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Nagpur: राजनाथ सिंह ने YIL आयुध कारखाने में किया भूमि पूजन, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर भी बोले रक्षा मंत्री
पीटीआई, नागपुर
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 19 Jun 2026 03:10 PM IST
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सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में कहा कि पारंपरिक युद्ध के तरीके आज भी उतने ही जरूरी हैं जितने 1947 में थे। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात तेजी से बढ़ा है। अब देश अपनी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम कर रहा है।
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
- फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को नागपुर के अंबाझरी में थे। यहां उन्होंने आयुध कारखाने में सरकारी कंपनी 'यंत्र इंडिया लिमिटेड' (YIL) की 10,000 टन की एल्युमीनियम एक्सट्रूजन प्रेस का शिलान्यास किया। यह नई सुविधा रक्षा क्षेत्र में जरूरी एल्युमीनियम पुर्जों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, पारंपरिक युद्ध और उसके तरीके आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने 1947 में थे। उन्होंने जोर दिया कि साल 2047 में भी इनकी अहमियत बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध छिड़ने पर सप्लाई चेन टूट सकती है। ऐसी स्थिति में हर देश चाहता है कि जरूरी सामान का निर्माण अपने ही देश में हो। जो राष्ट्र अपनी जरूरतें खुद पूरी करता है, वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
'2047 में भी पारंपरिक युद्ध और हथियार रहेंगे प्रासंगिक'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भले ही युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा हो, सीमाएं धुंधली हो रही हों और दुश्मन बिना दिखाई दिए किसी देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व अभी भी बरकरार है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 1947 में जैसे पारंपरिक युद्ध महत्वपूर्ण थे, वैसे ही 2047 में भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों के बावजूद किसी भी देश की सुरक्षा में मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रहने वाली है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाना और सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत की रणनीतिक जरूरत है। उनके मुताबिक मजबूत रक्षा उद्योग ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
'कॉरपोरेटाइजेशन के बाद नवाचार और निर्यात को मिली नई गति'
उन्होंने आगे ने कहा कि 2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद सरकार का स्पष्ट लक्ष्य था कि नई इकाइयों को पूरी स्वायत्तता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को नवाचार, जोखिम लेने, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार चाहती थी कि ये संस्थाएं अपनी क्षमता का विस्तार करें और नई ऊंचाइयों को छुएं। उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि यंत्र इंडिया लिमिटेड उसी दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
रक्षा उत्पादन में हुई बढ़ोतरी
उन्होंने सैन्य औद्योगिक आधार को भविष्य के लिए बहुत जरूरी बताया। राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा प्रगति के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2014 में भारत का रक्षा उत्पादन केवल 46,000 करोड़ रुपये था। साल 2025-26 में यह बढ़कर 1,78,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
ये भी पढ़ें: भ्रामक विज्ञापनों पर FSSAI की कार्रवाई: 14 कंपनियों को नोटिस जारी, नियमों के उल्लंघन पर मांगा जवाब
इसी तरह रक्षा निर्यात में भी बड़ी बढ़त हुई है। साल 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 1,000 करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में उभर रहा है। देश अब अपनी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, पारंपरिक युद्ध और उसके तरीके आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने 1947 में थे। उन्होंने जोर दिया कि साल 2047 में भी इनकी अहमियत बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध छिड़ने पर सप्लाई चेन टूट सकती है। ऐसी स्थिति में हर देश चाहता है कि जरूरी सामान का निर्माण अपने ही देश में हो। जो राष्ट्र अपनी जरूरतें खुद पूरी करता है, वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
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Speaking at the ‘Bhoomi Pujan Samaroh’ for 10,000-Tons Aluminium Extrusion Press at Yantra India Limited facility in Nagpur. https://t.co/AIzXA14Twu
विज्ञापन — Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 19, 2026
'2047 में भी पारंपरिक युद्ध और हथियार रहेंगे प्रासंगिक'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भले ही युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा हो, सीमाएं धुंधली हो रही हों और दुश्मन बिना दिखाई दिए किसी देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व अभी भी बरकरार है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 1947 में जैसे पारंपरिक युद्ध महत्वपूर्ण थे, वैसे ही 2047 में भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों के बावजूद किसी भी देश की सुरक्षा में मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रहने वाली है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाना और सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत की रणनीतिक जरूरत है। उनके मुताबिक मजबूत रक्षा उद्योग ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
#WATCH | Maharashtra: At ‘Bhoomi Pujan Samaroh’ for 10,000-Tons Aluminium Extrusion Press at Yantra India Limited facility in Nagpur, Defence Minister Rajnath Singh says, "We often say that the war is changing forms, borders are blurring, enemies go undetectable leaving armies… pic.twitter.com/LuUxxYqrVe
— ANI (@ANI) June 19, 2026
'कॉरपोरेटाइजेशन के बाद नवाचार और निर्यात को मिली नई गति'
उन्होंने आगे ने कहा कि 2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद सरकार का स्पष्ट लक्ष्य था कि नई इकाइयों को पूरी स्वायत्तता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को नवाचार, जोखिम लेने, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार चाहती थी कि ये संस्थाएं अपनी क्षमता का विस्तार करें और नई ऊंचाइयों को छुएं। उन्होंने संतोष जताते हुए कहा कि यंत्र इंडिया लिमिटेड उसी दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में रक्षा विनिर्माण को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
रक्षा उत्पादन में हुई बढ़ोतरी
उन्होंने सैन्य औद्योगिक आधार को भविष्य के लिए बहुत जरूरी बताया। राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा प्रगति के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2014 में भारत का रक्षा उत्पादन केवल 46,000 करोड़ रुपये था। साल 2025-26 में यह बढ़कर 1,78,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
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इसी तरह रक्षा निर्यात में भी बड़ी बढ़त हुई है। साल 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 1,000 करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में उभर रहा है। देश अब अपनी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।