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सीजेपी प्रदर्शन: सैम पित्रोदा का बड़ा बयान, कहा- आंदोलन अरब क्रांति जैसा; अभद्र भाषा को लेकर कही यह बात
Thu, 15 Oct 2026 05:25 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Oct 2026 05:25 PM IST
सार
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को युवाओं की राजनीतिक जागरूकता और साहस से जोड़कर देखा है। उन्होंने आंदोलन की तुलना अरब क्रांति से करते हुए कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
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सैम पित्रोदा ने किया सीजेपी आंदोलन का समर्थन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। उन्होंने इसे "निडर विपक्ष, साहस और जागरूकता" का प्रतीक बताते हुए आंदोलन की तुलना 'अरब क्रांति' से की। मंगलवार को उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा कि भले ही कभी-कभी युवाओं से गलतियां हो गई हों, लेकिन अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए।
'अरब स्प्रिंग' 2010 और 2011 में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों और विद्रोहों की एक लहर थी, जिसने इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही तानाशाही सरकारों को चुनौती दी थी। इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया और मिस्र में हुए विरोध प्रदर्शनों से हुई। परिणामस्वरूप वहां की सरकारों को उखाड़ फेंका गया, जिससे अन्य अरब देशों में भी इसी तरह के प्रयास शुरू हुए थे।
पित्रोदा ने अरब क्रांति की तरह सीजेपी आंदोलन को बताया भारतीय मानसून
सैम पित्रोदा ने कहा, "मुझे लगता है कि छात्र आंदोलन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन निडर विरोध, साहस और जागरूकता को लेकर है। अपने एक लेख में, मैंने इसे 'भारतीय मानसून' कहा था, जो 'अरब क्रांति' से काफी मेल खाता है। इसका श्रेय अपनी आवाज बुलंद करने वाले इन युवाओं को जाता है। कुछ बातें सही होती हैं, कुछ गलत, और यह ठीक है।"
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'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर हुए विवाद पर, पित्रोदा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेज आवाज में बात की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके गुस्से ने चर्चा के नए भी अवसर खोल दिए।
सीजेपी के आम आदमी पार्टी से जुड़ाव पर क्या बोले सैम पित्रोदा?
उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने तेज आवाज में बात की, कुछ ने गलत भाषा का इस्तेमाल किया। मेरी नजर में, यह ठीक है। ऐसा नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं, लेकिन आप उनके गुस्से को देख सकते थे, और इसी आक्रोश ने वास्तव में कई नए अवसर पैदा किए।" जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी', 'आम आदमी पार्टी' (आप) से निकली है, तो पित्रोदा ने कहा कि उनके पास इस दावे पर टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता। मुझे इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं है, और मुझे कोई अंदाजा नहीं है। वे जो कहते हैं, मैं उसे उसी रूप में स्वीकार करता हूं। जहां तक मैं समझता हूं, वे युवाओं का एक समूह है, जो बहुत समझदार है। मैं उन्हें कभी-कभी टीवी पर देखता हूं। मुझे उन पर गर्व है। मुझे उन्हें देखकर अच्छा लगता है।"
'युवाओं को मिले आजादी, भले ही वो करें गलतियां'
पित्रोदा ने युवा प्रदर्शनकारियों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखने, जटिल व्यवस्था के बीच काम करने और साहस दिखाने की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए, भले ही वे इस दौरान गलतियां ही क्यों न कर बैठें।
उन्होंने कहा, ''वे गलतियां कर सकते हैं, कोई बात नहीं। लेकिन वे अच्छे हैं। हमें अपने युवाओं पर गर्व होना चाहिए। जब मैं उन्हें देखता हूं, तो मुझे कुछ उम्मीद नजर आती है। मुझे अच्छा लगता है जब लोग संघर्ष करते हैं और अपनी बात रखते हैं। कभी-कभी, वे गलत भी हो सकते हैं। यह भी ठीक है। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि वे डर को दूर कर पाए और उन्होंने हिम्मत दिखाई।''
महात्मा गांधी का जिक्र कर क्या बोले पित्रोदा?
महात्मा गांधी के साहस पर जोर देने की बात को याद करते हुए, पित्रोदा ने कहा कि बदलाव लाने और अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को डर से बाहर निकलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों ने अल्पसंख्यकों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), दलितों और आदिवासी समुदायों को अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया है। ये समुदाय अक्सर खुद को आर्थिक अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर महसूस करते हैं।
कांग्रेस नेता ने ध्रुव राठी का क्यों किया जिक्र?
