सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   RTE norms ignored in Punjab?: Supreme Court issues notice, seeks response from Centre and State government.

पंजाब में आरटीई नियमों की अनदेखी?: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: Asmita Tripathi Updated Mon, 15 Jun 2026 04:42 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में आरटीई अधिनियम, 2009 के कथित गैर-पालन पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में निजी स्कूलों में कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए 25% आरक्षण लागू न होने का आरोप है।

RTE norms ignored in Punjab?: Supreme Court issues notice, seeks response from Centre and State government.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और पंजाब सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है। जिसमें राज्य में बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के लागू न होने का आरोप लगाया गया है।

पीठ ने क्या सवाल किया?
याचिका में केंद्र को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि पंजाब सरकार की ओर से अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, जिसमें निजी स्कूलों में कक्षा 1 में कम से कम 25 प्रतिशत कमजोर वर्ग और वंचित समूह के बच्चों को प्रवेश देने से संबंधित प्रावधान भी शामिल है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उपस्थित याचिकाकर्ता से पूछा, 'क्या आप कुछ ऐसे स्कूलों की पहचान कर पाए हैं जो ऐसा नहीं कर रहे हैं?'

विज्ञापन
विज्ञापन

15 वर्षों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पंजाब में पिछले 15 वर्षों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 2012 के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें आरटीई अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा गया था। पीठ ने राज्य की ओर से पहले दायर किए गए एक हलफनामे का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 450 से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया था।

विज्ञापन

'हम नोटिस जारी कर रहे हैं।'
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह संख्या लगभग 50,000 होनी चाहिए थी, क्योंकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रवेश स्तर पर हर साल लगभग दो लाख छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। बेंच ने कहा 'हम नोटिस जारी कर रहे हैं।' सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि वह कम से कम एक जिले में सर्वेक्षण करे ताकि यह पता चल सके कि वहां कितने निजी स्कूल हैं। उनमें से कितने अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं कर रहे हैं।

जब याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने पिछले साल इस मुद्दे पर एक आरटीआई दायर की थी, तो पीठ ने टिप्पणी की कि आरटीआई के साथ समस्या यह है कि अधिकारी पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति के अनुसार ही जवाब देंगे। याचिका में केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह पंजाब में अधिनियम की धारा 12(1)(सी) के अनुपालन की निगरानी और सुनिश्चित करने के लिए जनता के लिए सुलभ डैशबोर्ड सहित एक पारदर्शी, समयबद्ध और सत्यापन योग्य तंत्र स्थापित करे और सुनिश्चित करे।

क्या है धारा 12?
अधिनियम की धारा 12 निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिए विद्यालय की जिम्मेदारी की सीमा से संबंधित है। धारा 12 (1) (सी) कहती है कि एक विद्यालय कक्षा 1 में, उस कक्षा की कुल संख्या के कम से कम 25 प्रतिशत तक, आस-पड़ोस के कमजोर वर्गों और वंचित समूहों से संबंधित बच्चों को प्रवेश देगा। इसकी साथ ही उसकी पूर्णता तक मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देंगे ।

 

याचिका में केंद्र को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह पंजाब में अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए एक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र की स्थापना सुनिश्चित करे, जिसमें उपलब्ध सीटों का निर्धारण और प्रकाशन, प्रवेश कार्यक्रम का प्रकाशन, सुलभ आवेदन प्रक्रिया, प्रतिपूर्ति ढांचा और गैर-अनुपालन के लिए वैधानिक परिणामों का प्रवर्तन शामिल है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed