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भाजपा का चक्रव्यूह भेदने की तैयारी: गंगोत्री से गंगासागर तक कांग्रेस का गंगा-तिरंगा दांव, संघ की राह पर विपक्ष

Rajkishor राजकिशोर
Updated Thu, 28 May 2026 08:06 AM IST
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Preparations to break BJP's Chakravyuha: Congress's Ganga-Tricolor bet from Gangotri to Gangasagar
कांग्रेस का गंगा-तिरंगा दांव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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लगातार चुनावी शिकस्त की मरुभूमि में रास्ते तलाश रही कांग्रेस ने सत्ता के शीर्ष पर वापसी के लिए अब एक बेहद गुप्त,आक्रामक और चौंकाने वाला रणनीतिक प्लान तैयार किया है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक कांग्रेस अब भाजपा को उसी के घरेलू मैदान यानी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर दो-दो हाथ करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए पार्टी गंगोत्री से गंगासागर तक बहने वाली देश की जीवनरेखा गंगा और संप्रभुता के प्रतीक तिरंगे को अपना नया सियासी हथियार बनाने जा रही है। इस रणनीति का सबसे मारक और विस्मयकारी हिस्सा यह है कि कांग्रेस अपनी आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सबसे बड़े स्तंभ यानी गुरुदक्षिणा मॉडल को अपनाने जा रही है, ताकि कॉरपोरेट्स और बड़े डोनर्स को सरकारी एजेंसियों के रडार से बचाया जा सके।


बंद लिफाफे का वो गुप्त गणित
कांग्रेस के रणनीतिकारों ने काफी सोच-विचार के बाद फंड जुटाने का जो अचूक फॉर्मूला निकाला है, उसे तिरंगा सम्मान निधि नाम दिया गया है। यह पूरी योजना असल में संघ के गुरुदक्षिणा कार्यक्रम की हूबहू कार्बन कॉपी है, जहां विजयादशमी के दिन स्वयंसेवक भगवा ध्वज के सामने बिना किसी शोर-शराबे के बंद लिफाफे में अपनी सामर्थ्य के अनुसार नकद राशि समर्पित करते हैं। कांग्रेस भी अब इसी समर्पण की शरण में है, जहां देश भर में तिरंगे को साक्षी मानकर बंद लिफाफों में चंदा लिया जाएगा। इस चतुर कदम के पीछे की सबसे बड़ी वजह चंदा देने वालों की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखना है।
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हिंदी पट्टी को मथने की तैयारी
इस नई सियासी पटकथा का दूसरा सबसे बड़ा और ताकतवर अध्याय गंगा कार्ड है। कांग्रेस गंगोत्री से गंगासागर तक फैले उस विशाल हिंदी बेल्ट और पूर्वी भारत को मथने की तैयारी में है। यह कभी उसका पारंपरिक गढ़ हुआ करता था लेकिन आज वहां उसकी जमीन खिसक चुकी है। फिलहाल, झारखंड के एक छोटे से हिस्से को छोड़ दिया जाए, तो गंगोत्री से गंगासागर तक की पूरी लहरों पर भाजपा या उसके सहयोगियों का ही नियंत्रण है। कांग्रेस अब इसी मार्ग पर बड़ा जन-अभियान चलाकर नमामि गंगे की जमीनी हकीकत को उजागर करने की तैयारी कर रही है।
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तिरंगे की प्रतिष्ठा
गंगा के समानांतर कांग्रेस तिरंगे को सर्वधर्म सद्भाव के उस ताने-बाने के रूप में पेश करने की कोशिश में है, जो देश की विविधता और आपसी भाईचारे का असली चेहरा है। इसके जरिए पार्टी जनता के बीच यह कड़ा नैरेटिव ले जाएगी कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में वैश्विक मंच पर तिरंगे की वह संप्रभु साख धूमिल हुई है, जो इतिहास के पुरातन समय से भारत की प्रतिष्ठा का सर्वोच्च शिखर थी। पार्टी तेजी से गिरते रुपये को भी आक्रामक ढंग से उठाने की तैयारी में हैं।
 
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