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Budget: क्या बजट में आयकर दाताओं को फिर मिलेगी कोई छूट? व्यापार बढ़ाने के लिए सरकार करेगी ये उपाय
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सार
वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट इस बार रविवार को पेश किया जाएगा। संसदीय इतिहास में पहली बार रविवार के दिन केंद्रीय बजट पेश होगा। 2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर में भारी छूट दी थी। जनता इस बार सरकार से टैक्स कटौती की उम्मीद लगा रही है।
निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस वर्ष रविवार एक फरवरी को बजट पेश करेंगी। बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा जो 2 अप्रैल तक चलेगा। इस समय देश की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में बनी हुई है। जीएसटी कर संग्रह लगातार ऊंचा बना हुआ है। लगभग सभी वित्तीय एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत से लेकर 7.4 प्रतिशत के बीच बढ़ोतरी हासिल कर सकती है। इसे देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष केंद्रीय वित्त मंत्री बजट में ऐसे उपाय करेगी जिससे व्यापार में वृद्धि दर बनी रहे। लेकिन क्या आयकर दाताओं को एक बार फिर कोई बड़ी छूट मिल सकती है?
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2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर में भारी छूट दी थी। केंद्र सरकार ने बुनियादी छूट की सीमा चार लाख रूपये तक बढ़ा दी थी। लेकिन सेक्शन 87ए के अंतर्गत 12 लाख रूपये तक की टैक्स योग्य आय की छूट सीमा 60 हजार रुपये तक बढ़ा दी गई है। इसका अर्थ है कि प्रतिवर्ष 12 लाख रूपये तक की कमाई करने वाले लोग विभिन्न योजनाओं में निवेश कर पूरी छूट प्राप्त कर लेते हैें और व्यावहारिक तौर पर उन्हें कोई कर नहीं देना होता। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रूपये कर दी गई थी।
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जीएसटी दरों में राहत को केंद्र सरकार का बड़ा सुधारवादी कदम माना गया। कहा गया कि इसका अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर देखने को मिल सकता है। अब सिन गुड्स की कैटेगरी में 40 प्रतिशत के दायरे में आने वाली पान मसाला, सिगरेट और शराब जैसी वस्तुओं को छोड़ दें तो आम आदमी के उपयोग में आने वाली 95 फीसदी वस्तुएं शून्य या पांच प्रतिशत जीएसटी दायरे में आ गई हैं। 18 फीसदी के दायरे में बहुत कम वस्तुएं हैं। इससे उत्पाद सस्ते हुए हैं और इनकी खपत में वृद्धि अर्थव्यवस्था में तेजी का आधार बनी है। इससे आम आदमी को अपने उपयोग की सामग्री खरीद सकने की क्षमता बढ़ी है।
केंद्र सरकार के इस कदम को अर्थव्यवस्था को तेज करने वाला माना गया था। केंद्र सरकार का अनुमान था कि कर बचत से लोग बचत राशि को खाने-पीने, घूमने और आवश्यक वस्तुओं की खरीद में निवेश करेंगे। फिलहाल, आंकड़ों की बात करें तो ट्रंप के टैरिफ वॉर के बाद भी जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी दिखाई दे रही है, उससे लगता है कि केंद्र सरकार का दांव बेहद सटीक रहा है।
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क्या और मिलेगी कर छूट?
इसी को ध्यान में रखते हुए इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या आगामी बजट में केंद्र सरकार छूट की सीमा को और ज्यादा बढ़ा सकती है? आर्थिक मामलों के जानकार कहते हैं कि आयकर के इस दायरे में देश की एक बड़ी आबादी आ जाती है। सरकार ने जितना कर छूट दिया है, इसे फिलहाल बढ़ाने की संभावना बहुत कम है। लेकिन एक करोड़ रुपये वार्षिक कमाने वाले आय वर्ग यानी सुपर रिच लोगों पर टैक्स दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
किसानों को मिल सकती है और छूट
देश का कृषि क्षेत्र मजबूत तरीके से आगे बढ़ रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। लेकिन भारतीय कृषि के बड़े आकार को देखते हुए इसे अभी भी बहुत कम माना जा रहा है। केंद्र सरकार बजट में कृषि को बढ़ावा देने के विभिन्न उपाय लागू कर सकती है। किसानों को नए कृषि उपकरण खरीदने, खाद-बीज की खरीद पर और नए प्रसंस्करण इकाइयों को लगाने पर छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है जिससे कृषि क्षेत्र को और मजबूत किया जा सके। कृषि सेक्टर अभी भी देश की एक बड़ी आबादी को रोजगार उपलब्ध कराता है। केंद्रीय वित्त मंत्री ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के उपाय बजट में कर सकती हैं।
दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कर संग्रह प्राप्त किया है। अब लगभग हर महीने जीएसटी कर संग्रह डेढ़ लाख रूपये से अधिक रह रहा है। पूर्व में यह दो लाख रूपये एक माह की सीमा को भी पार कर चुका है। अर्थव्यवस्था के तेज होने से इस कर संग्रह में और तेजी आने की संभावना है।
व्यापार-रोजगार को बढ़ाने वाला होगा बजट- भाजपा
आर्थिक मामलों के जानकार और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने हर वह संभव कदम उठाया है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके। उसी का परिणाम आज अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश महंगाई और धीमी विकास दर से जूझ रहे हैं, भारत बेहतर प्रगति हासिल कर रहा है। रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत इस वर्ष में विकास दर हासिल कर सकता है।
गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि यह अनुमान केवल भारतीय एजेंसियों का ही नहीं है। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम एजेंसियों का अनुमान है कि भारत 6.6 से अधिक विकास दर हासिल करेगा। यह दुनिया में हमारी विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है। उन्होंने कहा कि इस बार भी बजट में देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले, निवेश और रोजगार बढ़ाने वाले, किसान, मजदूर और व्यापारियों के हितों को मजबूत बनाने वाले उपाय किए जाएंगे।
व्यापार को बढ़ाने वाला बजट पेश करे सरकार- कैट
व्यापारियों की संस्था कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वित्त मंत्री से व्यापार को बढ़ाने वाला बजट बनाने की अपील की है। भाजपा सांसद और कैट नेता प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस, वोकल फॉर लोकल, लोकल फॉर ग्लोबल, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे विभिन्न अभियानों से देश के व्यापारिक वातावरण को नई दिशा दी है। अब इन पहलों को और मजबूत किया जाना चाहिए।
ई-कॉमर्स के सामने खुदरा व्यापारियों की हो रक्षा
व्यापारी व्यापार को सुगम बनाने के लिए सिंगल विंडो कंप्लायंस सिस्टम, अनावश्यक नोटिस और निरीक्षण पर रोक चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इन उपायों को लागू करने पर विचार करना चाहिए। वन नेशन, वन लाइसेंस, वन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू कर व्यापारियों को अनावश्यक देरी से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इकोनॉमी से देश के खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। केंद्र सरकार को खुदरा व्यापारियों का संरक्षण करना चाहिए जो देश के 11 करोड़ से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार उपलब्ध कराता है।