तेलंगाना हाईकोर्ट: एवी रंगनाथ को राहत, कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर पद से हटाने के आदेश पर लगाई रोक
तेलंगाना हाई कोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) के कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को बड़ी राहत देते हुए सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को उन्हें पद से हटाने और उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
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तेलंगाना हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने हाइड्रा कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को राहत देते हुए सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें पद से हटाने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स की अवमानना याचिका के बाद आया था। सिंगल जज ने हाइड्रा पर कोर्ट के आदेशों की अनदेखी और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। रंगनाथ के खिलाफ करीब डेढ़ साल में 63 अवमानना याचिकाएं लंबित होने की बात भी कोर्ट के संज्ञान में आई थी। वहीं, रंगनाथ ने सभी मामलों का कानूनी तरीके से सामना करने और न्यायपालिका पर भरोसा जताया है। हाइड्रा का दावा है कि उसने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन और जल निकायों को अतिक्रमण से बचाया है, जबकि विपक्षी दल एजेंसी की कार्रवाई और गरीबों के घर गिराए जाने को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
सिंगल जज के आदेश को रंगनाथ ने दी थी चुनौती
रंगनाथ ने 27 जुलाई को सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई। इस दौरान हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजीव शकधर ने रंगनाथ की ओर से पक्ष रखा। शुरुआती दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। जस्टिस अनिल कुमार जुकांती ने 27 जुलाई को मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वह रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटा दें और उनकी जगह किसी उपयुक्त अधिकारी की नियुक्ति करें।
अवमानना याचिका पर आया था सिंगल जज का फैसला
यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर अवमानना याचिका पर आया था। कंपनी का आरोप था कि हाइड्रा के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए 50 गाड़ियों और 200 कर्मचारियों के साथ लोथकुंटा स्थित उसकी 40 एकड़ जमीन में प्रवेश किया।
कोर्ट ने हाइड्रा पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का लगाया आरोप
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि रंगनाथ 'अपनी मर्जी से काम करने वाले' बन गए हैं। कोर्ट के मुताबिक, हाइड्रा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है और रेवेन्यू, सिंचाई तथा जीएचएमसी विभागों को नजरअंदाज कर रहा है।
पिछली सुनवाई में कमिश्नर को लगाई थी कड़ी फटकार
इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर कोर्ट के आदेशों का बार-बार उल्लंघन किया गया तो रंगनाथ को सेना की हिरासत में लेकर आर्मी बैरक में रखने का निर्देश भी दिया जा सकता है। कमिश्नर को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। इसमें याचिकाकर्ता की अनुमति के बिना विवादित संपत्ति में हाइड्रा के कर्मचारियों और मशीनरी के प्रवेश करने तथा वहां बाड़ लगाने के लिए स्पष्ट रूप से माफी मांगनी थी।
हलफनामा दाखिल नहीं हुआ, अधिकारी भी नहीं हुए पेश
हलफनामा दाखिल नहीं किया गया और अधिकारी सुनवाई के दौरान उपस्थित भी नहीं हुए। इस पर जस्टिस जुकांती ने कड़ी आपत्ति जताई और राज्य सरकार को रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि लगभग डेढ़ साल की अवधि में रंगनाथ के खिलाफ 63 अवमानना याचिकाएं लंबित थीं।
'सभी मामलों का कानूनी तरीके से करेंगे सामना'
सिंगल जज के आदेश के बाद रंगनाथ ने कहा था कि वह अपने खिलाफ दायर सभी 63 अवमानना मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मामले प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों की ओर से दायर किए गए हैं, जो झीलों और सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए हाइड्रा की ओर से चलाए जा रहे अभियान से प्रभावित हुए हैं।
जमीन माफिया पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप
रंगनाथ ने आरोप लगाया कि जमीन माफिया और अतिक्रमणकारी गलत जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सरकार द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना मैं 100 प्रतिशत परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हूं और ऐसा करना जारी रखूंगा।'
दो साल पहले बनी एजेंसी के प्रमुख हैं रंगनाथ
इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के अधिकारी ए.वी. रंगनाथ दो साल पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एजेंसी हाइड्रा के प्रमुख हैं।
'1.5 लाख करोड़ की सरकारी जमीन बचाई'
पिछले दो वर्षों में हाइड्रा का दावा है कि उसने 1.5 लाख करोड़ रुपये की कीमत वाली 3,315 एकड़ सरकारी जमीन को बचाया है और कई जल निकायों को बहाल किया है। एजेंसी ने कहा कि उसने झीलों, नालों, पार्कों, सरकारी जमीनों और ब्लू-ग्रीन संसाधनों को वापस हासिल किया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की।
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विपक्षी दलों ने हाइड्रा के कामकाज पर उठाए सवाल
हाइड्रा के कामकाज की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। विपक्षी दलों ने एजेंसी पर सरकारी जमीन पर बने गरीबों के घरों को बुलडोजर से गिराने का आरोप लगाया है।