सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   Rafale Deal Know What Is Fighter Jet, Its Specifications And Controversy Around It supreme court

राफेल विमान की खूबियों से लेकर विवाद तक, यहां जानिए सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 14 Nov 2019 04:52 PM IST
विज्ञापन
Rafale Deal Know What Is Fighter Jet, Its Specifications And Controversy Around It supreme court
राफेल - फोटो : dassault-aviation.com
विज्ञापन

राफेल डील की जांच के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मोदी सरकार को बड़ी राहत देते हुए मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार को क्लीनचिट दी। संविधान पीठ ने कहा कि मामले की अलग से जांच करने की कोई आवश्वयकता नहीं है। 

Trending Videos


विज्ञापन
विज्ञापन



राफेल लड़ाकू विमान के सौदे पर देश के विपक्षी दल लंबे समय से सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने इसमे घोटाला किया है और अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें दसॉल्ट एविएशन का ऑफसेट ठेका दिया गया। हालांकि केंद्र सरकार इस आरोप को सिरे से खारिज करती आ रही है। सरकार का दावा है कि वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए इस सौदे को जल्दी पूरा करना जरूरी था। 

इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि यह राजनीति के गलियारों से निकलकर अदालत की चौखट तक पहुंच गया। जो फैसला आया उसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई। पहले अदालत में तर्क दिया गया कि डील के कागज खो गए हैं। फिर याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनके पास चोरी हो चुके या फिर लीक हो चुके दस्तावेजों की प्रतियां हैं। इनके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए ले लिया।

14 दिसंबर 2018 को अदालत ने इस मामले में मोदी सरकार को क्लीनचिट दी थी और फ्रांस से 36 विमान खरीदे जाने की प्रक्रिया की जांच अदालत की निगरानी में करने का आदेश देने से मना कर दिया था। अदालत ने कहा था कि हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे साबित होता हो कि इस सौदे में किसी के व्यापारिक हित साधे गए हों। आज हम आपको बताते हैं कि राफेल क्या है और इसपर इतना विवाद क्यों हो रहा है।

क्या है राफेल विमान

राफेल फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया एक लड़ाकू विमान है। दो इंजन राफेल लड़ाकू जेट को शुरुआत से ही एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड अटैक के लिए बहु-भूमिका सेनानी के रूप में डिजाइन किया गया है, परमाणु रूप से सक्षम है और इसका पुनर्निर्माण भी किया जा सकता है। तकनीक में उन्नत यह विमान हवाई टोही, ग्राउंड सपोर्ट, इन डेप्थ स्ट्राइक, एंटी-शर्प स्ट्राइक और परमाणु अभियानों को अंजाम देने में दक्ष है। इसमें मल्टी मोज रडार लगे हैं।

राफेल की खूबियां

  • राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। 
  • अधिकतम भार उठाकर इसके उड़ने की क्षमता 24500 किलोग्राम है।
  • विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम किलोग्राम है।
  • यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है, जो भारतीय वायुसेना की पहली पसंद है। हर तरह के मिशन में भेजा जा सकता। 
  • 24,500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी। 
  • 150 किमी की बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल, हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल। 
  • स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किमी, हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की गारंटी। 
  • राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा और 3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता। 
  • 1 मिनट में 60,000 फुट की ऊंचाई और 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस। 
  • 75 फीसदी विमान हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार हैं, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। 
  • राफेल को अफगानिस्तान, लीबिया, माली और इराक में इस्तेमाल किया जा चुका है।

सरकार और दसॉल्ट के बीच क्या है करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2015 में घोषणा की थी कि भारत फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी से 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदेगा। इसके बाद सितंबर 2016 में भारत ने 7.87 बिलियन यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपये) में 36 नए राफले लड़ाकू जेट खरीदने के लिए फ्रांसीसी सरकार के साथ सीधा सौदा किया। राफेल को 2012 में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और रूस से प्रतिद्वंद्वी प्रस्तावों पर चुना गया था।

मूल योजना यह थी कि भारत फ्रांस से 18 ऑफ द शेल्फ जेट खरीदेगा। मोदी सरकार ने पिछली यूपीए सरकार की 126 राफेल खरीदने की प्रतिबद्धता से पीछे हटकर कहा कि डबल इंजन वाले विमान बहुत महंगे होंगे और यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच लगभग एक दशक लंबी वार्ता के बाद हुआ।

यह है विवाद की प्रमुख वजहें

दरअसल, साल 2000 में वायुसेना ने लड़ाकू विमानों की खरीदी का प्रस्ताव तत्कालीन एनडीए सरकार को दिया था। तब वायुसेना के पास लड़ाकू स्क्वाड्रंस (विमानों के समूह) की क्षमता महज 34 ही थी और उसे कम से कम 42 स्क्वाड्रंस की जरूरत थी। चूंकि उसके बाद एनडीए की सरकार चली गई और यूपीए की सरकार आई, जिसके बाद साल 2007 में यूपीए सरकार ने वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए 126 लड़ाकू विमानों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की और साल 2008 में विमानों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए गए। 

