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Supreme Court: पेपर लीक के आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की मांग, शीर्ष अदालत ने केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

Tue, 18 Aug 2026 01:53 PM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Tue, 18 Aug 2026 01:53 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट अब केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब मिलने के बाद इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा। अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों की संपत्ति जब्त करने और अपराध से जुड़े आर्थिक लाभ पर कार्रवाई के लिए किस तरह की कानूनी व्यवस्था लागू की जा सकती है।

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SC notice to Centre, states on plea to confiscate property of offenders in paper leak cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। याचिका में पेपर लीक में शामिल आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति की जांच कर उसे जब्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की है।
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आरोपियों और परिवार की संपत्ति की जांच की मांग
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक करने वालों और इस तरह के अपराध में शामिल लोगों की पूरी संपत्ति का आकलन किया जाना चाहिए। इसमें उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति की भी जांच करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि जांच में अवैध संपत्ति या अपराध से अर्जित धन का पता चलता है तो भ्रष्टाचार निवारण कानून, मनी लॉन्ड्रिंग कानून, बेनामी संपत्ति कानून और ब्लैक मनी कानून के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि पेपर लीक के अपराध में दोषी पाए जाने पर मिलने वाली सजाएं लगातार चलें, यानी एक के बाद एक लागू हों, न कि एक साथ। याचिकाकर्ता के मुताबिक इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
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कानून आयोग से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर रिपोर्ट की मांग
याचिका में वैकल्पिक तौर पर कानून आयोग को पेपर लीक से निपटने के लिए दूसरे देशों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन करने और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से समयबद्ध जांच और मुकदमे की मांग को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित हो चुका है और इसमें पेपर लीक के खिलाफ कानून को और कड़ा किया गया है।


छात्रों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने, उनकी जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई करने में बार-बार नाकामी से छात्रों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का हवाला दिया है। याचिका के मुताबिक, सरकारों की ओर से पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाए जाने के बावजूद व्यवस्था में अभी भी कई कमियां हैं। इनमें जांच और मुकदमे के लिए निश्चित समय सीमा का अभाव भी शामिल है।

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पेपर लीक का छात्रों और परिवारों पर गंभीर असर
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक का सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होता है, जो महीनों और वर्षों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा रद्द होने या दोबारा होने से उनकी पढ़ाई और करियर की योजना प्रभावित होती है। इसका असर छात्रों के परिवारों पर भी पड़ता है। उन्हें लंबे समय तक तैयारी, कोचिंग और परीक्षा से जुड़े खर्च उठाने पड़ते हैं। कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। याचिका में दावा किया गया है कि पेपर लीक से पैदा होने वाले मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण छात्रों में गंभीर मानसिक परेशानियां भी बढ़ती हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या की घटनाएं भी सामने आई हैं।
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