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सियासत: भाजपा में असमंजस, बढ़ रही बागी तृणमूल सांसदों की बेचैनी; क्या पार्टी की बंगाल इकाई का विरोध बना कारण?
सार
टीएमसी के बागी सांसदों को लेकर भाजपा में असमंजस बढ़ता दिख रहा है। एक ओर अयोग्यता का खतरा है, तो दूसरी ओर बंगाल भाजपा की राज्य इकाई इन्हें पार्टी में शामिल करने के खिलाफ है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व 22 सितंबर से पहले क्या रास्ता निकालता है, इस पर सबकी नजर है। पढ़िए रिपोर्ट
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सियासी भविष्य का फैसला आज
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक (फाइल)
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विस्तार
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में व्याप्त असमंजस ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की बेचैनी बढ़ा दी है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के कारण इनके सामने अयोग्यता की तलवार लटक रही है तो दूसरी ओर पार्टी की राज्य इकाई किसी भी कीमत पर इन बागी सांसदों को पार्टी में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
इस बीच पूरे मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार माथापच्ची कर रहा है। संकेत हैं कि 22 सितंबर से पहले केंद्रीय नेतृत्व इन बागी सांसदों को फौरी राहत देने के लिए कोई निर्णय ले सकता है। दरअसल सोमवार को तृणमूल के बागी सांसद जगदीश बसुनिया के 20 में से 17 सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर बनी सहमति संबंधी दावे के बाद राज्य की सियासत में हलचल है। प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टïाचार्य ने सार्वजनिक तौर पर बसुनिया के दावे का खंडन किया। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि शायद बसुनिया मंगल ग्रह पर मौजूद भाजपा के साथ बनी सहमति की बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के लोग इनके आचरण को भूले नहीं हैं।
भाजपा में असमंजस क्यों?
सूत्रों के मुताबिक एक समय बागी सांसदों को पार्टी में शामिल कर संसद में संख्या बल मजबूत करने पर सहमति की स्थिति बनी थी। हालांकि राज्य इकाई ने इसका तीखा विरोध किया और कहा कि इससे कार्यकर्ताओं के साथ टीएमसी के सत्ता में रहते इनके अत्याचार के शिकार हुए लोगों में बेहद नकारात्मक संदेश जाएगा। सूत्र ने कहा कि उलझन यह भी है कि बागियों को पार्टी में शामिल करने के बाद उनके क्षेत्रों में लंबे समय से संघर्ष कर रहे नेताओं-कार्यकर्ताओं का क्या होगा? प्रदेश के एक अन्य वरिष्ठï नेता ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सत्ता में रहते सायोनी घोष सहित कई सांसदों के अपमानपूर्ण व्यवहार को कैसे भूल सकते हैं?
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ये भी पढ़ें: गरबा-डांडिया में मुसलमानों का प्रवेश रोकेगी विहिप?: गणेशोत्सव के बाद शुरू होगा अभियान; संगठन ने क्या कहा?
बागियों में बढ़ती जा रही बेचैनी
भाजपा के असमंजस के कारण तीन धड़े में बंटे बागी गुट के सांसदों की बेचैनी बढ़ गई है। इस गुट में शामिल तीन मुस्लिम सांसद अपने क्षेत्र में बहुमत मुस्लिम आबादी के कारण भाजपा-राजग से दूरी बरतना चाहते हैं। इसके अलावा दो अन्य गुटों के बीच वर्चस्व की जंग भी चल रही है। इन सबके बीच इन बागी सांसदों को 22 सितंबर तक अयोग्यता से जुड़े मामले में लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब भी देना है।
बीच का रास्ता निकालने में जुटी भाजपा
भविष्य में अहम मौके पर जरूरी संख्याबल की अहमियत को देखते हुए भाजपा नेतृत्व इस मामले में बीच का रास्ता निकालने पर माथापच्ची कर रहा है। इस क्रम में पहली माथापच्ची लोकसभा सचिवालय के नोटिस का जवाब तैयार करने में हो रही है। इस मामले में कानूनविदों की राय ली जा रही है। फिर पार्टी की योजना भविष्य में महिला आरक्षण, परिसीमन को सिरे चढ़ाने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की भी है।
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इस बीच पूरे मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार माथापच्ची कर रहा है। संकेत हैं कि 22 सितंबर से पहले केंद्रीय नेतृत्व इन बागी सांसदों को फौरी राहत देने के लिए कोई निर्णय ले सकता है। दरअसल सोमवार को तृणमूल के बागी सांसद जगदीश बसुनिया के 20 में से 17 सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर बनी सहमति संबंधी दावे के बाद राज्य की सियासत में हलचल है। प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टïाचार्य ने सार्वजनिक तौर पर बसुनिया के दावे का खंडन किया। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि शायद बसुनिया मंगल ग्रह पर मौजूद भाजपा के साथ बनी सहमति की बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के लोग इनके आचरण को भूले नहीं हैं।
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भाजपा में असमंजस क्यों?
सूत्रों के मुताबिक एक समय बागी सांसदों को पार्टी में शामिल कर संसद में संख्या बल मजबूत करने पर सहमति की स्थिति बनी थी। हालांकि राज्य इकाई ने इसका तीखा विरोध किया और कहा कि इससे कार्यकर्ताओं के साथ टीएमसी के सत्ता में रहते इनके अत्याचार के शिकार हुए लोगों में बेहद नकारात्मक संदेश जाएगा। सूत्र ने कहा कि उलझन यह भी है कि बागियों को पार्टी में शामिल करने के बाद उनके क्षेत्रों में लंबे समय से संघर्ष कर रहे नेताओं-कार्यकर्ताओं का क्या होगा? प्रदेश के एक अन्य वरिष्ठï नेता ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सत्ता में रहते सायोनी घोष सहित कई सांसदों के अपमानपूर्ण व्यवहार को कैसे भूल सकते हैं?
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बागियों में बढ़ती जा रही बेचैनी
भाजपा के असमंजस के कारण तीन धड़े में बंटे बागी गुट के सांसदों की बेचैनी बढ़ गई है। इस गुट में शामिल तीन मुस्लिम सांसद अपने क्षेत्र में बहुमत मुस्लिम आबादी के कारण भाजपा-राजग से दूरी बरतना चाहते हैं। इसके अलावा दो अन्य गुटों के बीच वर्चस्व की जंग भी चल रही है। इन सबके बीच इन बागी सांसदों को 22 सितंबर तक अयोग्यता से जुड़े मामले में लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब भी देना है।
बीच का रास्ता निकालने में जुटी भाजपा
भविष्य में अहम मौके पर जरूरी संख्याबल की अहमियत को देखते हुए भाजपा नेतृत्व इस मामले में बीच का रास्ता निकालने पर माथापच्ची कर रहा है। इस क्रम में पहली माथापच्ची लोकसभा सचिवालय के नोटिस का जवाब तैयार करने में हो रही है। इस मामले में कानूनविदों की राय ली जा रही है। फिर पार्टी की योजना भविष्य में महिला आरक्षण, परिसीमन को सिरे चढ़ाने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की भी है।