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रेहान वाड्रा प्रदर्शनी विवाद: तिरंगे की तस्वीरें हटाने पर भड़के आदित्य ठाकरे, कहा- प्रबंधन पर हो कड़ी कार्रवाई
Thu, 22 Oct 2026 06:25 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 22 Oct 2026 06:25 PM IST
सार
प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से कुछ तस्वीरें हटाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आदित्य ठाकरे ने बीकानेर हाउस प्रबंधन की आलोचना करते हुए भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल की मांग की। वहीं, प्रबंधन ने अपनी नीति का हवाला दिया है। तस्वीरों पर आपत्ति क्यों जताई गई? क्या राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाने के पीछे संस्थान की नीति ही वजह थी, या विवाद की कोई और वजह भी है? आइए, विस्तार से पूरी खबर को समझते हैं...
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रेहान वाड्रा प्रदर्शनी विवाद पर क्या बोले आदित्य ठाकरे?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की कला प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बीकानेर हाउस प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाए जाने को राष्ट्रविरोधी कृत्य बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की बहाली के बाद प्रबंधन को भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए। रेहान की प्रदर्शनी का नाम ‘नो आइडिया इज फाइनल’ है। बीकानेर हाउस सोसाइटी ने कहा कि उसने अपनी नीति से मेल नहीं खाने वाली कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा था। इस घटना ने कला की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी तस्वीरों को लेकर बहस खड़ी कर दी है।
तिरंगे की तस्वीरें हटाने पर आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बीकानेर हाउस प्रबंधन से सवाल किया कि क्या वह वास्तव में भारतीय है। आदित्य ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाना राष्ट्रविरोधी कृत्य है। उन्होंने यह भी कहा कि जब लोकतंत्र फिर से बहाल होगा, तब प्रबंधन को भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए। उन्होंने रेहान वाड्रा को संबोधित करते हुए उन तस्वीरों को नहीं हटाने के लिए उनकी सराहना भी की, जिनमें राष्ट्रीय ध्वज था। आदित्य ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था बिना किसी विवरण वाली तस्वीरों से भी डरती है।
रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी में क्या हुआ था?
रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ बुधवार शाम सात बजे शुरू होनी थी। रेहान ने बताया कि प्रदर्शनी शुरू होने से पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनसे कहा कि कुछ तस्वीरें आपत्तिजनक हो सकती हैं या संस्थान की नीति के खिलाफ जा सकती हैं। इसी के बाद तस्वीरों को हटाने को लेकर विवाद सामने आया। रेहान वाड्रा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि हटाई गई सभी तस्वीरों में क्या दिखाया गया था और किन खास नियमों के आधार पर उन पर आपत्ति जताई गई। यही वजह है कि तस्वीरों को लेकर प्रबंधन के फैसले और आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया चर्चा में हैं।
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बीकानेर हाउस प्रबंधन ने तस्वीरें हटाने के पीछे क्या वजह बताई?
बीकानेर हाउस सोसाइटी ने कहा कि उसने अपनी नीति के अनुरूप कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा था। प्रबंधन के मुताबिक, ये तस्वीरें संस्थान की नीति से मेल नहीं खाती थीं। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों पक्षों की बातों में अंतर होने के कारण विवाद बढ़ गया है। उपलब्ध जानकारी में बीकानेर हाउस की नीति के संबंधित नियमों और हटाई गई तस्वीरों की पूरी सूची का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीरों को हटाने के पीछे केवल संस्थान की नीति थी या कोई अन्य कारण भी था।
नूर्नबर्ग ट्रायल क्या है, जिसका आदित्य ठाकरे ने जिक्र किया?
नूर्नबर्ग ट्रायल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मित्र देशों की ओर से चलाए गए न्यायाधिकरण थे। इनमें नाजी जर्मनी के नेताओं पर युद्ध अपराधों और होलोकॉस्ट से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया गया था। आदित्य ठाकरे ने इसी ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बीकानेर हाउस प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका बयान तस्वीरें हटाने की कार्रवाई के खिलाफ राजनीतिक विरोध को दिखाता है। हालांकि, भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल की उनकी मांग एक राजनीतिक टिप्पणी है, न कि किसी मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया का नाम। इस संदर्भ के जरिए उन्होंने मामले को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और लोकतंत्र से जोड़कर उठाया है।
क्या यह विवाद कला की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ा है?
