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Politics on SIR: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा बोली- विपक्ष का चेहरा बेनकाब, कांग्रेस का दुष्प्रचार जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 27 May 2026 01:55 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने आज मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में बड़ा फैसला सुनाया। चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने मामले में अहम टिप्पणियां कीं। अब इस मामले में सियासी दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। भाजपा ने विपक्षी दलों पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। किस दल के कौन से नेता ने फैसले पर क्या कहा? जानिए इस खबर में

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सियासी संग्राम तेज - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके आरोपों की पोल खोल दी है। यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को वैध और संवैधानिक करार दिया। पार्टी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पूर्णतः संविधान सम्मत घोषित कर दिया है। बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में राजनीतिक दृष्टि से करारी हार मिलने के बाद, अनर्गल बयानों और अफवाहों के बावजूद जनता से किसी भी प्रकार का समर्थन न मिलने के पश्चात मुझे लगता है कि अब विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, नैतिक और संवैधानिक दोनों मोर्चों पर भी पूरी तरह पराजित हो चुकी है।





उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सभी संस्थाओं पर अपनी अकर्मण्यता और राजनीतिक अक्षमता को छिपाने के लिए आरोप-प्रत्यारोप, लांछन और अपमान का जो खेल खेला जा रहा था, वह आज सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पूरी तरह निष्फल साबित हो गया है। यह कांग्रेस और समूचे विपक्ष की नैतिक, राजनीतिक तथा संवैधानिक तीनों आयामों पर निर्णायक पराजय है।

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कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का यह विशेष पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता को मजबूत करता है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है।

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भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला

फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बेनकाब हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक घोषित कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी शुरू से ही इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे क्योंकि कांग्रेस अवैध मतदाताओं के साथ खड़ी थी। भाजपा ने दावा किया कि अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई पूरी तरह संवैधानिक दायरे में है और कांग्रेस दुष्प्रचार फैला रही है। 

भाजपा नेता कोहली क्या बोले?

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता नलिन कोहली ने कहा कि चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने के लिए इस तरह की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया चलाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है और चुनाव आयोग इसी संवैधानिक जिम्मेदारी को निभा रहा है।

नलिन कोहली ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के तहत भारत में चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मतदाता सूची को सही रखना और चुनावों को निष्पक्ष बनाना उसकी संवैधानिक भूमिका है। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग पर हमला करना बंद करेंगे और लोकतंत्र पर अनावश्यक सवाल नहीं उठाएंगे।

योगेंद्र यादव ने दिया बड़ा बयान

सामाजिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असली खबर यह नहीं है कि अदालत ने SIR को संवैधानिक माना है, बल्कि यह है कि अब देश में यह तय करने का अधिकार कि कौन वोट देगा और कौन नहीं, सत्तारूढ़ भाजपा के हाथों में चला जाएगा।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि संविधान का वह हिस्सा, जिसे लोकतंत्र का अंतिम मजबूत स्तंभ माना जाता था, आज कमजोर पड़ता दिखाई दिया है। योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि इस फैसले के बाद चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंताएं और बढ़ेंगी।

टीएमसी ने क्या दी प्रतिक्रिया?

वहीं, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है, क्योंकि अदालत का फैसला ही कानून होता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस ने कभी SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा, बल्कि उसके कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए थे।

सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया सही तरीके से नहीं कराई गई, जिसके चलते करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उनकी पार्टी का रुख नहीं बदलेगा और वह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाती रहेगी।

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