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पहले छिड़का गंगाजल, फिर संभाली कुर्सी: आरोपी पार्थ चटर्जी के कमरे में विशेष पूजा, नए मंत्री को याद आए भगवान!
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 12 Jun 2026 05:24 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल के नए मंत्री विशाल लामा ने सचिवालय के कमरा नंबर 101 में बैठने से पहले पूजा-पाठ किया। यह कमरा घोटाला आरोपी पार्थ चटर्जी का था। मंत्री ने इसे अपनी पुरानी पारिवारिक परंपरा बताया है। क्या है मामला? जानिए...
विशाल लामा, बंगाल के मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में एक अनोखा वाकया सामने आया है। नवनियुक्त राज्य मंत्री विशाल लामा शुक्रवार को अपने नए दफ्तर पहुंचे। यह दफ्तर राज्य सचिवालय में स्थित है। इस कमरे का इस्तेमाल कभी पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी करते थे। पार्थ चटर्जी स्कूल नौकरी घोटाले में गिरफ्तार हुए थे। मंत्री विशाल लामा ने इस कमरे में बैठने से पहले विशेष पूजा की। हालांकि, गृह और पर्वतीय मामले विभाग के राज्य मंत्री लामा ने इसे सामान्य बात बताया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि नए काम से पहले पूजा करना उनका निजी फैसला है। इसे कमरे के पुराने मंत्री से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
विशाल लामा कालचीनी क्षेत्र के विधायक हैं। उनके पास अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी है। पद संभालने के बाद वे पहली बार राज्य सचिवालय 'नबन्ना' पहुंचे थे। यह दफ्तर सचिवालय की पहली मंजिल पर है।
दफ्तर का इतिहास और मंत्री का फैसला
सचिवालय के अधिकारियों ने मंत्री को एक खास जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कमरा नंबर 101 है। पिछली सरकार में पार्थ चटर्जी इसी कमरे में बैठते थे। बैठकों के दौरान वे इसी दफ्तर का इस्तेमाल करते थे। यह बात सुनते ही विशाल लामा सजग हो गए। उन्होंने तुरंत कमरे में धार्मिक अनुष्ठान कराने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक लामा ने साफ कहा कि वे पहले पूरे कमरे में गंगाजल छिड़केंगे। भगवान की प्रार्थना करेंगे। इसके बाद ही वे इस कुर्सी पर बैठेंगे। अधिकारियों ने बताया कि मंत्री ने ऐसा ही किया। उन्होंने पहले पूरे विधि-विधान से पूजा कराई। इसके बाद ही दफ्तर का कार्यभार संभाला।
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यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल:ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज, चुनाव के समय भड़काऊ बयान देने का आरोप
पुरानी परंपरा और मंत्री की दलील
मंत्री विशाल लामा ने अपने इस कदम को परंपरा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि शुभ कार्य से पहले प्रार्थना करना हमारी संस्कृति है। उन्होंने बताया कि जब वे पहली बार विधायक बने थे, तब भी उन्होंने अपने दफ्तर में पूजा की थी। वे यहां भी बस उसी नियम का पालन कर रहे हैं।
बता दें कि पार्थ चटर्जी ममता बनर्जी सरकार में बड़े मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। उन पर स्कूल नौकरी घोटाले का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद टीएमसी ने उन्हें पांच साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।
पूरे देश में हुई थी घोटाले की चर्चा
यह घोटाला बेहद बड़ा था। इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी हुई थी। वहां से भारी मात्रा में कैश और गहने मिले थे। नोटों के पहाड़ों की तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। इस मामले में फंसे पार्थ चटर्जी को लंबे समय बाद राहत मिली। जेल में तीन साल तीन महीने बिताने के बाद, नवंबर 2025 में उन्हें जमानत मिली।
विशाल लामा कालचीनी क्षेत्र के विधायक हैं। उनके पास अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी है। पद संभालने के बाद वे पहली बार राज्य सचिवालय 'नबन्ना' पहुंचे थे। यह दफ्तर सचिवालय की पहली मंजिल पर है।
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दफ्तर का इतिहास और मंत्री का फैसला
सचिवालय के अधिकारियों ने मंत्री को एक खास जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कमरा नंबर 101 है। पिछली सरकार में पार्थ चटर्जी इसी कमरे में बैठते थे। बैठकों के दौरान वे इसी दफ्तर का इस्तेमाल करते थे। यह बात सुनते ही विशाल लामा सजग हो गए। उन्होंने तुरंत कमरे में धार्मिक अनुष्ठान कराने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक लामा ने साफ कहा कि वे पहले पूरे कमरे में गंगाजल छिड़केंगे। भगवान की प्रार्थना करेंगे। इसके बाद ही वे इस कुर्सी पर बैठेंगे। अधिकारियों ने बताया कि मंत्री ने ऐसा ही किया। उन्होंने पहले पूरे विधि-विधान से पूजा कराई। इसके बाद ही दफ्तर का कार्यभार संभाला।
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पुरानी परंपरा और मंत्री की दलील
मंत्री विशाल लामा ने अपने इस कदम को परंपरा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि शुभ कार्य से पहले प्रार्थना करना हमारी संस्कृति है। उन्होंने बताया कि जब वे पहली बार विधायक बने थे, तब भी उन्होंने अपने दफ्तर में पूजा की थी। वे यहां भी बस उसी नियम का पालन कर रहे हैं।
बता दें कि पार्थ चटर्जी ममता बनर्जी सरकार में बड़े मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। उन पर स्कूल नौकरी घोटाले का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद टीएमसी ने उन्हें पांच साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर दिया था।
पूरे देश में हुई थी घोटाले की चर्चा
यह घोटाला बेहद बड़ा था। इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापेमारी हुई थी। वहां से भारी मात्रा में कैश और गहने मिले थे। नोटों के पहाड़ों की तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। इस मामले में फंसे पार्थ चटर्जी को लंबे समय बाद राहत मिली। जेल में तीन साल तीन महीने बिताने के बाद, नवंबर 2025 में उन्हें जमानत मिली।