है। इसका असर केवल आने वाले चुनाव पर नहीं, बल्कि अगले दशक की राजनीति पर भी पड़ सकता है। यह लड़ाई किसी जाति, क्षेत्र या वर्ग की नहीं, बल्कि देश के किशोर विद्यार्थियों, नई पीढ़ी के युवाओं और भविष्य के मतदाताओं के मन पर प्रभाव स्थापित करने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते एक दशक में परीक्षा पर चर्चा जैसे सतत संवादों के जरिये देश के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक जगह बनाने में कामयाबी पाई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब उसी क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।


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चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट की विसंगतियां, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप और हाल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने राहुल गांधी को यह अवसर दिया है, जिसे वह भुनाने में जुट गए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सीधे छात्रों और उनके परिवारों के बीच अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस के भीतर इसे केवल तात्कालिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य के मतदाता वर्ग तक पहुंच बनाने की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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असंतोष की जमीन पर नेटवर्किंग का चक्रव्यूह
इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा यह है कि राहुल गांधी केंद्रीय बोर्ड की परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थियों को सीधे व्यक्तिगत संदेश भेजने की बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। इस संदेश में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर और संविधान का हवाला देकर युवाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ने और अपना भविष्य संवारने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  • केवल संदेश ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर राहुल छात्रों से व्यक्तिगत मुलाकात भी करेंगे, जैसा कि उन्होंने हाल ही में मूल्यांकन प्रक्रिया के विवाद में आए छात्र वेदांत श्रीवास्तव से मिलकर किया था। पारंपरिक राजनीतिक नारों से दूर रहकर राहुल खुद को छात्रों के एक दोस्त और अभिभावक के रूप में पेश कर रहे हैं। इन विवादों ने देश के उस मध्य और निम्न मध्य वर्ग के परिवारों में चिंता बढ़ाई है, जिसे भाजपा की प्रमुख ताकत माना जाता रहा है।

भाजपा का जवाबी हमला
राहुल की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भाजपा ने भी जवाबी विमर्श तैयार कर लिया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान से अधिक उनके असंतोष को राजनीतिक पूंजी में बदलने का प्रयास कर रही है। पार्टी का तर्क है कि युवाओं के बीच पीएम मोदी की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता को कुछ इंटरनेट अभियानों से चुनौती नहीं दी जा सकती।

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शिक्षा से ज्यादा 2029 का संघर्ष
यह लड़ाई केवल नीट या बोर्ड परीक्षाओं के विवाद तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में वह पीढ़ी है जो अगले कुछ वर्षों में मतदाता बनेंगे। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी का स्वरूप है, जो प्रेरणा, आकांक्षा और संवाद के जरिए युवा मन से जुड़ने की कोशिश करता है। दूसरी ओर राहुल का उभरता स्वरूप है, जो अधिकार, जवाबदेही और व्यवस्था की खामियों के सवालों के जरिये युवाओं तक पहुंचना चाहता है।
 
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