उन्होंने कहा, ''छात्र आंदोलन ने उनमें एक नई ऊर्जा भर दी है। अब वे भी अपनी बात रख सकते हैं। उन्हें अब महसूस हो रहा है कि सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि उनकी भी अपनी आवाज है।'' यूट्यूबर ध्रुव राठी के बारे में बात करते हुए, पित्रोदा ने उन्हें एक होनहार युवा बताया, जिनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और अपने विचार रखने के उनके अधिकार का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, ''मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं। मुझे लगता है कि वह एक होनहार युवा हैं। उनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं, और एक भारतीय नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। वह भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं इसके लिए उनका सम्मान करता हूं। मैं उनके साहस की सराहना करता हूं, और मुझे लगता है कि हमें उनके जैसे और भी लोगों की जरूरत है और वह अच्छे इंसान हैं।''
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'अरब स्प्रिंग' 2010 और 2011 में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों और विद्रोहों की एक लहर थी, जिसने इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही तानाशाही सरकारों को चुनौती दी थी। इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया और मिस्र में हुए विरोध प्रदर्शनों से हुई। परिणामस्वरूप वहां की सरकारों को उखाड़ फेंका गया, जिससे अन्य अरब देशों में भी इसी तरह के प्रयास शुरू हुए थे।
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पित्रोदा ने अरब क्रांति की तरह सीजेपी आंदोलन को बताया भारतीय मानसून
सैम पित्रोदा ने कहा, "मुझे लगता है कि छात्र आंदोलन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन निडर विरोध, साहस और जागरूकता को लेकर है। अपने एक लेख में, मैंने इसे 'भारतीय मानसून' कहा था, जो 'अरब क्रांति' से काफी मेल खाता है। इसका श्रेय अपनी आवाज बुलंद करने वाले इन युवाओं को जाता है। कुछ बातें सही होती हैं, कुछ गलत, और यह ठीक है।"
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'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर हुए विवाद पर, पित्रोदा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेज आवाज में बात की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके गुस्से ने चर्चा के नए भी अवसर खोल दिए।
सीजेपी के आम आदमी पार्टी से जुड़ाव पर क्या बोले सैम पित्रोदा?
उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने तेज आवाज में बात की, कुछ ने गलत भाषा का इस्तेमाल किया। मेरी नजर में, यह ठीक है। ऐसा नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं, लेकिन आप उनके गुस्से को देख सकते थे, और इसी आक्रोश ने वास्तव में कई नए अवसर पैदा किए।" जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी', 'आम आदमी पार्टी' (आप) से निकली है, तो पित्रोदा ने कहा कि उनके पास इस दावे पर टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता। मुझे इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं है, और मुझे कोई अंदाजा नहीं है। वे जो कहते हैं, मैं उसे उसी रूप में स्वीकार करता हूं। जहां तक मैं समझता हूं, वे युवाओं का एक समूह है, जो बहुत समझदार है। मैं उन्हें कभी-कभी टीवी पर देखता हूं। मुझे उन पर गर्व है। मुझे उन्हें देखकर अच्छा लगता है।"
'युवाओं को मिले आजादी, भले ही वो करें गलतियां'
पित्रोदा ने युवा प्रदर्शनकारियों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखने, जटिल व्यवस्था के बीच काम करने और साहस दिखाने की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए, भले ही वे इस दौरान गलतियां ही क्यों न कर बैठें।
उन्होंने कहा, ''वे गलतियां कर सकते हैं, कोई बात नहीं। लेकिन वे अच्छे हैं। हमें अपने युवाओं पर गर्व होना चाहिए। जब मैं उन्हें देखता हूं, तो मुझे कुछ उम्मीद नजर आती है। मुझे अच्छा लगता है जब लोग संघर्ष करते हैं और अपनी बात रखते हैं। कभी-कभी, वे गलत भी हो सकते हैं। यह भी ठीक है। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि वे डर को दूर कर पाए और उन्होंने हिम्मत दिखाई।''
महात्मा गांधी का जिक्र कर क्या बोले पित्रोदा?
महात्मा गांधी के साहस पर जोर देने की बात को याद करते हुए, पित्रोदा ने कहा कि बदलाव लाने और अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को डर से बाहर निकलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों ने अल्पसंख्यकों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), दलितों और आदिवासी समुदायों को अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया है। ये समुदाय अक्सर खुद को आर्थिक अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर महसूस करते हैं।
कांग्रेस नेता ने ध्रुव राठी का क्यों किया जिक्र?
उन्होंने कहा, ''छात्र आंदोलन ने उनमें एक नई ऊर्जा भर दी है। अब वे भी अपनी बात रख सकते हैं। उन्हें अब महसूस हो रहा है कि सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि उनकी भी अपनी आवाज है।'' यूट्यूबर ध्रुव राठी के बारे में बात करते हुए, पित्रोदा ने उन्हें एक होनहार युवा बताया, जिनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और अपने विचार रखने के उनके अधिकार का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, ''मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं। मुझे लगता है कि वह एक होनहार युवा हैं। उनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं, और एक भारतीय नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। वह भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मैं इसके लिए उनका सम्मान करता हूं। मैं उनके साहस की सराहना करता हूं, और मुझे लगता है कि हमें उनके जैसे और भी लोगों की जरूरत है और वह अच्छे इंसान हैं।''