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Shashi Tharoor: 'पासपोर्ट नागरिकता का सबूत क्यों नहीं?' थरूर ने उठाए सवाल, कहा- कानून में तुरंत बदलाव किया जाए

Fri, 26 Jun 2026 04:24 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 26 Jun 2026 04:24 PM IST
सार

पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं मानने पर छिड़े विवाद के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार से कानून में बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट और आधार दोनों को भारतीय नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण बनाया जाना चाहिए। थरूर ने गैर-नागरिकों के लिए अलग रंग का आधार कार्ड जारी करने का सुझाव भी दिया। आइए, विस्तार से मामले को समझते हैं...

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Shashi Tharoor Urges Govt to Make Passport, Aadhaar Valid Proofs of Citizenship
शशि थरूर ने नागरिकता प्रमाण को लेकर सरकार पर उठाए सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं होने को लेकर देश में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार से बड़ा बदलाव करने की मांग की है। थरूर ने कहा है कि सरकार को कानूनी ढांचे में संशोधन कर पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को भारतीय नागरिकता का वैध और निर्णायक प्रमाण घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इन दस्तावेजों को रद्द या वापस नहीं लेती, तब तक इन्हें नागरिकता का अंतिम सबूत माना जाना चाहिए। थरूर का यह बयान विदेश मंत्रालय की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं।

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पासपोर्ट को लेकर विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता स्थापित करने वाला दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक यात्रा दस्तावेज है। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया फैसला नहीं है और पिछले 12 वर्षों में इस संबंध में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 20 के तहत विशेष परिस्थितियों और सार्वजनिक हित में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह की व्याख्या भविष्य में नागरिकता अधिकारों को लेकर विवाद पैदा कर सकती है।

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शशि थरूर ने कानून में बदलाव की मांग क्यों की?

शशि थरूर ने कहा कि दशकों से भारतीय पासपोर्ट को पहचान का सबसे भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता रहा है। पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस सत्यापन और कई तरह के दस्तावेजों की जांच की जाती है। ऐसे में यह कहना कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, आम लोगों के लिए भ्रम पैदा करता है। थरूर ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता, तो फिर कौन-सा दस्तावेज करता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही आधार कार्ड को केवल पहचान और निवास का प्रमाण बता चुका है, नागरिकता का नहीं। ऐसे में करोड़ों भारतीय कानूनी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।

गैर-नागरिकों के लिए थरूर ने क्या सुझाव दिया?

थरूर ने कहा कि आधार कार्ड फिलहाल नागरिकता के आधार पर नहीं, बल्कि भारत में 182 दिनों के निवास के आधार पर जारी किया जाता है। इसलिए भारतीय नागरिकों के साथ-साथ गैर-नागरिकों के पास भी आधार कार्ड होता है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई से गैर-नागरिकों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आधार कार्ड पर सामने की ओर लाल रंग की तिरछी पट्टी जैसी स्पष्ट पहचान हो सकती है, जिससे नागरिक और गैर-नागरिक में आसानी से अंतर किया जा सके।

क्या बदल सकती है मौजूदा दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था?

थरूर का कहना है कि यदि सरकार पासपोर्ट और सामान्य आधार कार्ड को नागरिकता का अंतिम प्रमाण घोषित कर देती है, तो इससे देश में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। चुनावी सूची के पुनरीक्षण के दौरान होने वाले विवाद कम होंगे और लोगों को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बीच निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पासपोर्ट अभी भी 12 मान्य दस्तावेजों में शामिल है। हालांकि, नागरिकता को लेकर छिड़ी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

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