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TMC Vs Centre: 'बाढ़ प्रबंधन के तहत बंगाल को ₹1290 करोड़ से अधिक जारी किए गए', ममता के आरोप पर केंद्र का जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 07 Oct 2025 10:39 AM IST
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सार
केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन आरोपों का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने केंद्र पर राज्य के प्रति भेदभाव का आरोप लगाया था। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि केंद्र उनकी मांग पर इंडो-भूटान नदी आयोग नहीं बना रहा है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो उत्तर बंगाल बार-बार बाढ़ की त्रासदी सहता रहेगा।
ममता बनर्जी के आरोपों पर केंद्र ने दिया जवाब
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्र सरकार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाढ़ प्रबंधन और नदी सफाई को लेकर लगाए गए भेदभाव के आरोपों को खारिज कर दिया। सरकार ने कहा कि भारत पहले से ही भूटान के साथ सीमापार नदी संबंधी मुद्दों पर निकटता से काम कर रहा है और राज्य को बाढ़ प्रबंधन योजनाओं के तहत 1,290 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए जा चुके हैं।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: तेलंगाना में 42% पिछड़ा वर्ग आरक्षण के फैसले पर विचार नहीं; केंद्रीकृत पोर्टल पर RBI देगा जवाब
सीएम ममता बनर्जी ने क्या लगाए थे आरोप?
उत्तर बंगाल में सोमवार को हुई भारी बारिश ने कई इलाकों में तबाही मचाई, जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र उनकी मांग पर इंडो-भूटान नदी आयोग नहीं बना रहा है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो उत्तर बंगाल बार-बार बाढ़ की त्रासदी सहता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र बाढ़ प्रबंधन के लिए कोई फंड नहीं देता और गंगा सफाई योजना को भी रोक दिया गया है।
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ममता के आरोप पर केंद्र का जवाब
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि भारत और भूटान के बीच पहले से ही संयुक्त विशेषज्ञ समूह (जेजीई), संयुक्त तकनीकी टीम (जेटीटी) और संयुक्त विशेषज्ञ टीम (जेईटी) जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं हैं। ये टीमें उत्तर बंगाल में नदी कटाव, तलछट जमा होने और अचानक बाढ़ जैसे मुद्दों को लेकर काम करती हैं। मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारी भी इन संयुक्त टीमों में शामिल हैं।
हाल ही में भूटान के पारो में आयोजित 11वीं जेजीई बैठक में, राज्य में प्रवेश करने वाली आठ अतिरिक्त नदियों, जैसे हाशिमारा झोरा, जोगिखोला, रोकिया, धवला झोरा, गाबूर बसरा, गाबूर ज्योति, पाना और रईडक (प्रथम और द्वितीय), का नदी कटाव और तलछट पर संयुक्त अध्ययन करने का निर्णय लिया गया। अब पश्चिम बंगाल सरकार को इन नदियों पर विस्तृत अध्ययन करना होगा और इसे साल के अंत में जेटीटी बैठक में प्रस्तुत करना होगा। केंद्र ने यह भी बताया कि भूटान के जल विज्ञान अवलोकन नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है ताकि भारत में बहने वाली नदियों में बाढ़ की सही समय पर भविष्यवाणी की जा सके।
फंडिंग और गंगा सफाई पर स्थिति
केंद्र ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं से संबंधित कोई भी फंडिंग प्रस्ताव लंबित नहीं है। पश्चिम बंगाल को फ्लड मैनेजमेंट और बॉर्डर एरियाज प्रोग्राम (एफएमबीएपी) के तहत 1,290 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। गंगा सफाई योजना को लेकर ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल में गंगा और नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत 62 परियोजनाएं (कुल लागत 5,648.52 करोड़ रुपये) संचालित की जा रही हैं। इनमें से 31 परियोजनाएं सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं और 30 परियोजनाएं घाट और चिता स्थल से संबंधित हैं।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: 'संदेह कितना भी प्रबल हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता', बच्चे की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट
कोलकाता में टॉली नल्लाह परियोजना जैसी बड़ी नदी पुनर्जीवन पहल भी नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत स्वीकृत हो चुकी है। मंत्रालय ने दोहराया कि केंद्र भूटान और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
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सीएम ममता बनर्जी ने क्या लगाए थे आरोप?
उत्तर बंगाल में सोमवार को हुई भारी बारिश ने कई इलाकों में तबाही मचाई, जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र उनकी मांग पर इंडो-भूटान नदी आयोग नहीं बना रहा है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो उत्तर बंगाल बार-बार बाढ़ की त्रासदी सहता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र बाढ़ प्रबंधन के लिए कोई फंड नहीं देता और गंगा सफाई योजना को भी रोक दिया गया है।
ममता के आरोप पर केंद्र का जवाब
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि भारत और भूटान के बीच पहले से ही संयुक्त विशेषज्ञ समूह (जेजीई), संयुक्त तकनीकी टीम (जेटीटी) और संयुक्त विशेषज्ञ टीम (जेईटी) जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं हैं। ये टीमें उत्तर बंगाल में नदी कटाव, तलछट जमा होने और अचानक बाढ़ जैसे मुद्दों को लेकर काम करती हैं। मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारी भी इन संयुक्त टीमों में शामिल हैं।
हाल ही में भूटान के पारो में आयोजित 11वीं जेजीई बैठक में, राज्य में प्रवेश करने वाली आठ अतिरिक्त नदियों, जैसे हाशिमारा झोरा, जोगिखोला, रोकिया, धवला झोरा, गाबूर बसरा, गाबूर ज्योति, पाना और रईडक (प्रथम और द्वितीय), का नदी कटाव और तलछट पर संयुक्त अध्ययन करने का निर्णय लिया गया। अब पश्चिम बंगाल सरकार को इन नदियों पर विस्तृत अध्ययन करना होगा और इसे साल के अंत में जेटीटी बैठक में प्रस्तुत करना होगा। केंद्र ने यह भी बताया कि भूटान के जल विज्ञान अवलोकन नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है ताकि भारत में बहने वाली नदियों में बाढ़ की सही समय पर भविष्यवाणी की जा सके।
फंडिंग और गंगा सफाई पर स्थिति
केंद्र ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं से संबंधित कोई भी फंडिंग प्रस्ताव लंबित नहीं है। पश्चिम बंगाल को फ्लड मैनेजमेंट और बॉर्डर एरियाज प्रोग्राम (एफएमबीएपी) के तहत 1,290 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। गंगा सफाई योजना को लेकर ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम बंगाल में गंगा और नमामी गंगे कार्यक्रम के तहत 62 परियोजनाएं (कुल लागत 5,648.52 करोड़ रुपये) संचालित की जा रही हैं। इनमें से 31 परियोजनाएं सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं और 30 परियोजनाएं घाट और चिता स्थल से संबंधित हैं।
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कोलकाता में टॉली नल्लाह परियोजना जैसी बड़ी नदी पुनर्जीवन पहल भी नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत स्वीकृत हो चुकी है। मंत्रालय ने दोहराया कि केंद्र भूटान और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है।