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बंगाल: TMC के बागी सांसद बोले- पार्टी को नए सिरे से खड़ा करेंगे, डबल इंजन सरकार के साथ करना चाहते हैं काम

एएनआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 12 Jun 2026 04:05 PM IST
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सार

टीएमसी के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने दावा किया है कि उनके गुट को 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उनका समूह टीएमसी को नए स्वरूप में पुनर्गठित करना चाहता है और भाजपा के समर्थन से राज्य व केंद्र के बीच ‘डबल इंजन’ व्यवस्था के तहत काम करेगा। पढ़िए रिपोर्ट-

Rebel MP Arup Chakraborty claims support of 20 MPs, says group wants to "rebuild TMC in new form"
अरूप चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में जारी अंदरूनी विवाद पार्टी के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने शुक्रवार को दावा किया कि करीब 20 सांसद उनके गुट का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका गुट टीएमसी को नए रूप में फिर से खड़ा करना चाहता है और राज्य तथा केंद्र के बीच 'डबल इंजन सरकार' के साथ काम करना चाहता है।



चक्रवर्ती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन उनके समूह के साथ रहेगा। बागी सांसदों का समर्थन भाजपा को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा, राज्य और केंद्र मिलकर 'डबल इंजन सरकार' के जरिये काम करेंगे। संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने वाले सांसदों में शामिल चक्रवर्ती ने कहा, हमें 20 सांसदों का समर्थन हासिल है। 
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चक्रवर्ती ने टीएमसी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये बातें कौन फैला रहा है? हमारे खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। हम टीएमसी को बचाना चाहते हैं। हमारे चुने हुए प्रतिनिधि टीएमसी के साथ मिलकर एक नई पार्टी बनाएंगे। हम अपनी 20 सीटों के साथ अलग बैठना चाहते हैं। हम किसी की चापलूसी करने नहीं जा रहे हैं। हमें जनता के वोट और आशीर्वाद से टीएमसी के टिकट पर जीत मिली है। हम जनता के समर्थन से संसद पहुंचे हैं। टीएमसी को नए रूप में फिर खड़ा करना चाहते हैं।
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उन्होंने आगे कहा, एक अच्छी बात यह है कि भाजपा का समर्थन हमारे साथ रहेगा और हमारा समर्थन भाजपा के साथ रहेगा। राज्य और केंद्र मिलकर डबल इंजन सरकार के माध्यम से काम करेंगे। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया था कि बागी नेता भाजपा के सत्ता में होने के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं और 'सत्ता के भूखे' हैं।

पार्टी में अभिषेक बनर्जी के कथित दखलंदाजी पर क्या कहा?
पार्टी के कामकाज में अभिषेक बनर्जी के अत्यधिक दखल देने और कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलों पर चक्रवर्ती ने कहा, राजनीतिक दलों को नेताओं के बीच चर्चा के आधार पर चलना चाहिए। उसी के अनुसार फैसले लिए जाने चाहिए। 

उन्होंने कहा, आप ममता (बनर्जी) जी से पूछिए कि वह सभी लोगों के साथ बैठकर चर्चा क्यों नहीं करतीं। किसी पार्टी के अंदरूनी मामलों पर हर किसी से चर्चा नहीं की जाती। पार्टी का अनुशासन होता है और गोपनीय बातें सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं होतीं। राजनीतिक दल नेताओं के बीच बातचीत से चलते हैं। उसी के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं। व्यवहार अच्छा होना चाहिए। जबरदस्ती से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। सभी को मिलकर काम करना चाहिए। राजनीति लड़ाई-झगड़े या घर में आग लगाने का नाम नहीं है। यह जनता की सेवा का काम है। लोकतंत्र में राजनेता लोगों के लिए काम करते हैं और उस काम को आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। 

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज, चुनाव से पहले कथित सांप्रदायिक बयान देने का आरोप

लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जमा कराए नाम
पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच कई इस्तीफों और बागी नेताओं के बयानों ने संगठन की एकजुटता और संभावित विभाजन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय सहित 19 अलग हुए सांसदों ने 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में अपने नाम जमा कराए थे। इस सूची में शामिल हैं-

  • बापी हलदार 
  • डॉ. शर्मिला सरकार
  • प्रसून बंद्योपाध्याय
  • जगदीश बर्मा बसुनिया
  • असित कुमार माल
  • अरूप चक्रवर्ती
  • रचना बनर्जी
  • सायोनी घोष
  • खलीलुर रहमान
  • अबू ताहेर खान
  • यूसुफ पठान
  • मिताली बाग
  • माला रॉय
  • कालिपदा सोरेन
  • दीपक अधिकारी
  • जून मालिया
  • पार्थ भौमिक 

संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग 
बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पहले पुष्टि की थी कि 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है। इसे पार्टी के संसदीय दल के भीतर संगठनात्मक विभाजन का संकेत माना जा रहा है। यह घटनाक्रम 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के कमजोर प्रदर्शन के बाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के पुराने नेताओं और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद और अधिक बढ़ गए हैं।

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