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'टाइम आएगा हम आपको पकड़ेंगे': राहुल का आरोप- बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग देशद्रोह कर रहे, न्याय जरूर होगा
Wed, 23 Sep 2026 12:48 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:48 PM IST
सार
राहुल गांधी ने कथितन वोट चोरी को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला बताते हुए भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को गंभीर बताया। फॉर्म-6 में बदलाव पर विवाद क्यों हुआ? चुनाव आयोग का पक्ष क्या है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि मैं चुनाव आयोग और उनके अधिकारियों को साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हो, गलत कर रहे हो। ये देश के खिलाफ है। ये मत भूलिए, जब टाइम आएगा हम आपको पकड़ेंगे बचने वाले नहीं हो। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट पर लिखा कि वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है। ये हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।
इसके कुछ देर बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि मुख्य चनाव आयुक्त ने पूरी चुनाव आयोग को हाइजैक कर रखा है। उन्होंने अपने साथियों को भ्रम में रखा। आयोग का फैसला कोई अकेले नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय सांविधानक संस्थाएं बिल्कुल भी स्वतंत्र नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े मामले शामिल बताए गए। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ ऐसे फैसलों और आदेशों पर सवाल उठाए, जिनके बारे में उनका कहना था कि उनकी जानकारी या सहमति नहीं ली गई। हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
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इसके कुछ देर बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि मुख्य चनाव आयुक्त ने पूरी चुनाव आयोग को हाइजैक कर रखा है। उन्होंने अपने साथियों को भ्रम में रखा। आयोग का फैसला कोई अकेले नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय सांविधानक संस्थाएं बिल्कुल भी स्वतंत्र नहीं है।
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रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े मामले शामिल बताए गए। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ ऐसे फैसलों और आदेशों पर सवाल उठाए, जिनके बारे में उनका कहना था कि उनकी जानकारी या सहमति नहीं ली गई। हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
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