इस मामले में एक तरफ बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी नीति का हवाला देकर तस्वीरें हटाने की बात कही है, वहीं आदित्य ठाकरे ने इसे राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी शुरू होने से पहले तस्वीरों पर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, तस्वीरों की पूरी जानकारी और संबंधित नियम सामने नहीं आने के कारण विवाद के सभी पहलुओं पर स्पष्ट निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। फिलहाल यह मामला कला की अभिव्यक्ति, प्रदर्शनी स्थलों की नीतियों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर बहस का विषय बन गया है।
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तिरंगे की तस्वीरें हटाने पर आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बीकानेर हाउस प्रबंधन से सवाल किया कि क्या वह वास्तव में भारतीय है। आदित्य ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाना राष्ट्रविरोधी कृत्य है। उन्होंने यह भी कहा कि जब लोकतंत्र फिर से बहाल होगा, तब प्रबंधन को भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए। उन्होंने रेहान वाड्रा को संबोधित करते हुए उन तस्वीरों को नहीं हटाने के लिए उनकी सराहना भी की, जिनमें राष्ट्रीय ध्वज था। आदित्य ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था बिना किसी विवरण वाली तस्वीरों से भी डरती है।
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रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी में क्या हुआ था?
रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ बुधवार शाम सात बजे शुरू होनी थी। रेहान ने बताया कि प्रदर्शनी शुरू होने से पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उनसे कहा कि कुछ तस्वीरें आपत्तिजनक हो सकती हैं या संस्थान की नीति के खिलाफ जा सकती हैं। इसी के बाद तस्वीरों को हटाने को लेकर विवाद सामने आया। रेहान वाड्रा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि हटाई गई सभी तस्वीरों में क्या दिखाया गया था और किन खास नियमों के आधार पर उन पर आपत्ति जताई गई। यही वजह है कि तस्वीरों को लेकर प्रबंधन के फैसले और आदित्य ठाकरे की प्रतिक्रिया चर्चा में हैं।
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बीकानेर हाउस प्रबंधन ने तस्वीरें हटाने के पीछे क्या वजह बताई?
बीकानेर हाउस सोसाइटी ने कहा कि उसने अपनी नीति के अनुरूप कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा था। प्रबंधन के मुताबिक, ये तस्वीरें संस्थान की नीति से मेल नहीं खाती थीं। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें हटाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों पक्षों की बातों में अंतर होने के कारण विवाद बढ़ गया है। उपलब्ध जानकारी में बीकानेर हाउस की नीति के संबंधित नियमों और हटाई गई तस्वीरों की पूरी सूची का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीरों को हटाने के पीछे केवल संस्थान की नीति थी या कोई अन्य कारण भी था।
नूर्नबर्ग ट्रायल क्या है, जिसका आदित्य ठाकरे ने जिक्र किया?
नूर्नबर्ग ट्रायल द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मित्र देशों की ओर से चलाए गए न्यायाधिकरण थे। इनमें नाजी जर्मनी के नेताओं पर युद्ध अपराधों और होलोकॉस्ट से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया गया था। आदित्य ठाकरे ने इसी ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बीकानेर हाउस प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका बयान तस्वीरें हटाने की कार्रवाई के खिलाफ राजनीतिक विरोध को दिखाता है। हालांकि, भारतीय नूर्नबर्ग ट्रायल की उनकी मांग एक राजनीतिक टिप्पणी है, न कि किसी मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया का नाम। इस संदर्भ के जरिए उन्होंने मामले को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और लोकतंत्र से जोड़कर उठाया है।
क्या यह विवाद कला की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ा है?
इस मामले में एक तरफ बीकानेर हाउस प्रबंधन ने अपनी नीति का हवाला देकर तस्वीरें हटाने की बात कही है, वहीं आदित्य ठाकरे ने इसे राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी शुरू होने से पहले तस्वीरों पर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, तस्वीरों की पूरी जानकारी और संबंधित नियम सामने नहीं आने के कारण विवाद के सभी पहलुओं पर स्पष्ट निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। फिलहाल यह मामला कला की अभिव्यक्ति, प्रदर्शनी स्थलों की नीतियों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर बहस का विषय बन गया है।