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एल. मुरुगन का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा: राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, राज्यसभा सदस्यता भी छोड़ी; बताया क्या करेंगे?
Thu, 15 Oct 2026 06:23 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Oct 2026 06:23 PM IST
सार
केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे एल. मुरुगन ने तमिलनाडु में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद छोड़ने की अनुमति मांगी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
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भाजपा नेता एल. मुरुगन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। एल मुरुगन ने अपने मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें मंत्री पद से मुक्त करने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
एल. मुरुगन ने पत्र में कहा था कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से संगठनात्मक कार्यों में जुटना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा था कि वह जमीनी राजनीति में लौटना चाहते हैं और तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
मोदी कैबिनेट से जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने क्रमशः जून और जुलाई में इस्तीफा दे दिया था। अब एल. मुरुगन का इस्तीफा मंत्रिपरिषद से किसी राज्य मंत्री का तीसरा इस्तीफा है।
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कौन हैं एल. मुरुगन?
तमिलनाडु की राजनीति से जुड़े भाजपा नेता डॉ. एल. मुरुगन का राजनीतिक सफर संगठनात्मक कामकाज, वकालत और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा रहा है। वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे और केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, 13 अक्तूबर 2026 को उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अब तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरा समय देने की इच्छा जताई है।
तमिलनाडु में जन्म, मद्रास हाईकोर्ट में वकालत
एल. मुरुगन का जन्म 29 मई 1977 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कोनूर में हुआ था। उनके पिता लोगनाथन और मां वरुदम्मल हैं। उन्होंने चेन्नई के तमिलनाडु डॉ. आंबेडकर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। इसके बाद मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने वकालत की और मद्रास हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी काम किया।
छात्र संगठन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मुरुगन 1997 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में काम किया। संगठन में रहते हुए उन्होंने अनुसूचित जाति प्रभाग के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली।
वर्ष 2017 से 2020 तक वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे। मार्च 2020 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर पहुंचने वाले वह अरुंथथियार समुदाय के पहले नेता बताए जाते हैं। उनके कार्यकाल में राज्य में पार्टी संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर रहा।
मोदी कैबिनेट में मिली जिम्मेदारी
सितंबर 2021 में मुरुगन पहली बार राज्यसभा पहुंचे। जुलाई 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था। शुरुआत में उन्होंने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। जून 2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार बनी सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनाया गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तमिलनाडु की नीलगिरी सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन द्रमुक के ए. राजा से हार गए। इसके बावजूद वह राज्यसभा के रास्ते केंद्र सरकार में बने रहे।
तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने पर जोर
मुरुगन ने 13 अक्तूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वह अब पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं और तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देंगे। उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी संगठन को तैयार करना है।
उनका यह फैसला ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में भाजपा अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। मुरुगन का आगे का काम पार्टी के संगठनात्मक विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और राज्य में चुनावी तैयारी पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
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एल. मुरुगन ने पत्र में कहा था कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से संगठनात्मक कार्यों में जुटना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा था कि वह जमीनी राजनीति में लौटना चाहते हैं और तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
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मोदी कैबिनेट से जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू ने क्रमशः जून और जुलाई में इस्तीफा दे दिया था। अब एल. मुरुगन का इस्तीफा मंत्रिपरिषद से किसी राज्य मंत्री का तीसरा इस्तीफा है।
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कौन हैं एल. मुरुगन?
तमिलनाडु की राजनीति से जुड़े भाजपा नेता डॉ. एल. मुरुगन का राजनीतिक सफर संगठनात्मक कामकाज, वकालत और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा रहा है। वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे और केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, 13 अक्तूबर 2026 को उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अब तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरा समय देने की इच्छा जताई है।
तमिलनाडु में जन्म, मद्रास हाईकोर्ट में वकालत
एल. मुरुगन का जन्म 29 मई 1977 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कोनूर में हुआ था। उनके पिता लोगनाथन और मां वरुदम्मल हैं। उन्होंने चेन्नई के तमिलनाडु डॉ. आंबेडकर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। इसके बाद मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने वकालत की और मद्रास हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी काम किया।
छात्र संगठन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मुरुगन 1997 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में काम किया। संगठन में रहते हुए उन्होंने अनुसूचित जाति प्रभाग के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली।
वर्ष 2017 से 2020 तक वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे। मार्च 2020 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर पहुंचने वाले वह अरुंथथियार समुदाय के पहले नेता बताए जाते हैं। उनके कार्यकाल में राज्य में पार्टी संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर रहा।
मोदी कैबिनेट में मिली जिम्मेदारी
सितंबर 2021 में मुरुगन पहली बार राज्यसभा पहुंचे। जुलाई 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था। शुरुआत में उन्होंने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। जून 2024 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार बनी सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनाया गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तमिलनाडु की नीलगिरी सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन द्रमुक के ए. राजा से हार गए। इसके बावजूद वह राज्यसभा के रास्ते केंद्र सरकार में बने रहे।
तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने पर जोर
मुरुगन ने 13 अक्तूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वह अब पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं और तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देंगे। उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी संगठन को तैयार करना है।
उनका यह फैसला ऐसे समय आया है, जब तमिलनाडु में भाजपा अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। मुरुगन का आगे का काम पार्टी के संगठनात्मक विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और राज्य में चुनावी तैयारी पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।