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सुप्रीम कोर्ट सावरकर की तस्वीर हटाने की मांग पर सख्त: याचिकाकर्ता को फटकार, पूछा- आप खुद को क्या समझते हो?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 13 Jan 2026 03:54 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर की की तस्वीर हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर कड़ा रुख अपनाया। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए भारी जुर्माने की चेतावनी दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की सेवा पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली। सुनवाई के दौरान क्या हुआ, पढ़िए-

SC refuses to entertain PIL seeking removal of Savarkar portraits, warns of costs
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संसद और अन्य सार्वजनिक स्थानों से विनायक दामोदर सावरकर के चित्र हटाने की मांग वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को जुर्माना लगाने की चेतावनी दी, जिसके बाद याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी गई।
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चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने याचिकाकर्ता बी. बालमुरुगन को फटकार लगाई, भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। बेंच ने कहा कि इस तरह की याचिका निरर्थक है और कोर्ट का समय बर्बाद करती है, जिस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
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याचिकाकर्ता को क्यों फटकार लगी?
सीजेआई ने कहा, इस तरह की ओछी याचिकाएं मानसिकता को दिखाती हैं। बेंच उस समय नाराज हुई, जब याचिकाकर्ता ने कहा कि वह आर्थिक परेशानी के कारण अदालत में आकर खुद बहस नहीं कर सकते। इस पर सीजेआई ने कहा, आप आईआरएस में थे। आप दिल्ली आ सकते हैं, खुद पेश हो सकते हैं और बहस कर सकते हैं। हम आप पर भारी जुर्माना लगा सकते हैं। आप अपने आप को क्या समझते हैं? 

याचिका में क्या मांग की गई थी?
बालामुरुगन ने अपनी जनहित याचिका में संसद के केंद्रीय कक्ष और अन्य सार्वजनिक स्थानों से सावरकर के चित्र हटाने का निर्देश देने की मांग की थी। इसके अलावा, याचिका में सरकार को ऐसे लोगों को सम्मान देने से रोकने की मांग की गई थी, जिन पर हत्या, हत्या की साजिश या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर अपराधों आरोप लगे हों, जब तक वे अदालत से बरी न हो जाएं। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि और उनके सेवा रिकॉर्ड पर सवाल किए। उन्होंने यह भी पूछा कि सेवानिवृत्ति से पहले उनकी अंतिम तैनाती कहां थी और उन्हें पदोन्नति क्यों नहीं मिल पाई।

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'सेवानिवृत्ति का आनंद लीजिए..'
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे, तो बालामुरुगन ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि 2009 में 'श्रीलंका में शांति' के लिए भूख हड़ताल करने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई थी। बेंच ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और याचिकाकर्ता से पूछा कि वह मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं या वापस लेना चाहते हैं। सीजेआई ने कहा, कृपया इस तरह की चीजों में मत पड़िए। अब अपनी सेवानिवृत्ति का आनंद लीजिए। समाज में कोई सकारात्मक भूमिका निभाइए। परिणाम को भांपते हुए, बालामुरुगन ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।



 
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