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Delimitation: थरूर ने ड्राइवर का उदाहरण देकर समझाया परिसीमन का गणित, बोले- ऐसे होगा छोटे राज्यों को नुकसान

एएनआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 18 Jun 2026 02:42 PM IST
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सार

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा सीटों के परिसीमन पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के तर्कों का विरोध किया है। थरूर का कहना है कि सीटों में समान प्रतिशत वृद्धि के बावजूद बड़े राज्यों का राजनीतिक प्रभाव अधिक बढ़ेगा, जिससे दक्षिणी राज्यों की चिंताएं और गहरी होंगी।

Shashi Tharoor responds to Naidu on issue of delimitation, saying the influence of larger states will increase
शशि थरूर, सांसद, कांग्रेस - फोटो : ANI
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विस्तार

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की दलीलों का कड़ा विरोध किया है। थरूर ने एक उदाहरण के जरिए समझाया कि अगर सभी राज्यों की सीटें एक समान अनुपात में बढ़ाई जाती हैं, तब भी बड़े राज्यों का राजनीतिक प्रभाव छोटे राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।


क्या बोले कांग्रेस सांसद शशि थरूर?
यह विवाद केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव से जुड़ा है जिसमें लोकसभा की सीटों को बढ़ाने की बात कही गई है। नायडू ने इस प्रस्ताव का बचाव किया था। इसके जवाब में थरूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, 'नायडू जी, मान लीजिए आपका वेतन दो लाख रुपये है और आपके ड्राइवर का वेतन 20 हजार रुपये है। अब आप दोनों के वेतन में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं। आपका वेतन तीन लाख हो जाएगा और ड्राइवर का 30 हजार। प्रतिशत के हिसाब से बढ़त बराबर है, लेकिन क्या आप अपने ड्राइवर के मुकाबले पहले से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में नहीं आ गए?'
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थरूर ने तर्क दिया कि दक्षिण भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यही असली चिंता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और केरल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाती है और केरल की संख्या 20 से बढ़कर 30 होती है, तो संख्या का अनुपात भले ही न बदले, लेकिन राजनीतिक वजन में बड़ा अंतर आ जाएगा। उत्तर प्रदेश के पास केरल के मुकाबले 90 सांसद ज्यादा होंगे, जबकि अभी यह अंतर 60 सांसदों का है। थरूर ने पूछा कि क्या यह चिंता का विषय नहीं है?
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आंध्र प्रदेश के सीएम ने क्या कहा था?
इससे पहले नायडू ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एनडीए सरकार महिला आरक्षण लागू करने वाले कानून के साथ परिसीमन बिल को दोबारा लाने की तैयारी में है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर बेवजह विवाद खड़ा किया गया। नायडू के अनुसार, सरकार का इरादा शुरू से साफ था कि सभी राज्यों में सीटें 50 प्रतिशत बढ़ेंगी और उनका अनुपात नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि बिल के मसौदे में कुछ बातें छूट गई थीं, जिसे विपक्ष ने मुद्दा बना लिया।

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संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में पेश किया गया था। इसमें लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना से जुड़ी थी। हालांकि, यह बिल संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। वोटिंग के दौरान 298 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया। इसे पास कराने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी।

कांग्रेस ने आरोपों को गलत बताया
वहीं, कांग्रेस ने नायडू के आरोपों को गलत बताया है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने बिल में ऐसा कोई कानूनी सुरक्षा चक्र नहीं जोड़ा था जिससे हर राज्य का प्रतिनिधित्व समान अनुपात में बढ़ना तय हो सके। नायडू ने यह भी याद दिलाया कि 2001 में वाजपेयी सरकार के दौरान उन्होंने ही सीटों के पुनर्वितरण को रुकवाने में मदद की थी। दक्षिण के क्षेत्रीय दल जनसंख्या आधारित परिसीमन का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या पर नियंत्रण पाया है, उन्हें राजनीतिक रूप से सजा नहीं मिलनी चाहिए। सरकार के संकेतों से लगता है कि आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होगी।
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