इस प्रक्रिया में दुनियाभर की कुल 6 कंपनियों ने भाग लिया, जिसमें सबसे निचली बोली राफेल बनाने वाली डैसो एविएशन ने लगाई और टेंडर उसे दे दिया गया। इसके बाद दिसंबर 2012 में टेंडर प्रकिया पूरी होने के बाद तय हुआ कि कंपनी पहले 18 राफेल तैयार अवस्था में देगी, जबकि 108 विमान भारत में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर बनाए जाएंगे, लेकिन कुछ अन्य शर्तों पर कंपनी के साथ सहमति नहीं बन सकी और सौदा रद्द हो गया।

कांग्रेस के तीन आरोप

कांग्रेस का कहना है कि यूपीए के राफेल समझौते में एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये थी जो मोदी सरकार ने 1570 करोड़ रुपये में लगभग तीन गुनी कीमत के साथ लिया जा रहा है, इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस का यह भी कहना है कि साल 2016 में फ्रांस में हुए समझौते में सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी की मंजूरी नहीं ली गई।

इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, क्या इस पर भ्रष्टाचार का केस नहीं बनता है? कांग्रेस का तीसरा सवाल है कि नवंबर साल 2017 में रक्षा मंत्री ने कहा था कि 36 राफेल विमान इमरजेंसी के लिए तत्काल रूप से लिए गये। अगर ऐसा था तो समझौते के इतने समय बाद भी एक भी राफेल विमान क्यों नहीं मिला है?

राफेल की कीमत को लेकर विवाद

राफेल को लेकर एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था  कि सरकार ने फ्रांस से केवल 36 लड़ाकू विमानों का सौदा किया जबकि प्रस्तावित संख्या 126 थी। मगर सरकार ने विमानों की संख्या को कम करके प्रति विमान की कीमत को 41 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। मतलब हर विमान अब 41 फीसदी ज्यादा की कीमत से अधिग्रहीत किया जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि असल सौदे में दसॉल्ट भारत में बनने वाले 13 विमानों के डिजायन और विकास की फीस के तौर पर एक बार 1.4 बिलियन यूरो का मूल्य वसूल रहा था। इस राशि को नए सौदे में बातचीत करके 1.3 बिलियन यूरो पर लाया गया। प्रति विमान की कीमत जो पहले 11.11 मिलियन यूरो थी अब बढ़कर 36.11 मिलियन यूरो हो गई है।

विपक्ष ने पीएम से मांगा था जवाब

राफेल विमान संसद के दोनों सत्र में गूंजा था। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने इतना हंगामा किया कि कई बार लोकसभा और राज्यसभा की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा था। विपक्ष की मांग थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसपर सफाई दें। लेकिन प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं बोला और उनकी जगह रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी थी।

विपक्ष की मांग थी कि इसकी जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जाए जिसे मानने से मोदी सरकार ने मना कर दिया था। इसकी जांच कैग से कराई गई थी। जिसमें सरकार को क्लीनचिट मिली थी।

उच्चतम न्यायालय का फैसला

राफेल खरीद की प्रक्रिया की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करवाने के लिए याचिका दाखिल की गई थी। जिसे 14 दिसंबर 2018 को अदालत ने अपने फैसले में खारिज कर दिया था। फैसले में अदालत ने कहा था कि प्रक्रिया में विशेष कमी नहीं रही है और केंद्र के 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना सही नहीं है। विमान की क्षमता में कोई कमी नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था, 'हम पूरी तरह से संतुष्ट है कि राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं रही। देश को सामरिक रूप से सक्षम रहना आवश्यक है। अदालत के लिए अपीलकर्ता प्राधिकारी के रूप में बैठना और सभी पहलुओं की जांच करना संभव नहीं है। हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे साबित होता हो कि इस सौदे में किसी के व्यापारिक हित साधे गए हों।'

आपके लिए क्या है खास

बुधवार को केंद्र सरकार को झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय अपने फैसले पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है। न्यायालय ने केंद्र सरकार की उन प्राथमिक आपत्तियों को खारिज कर दिया है जिसमें उसने उन दस्तावेजों पर विशेषाधिकार का दावा किया था जो अदालत में याचिका पर सुनवाई करने के लिए पेश किए गए हैं। न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की।

जिसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल और केएम जोसेफ शामिल थे। अदालत ने एक मत से कहा कि जो दस्तावेज सार्वजनिक हो गए हैं उसके आधार पर हम याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed