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राम मंदिर मामला: विहिप ने दी क्लीन चिट? आलोक कुमार बोले- चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट से न देरी हुई न चूक
सार
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और जांच में सहयोग करने का कदम उसी ने उठाया।
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अयोध्या चढ़ावा विवाद पर विश्व हिंदू परिषद ने क्या कहा?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चाहती है कि राम मंदिर चढ़ावा घोटाले की गंभीर और ईमानदार जांच होनी चाहिए। अगर कोई बड़ा आदमी संलिप्त पाया जाए तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। जांच के दायरे से कोई पहलू, कोई व्यक्ति बचना नहीं चाहिए। लेकिन मंदिर प्रबंधन सरकार के हाथ में सौंप दिया जाए, विहिप इसके पक्ष में नहीं है, क्योंकि गड़बडी सरकारी संचालन में भी हो सकती है।
विहिप की राय में पूरे मामले में राम मंदिर तीर्थस्थान क्षेत्र ट्रस्ट से कोई चूक नहीं हुई और ट्रस्ट की भूमिका बिल्कुल सही रही है। ट्रस्ट ने ही पुलिस में एफआईआर कराई और खुद को भी जांच में शामिल किया। ट्रस्ट ने न कोई चूक की न ही देरी की। यह कहना है विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का। उन्होंने यह बात अमर उजाला डाॅट काम के कार्यक्रम खरी बात में कही।
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चंपत राय को लेकर क्या है विहिप की राय?
चंपत राय पर उठने वाले सवालों पर आलोक कुमार कहते हैं कि अभी यह तय होना है कि चंपत राय पर उठने वाले सवाल वाजिब हैं या नहीं। जमीन खरीद घोटाले पर उनका कहना था कि इस मामले की भी जांच हो रही है। एसआईटी की एफआईआर में यह विषय भी जांच में है और जांच के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। हालांकि इस मामले में मेरे पास भी सवालों के कुछ उत्तर हैं, लेकिन अभी उनको कहने का समय नहीं है।
ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह के आरोपों पर क्या बोले आलोक कुमार?
ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह द्वारा दो साल पहले चोरी की बात उजागर करने पर उन्हें क्यों हटा दिया गया, इस सवाल पर उनका कहना है कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि महिपाल सिंह जो कह रहे हैं, वह कितना सही है। क्या वह हटाए गए या उन्हें हटना पड़ा। निर्माण कार्यों में 40% कमीशन मांगे जाने के आरोप पर आलोक कुमार ने कहा कि यह आरोप वाजिब नहीं लगता, क्योंकि मंदिर निर्माण में सैकड़ों जगह काम हुआ है। सैकड़ों लोग इनकी प्रक्रिया से जुड़े और अगर सब जगह 40% कमीशन लिया जाता था तो यह बात तीन-चार साल तक क्यों नहीं सामने आई। अब अचानक क्यों आई है। फिर भी मैं किसी को क्लीन चिट नहीं दे रहा हूं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
नृपेन्द्र मिश्र ने कहा कि चोरी नहीं डकैती हुई इसका क्या आधार है, यह पूछने पर आलोक कुमार कहते हैं कि नृपेन्द्र मिश्र ट्रस्ट के प्रशासक भी हैं और उन्होंने जो कहा है कि इसके बारे में उनसे ही पूछना पड़ेगा। वैसे शब्दों के हेरफेर में न जाकर यह मानना चाहिए कि अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का अपराध हुआ है।
लोगों की नाराजगी प्रबंधन से हो सकती है, रामजी से नहीं
इस प्रकरण से क्या धर्मस्थलों के प्रति हिंदुओं की आस्था कम हो रही है, इसे गलत बताते हुए विहिप अध्यक्ष ने कहा, लोगों की नारागजगी प्रबंधन से हो सकती है, राम जी या अन्य देवताओं से नहीं। इससे क्या हिंदुत्व की राजनीति पर असर नहीं पड़ेगा, इस पर उनका कहना है कि हिंदू समाज पूरे मामले को लेकर बेहद आहत है और वह देखेगा कि इस मामले में जो भी दोषी हैं अगर उनमें से कुछ भी बच गए तो वह क्षमा नहीं करेगा और अगर सबको सजा मिली और जेल में चक्की पीसते दिखाई दिए तो हिंदू समाज न सिर्फ संतुष्ट होगा, बल्कि प्रबंधन को क्षमा भी कर देगा।
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विहिप की राय में पूरे मामले में राम मंदिर तीर्थस्थान क्षेत्र ट्रस्ट से कोई चूक नहीं हुई और ट्रस्ट की भूमिका बिल्कुल सही रही है। ट्रस्ट ने ही पुलिस में एफआईआर कराई और खुद को भी जांच में शामिल किया। ट्रस्ट ने न कोई चूक की न ही देरी की। यह कहना है विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का। उन्होंने यह बात अमर उजाला डाॅट काम के कार्यक्रम खरी बात में कही।
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चंपत राय को लेकर क्या है विहिप की राय?
चंपत राय पर उठने वाले सवालों पर आलोक कुमार कहते हैं कि अभी यह तय होना है कि चंपत राय पर उठने वाले सवाल वाजिब हैं या नहीं। जमीन खरीद घोटाले पर उनका कहना था कि इस मामले की भी जांच हो रही है। एसआईटी की एफआईआर में यह विषय भी जांच में है और जांच के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। हालांकि इस मामले में मेरे पास भी सवालों के कुछ उत्तर हैं, लेकिन अभी उनको कहने का समय नहीं है।
ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह के आरोपों पर क्या बोले आलोक कुमार?
ट्रस्ट के पूर्व लेखाधिकारी महिपाल सिंह द्वारा दो साल पहले चोरी की बात उजागर करने पर उन्हें क्यों हटा दिया गया, इस सवाल पर उनका कहना है कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि महिपाल सिंह जो कह रहे हैं, वह कितना सही है। क्या वह हटाए गए या उन्हें हटना पड़ा। निर्माण कार्यों में 40% कमीशन मांगे जाने के आरोप पर आलोक कुमार ने कहा कि यह आरोप वाजिब नहीं लगता, क्योंकि मंदिर निर्माण में सैकड़ों जगह काम हुआ है। सैकड़ों लोग इनकी प्रक्रिया से जुड़े और अगर सब जगह 40% कमीशन लिया जाता था तो यह बात तीन-चार साल तक क्यों नहीं सामने आई। अब अचानक क्यों आई है। फिर भी मैं किसी को क्लीन चिट नहीं दे रहा हूं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
नृपेन्द्र मिश्र ने कहा कि चोरी नहीं डकैती हुई इसका क्या आधार है, यह पूछने पर आलोक कुमार कहते हैं कि नृपेन्द्र मिश्र ट्रस्ट के प्रशासक भी हैं और उन्होंने जो कहा है कि इसके बारे में उनसे ही पूछना पड़ेगा। वैसे शब्दों के हेरफेर में न जाकर यह मानना चाहिए कि अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का अपराध हुआ है।
लोगों की नाराजगी प्रबंधन से हो सकती है, रामजी से नहीं
इस प्रकरण से क्या धर्मस्थलों के प्रति हिंदुओं की आस्था कम हो रही है, इसे गलत बताते हुए विहिप अध्यक्ष ने कहा, लोगों की नारागजगी प्रबंधन से हो सकती है, राम जी या अन्य देवताओं से नहीं। इससे क्या हिंदुत्व की राजनीति पर असर नहीं पड़ेगा, इस पर उनका कहना है कि हिंदू समाज पूरे मामले को लेकर बेहद आहत है और वह देखेगा कि इस मामले में जो भी दोषी हैं अगर उनमें से कुछ भी बच गए तो वह क्षमा नहीं करेगा और अगर सबको सजा मिली और जेल में चक्की पीसते दिखाई दिए तो हिंदू समाज न सिर्फ संतुष्ट होगा, बल्कि प्रबंधन को क्षमा भी कर देगा।