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थरूर vs खरगे: कौन होगा अध्यक्ष, किसके चुने जाने पर कांग्रेस को क्या फायदा?
रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 30 Sep 2022 01:48 PM IST
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सार
अभी तक की स्थिति में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच सीधा मुकाबला होता दिख रहा है। आइये जानते हैं कि इन उम्मीदवारों में से किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? किसकी क्या खासियत है और कौन अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस को क्या फायदा दिला सकता है?
शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर सियासी कयासबाजी तेज हो गई है। आज शाम तीन बजे तक नामांकन होना है। इसके बाद मालूम चल जाएगा कि अध्यक्ष पद के लिए कौन-कौन मैदान में है। हालांकि, अभी तक जो बात सामने आई है, उसके अनुसार अध्यक्ष पद के लिए शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लगभग फाइनल है। उधर, झारखंड के नेता केएन त्रिपाठी ने भी आज नामांकन कर दिया। त्रिपाठी कह रहे हैं कि जैसे ही आलाकमान का इशारा होगा मैं अपना नामांकन वापस ले लूंगा।
ऐसे में अभी तक की स्थिति में मुख्य मुकाबला थरूर और खरगे में ही दिख रहा है। आइये जानते हैं कि इन उम्मीदवारों में से किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? किसकी क्या खासियत है और कौन अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस को क्या फायदा दिला सकता है?
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ऐसे में अभी तक की स्थिति में मुख्य मुकाबला थरूर और खरगे में ही दिख रहा है। आइये जानते हैं कि इन उम्मीदवारों में से किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? किसकी क्या खासियत है और कौन अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस को क्या फायदा दिला सकता है?
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शशि थरूर क्यों उतर रहे चुनाव में?
कांग्रेस में गांधी परिवार से इतर सबसे पहले शशि थरूर ने अपनी दावेदारी पेश की। कांग्रेस के जी-23 ग्रुप में शामिल रहे शशि थरूर पहले राजनयिक भी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
शशि थरूर ने सितंबर की शुरुआत में अध्यक्ष पद के लिए खड़े होने के संकेत दिए थे। जब उनसे इसे लेकर सवाल किया गया था तो थरूर ने कहा था कि वे पार्टी में चुनाव के एलान से काफी खुश हैं और इसका स्वागत करते हैं। थरूर ने कहा था कि यह पार्टी के लिए काफी अच्छा होगा।
कांग्रेस में गांधी परिवार से इतर सबसे पहले शशि थरूर ने अपनी दावेदारी पेश की। कांग्रेस के जी-23 ग्रुप में शामिल रहे शशि थरूर पहले राजनयिक भी रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
शशि थरूर ने सितंबर की शुरुआत में अध्यक्ष पद के लिए खड़े होने के संकेत दिए थे। जब उनसे इसे लेकर सवाल किया गया था तो थरूर ने कहा था कि वे पार्टी में चुनाव के एलान से काफी खुश हैं और इसका स्वागत करते हैं। थरूर ने कहा था कि यह पार्टी के लिए काफी अच्छा होगा।
शशि थरूर
- फोटो : अमर उजाला
थरूर की दावेदारी कितनी मजबूत?
1. दक्षिण में मजबूत होगी कांग्रेस
शशि थरूर 13 साल से केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद हैं। दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने में भी थरूर काफी आगे रहे हैं। वह केवल दक्षिण नहीं, बल्कि उत्तर भारत में भी काफी चर्चित हैं। ऐसे में थरूर के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को काफी फायदा हो सकता है। अभी राहुल गांधी भी केरल से ही सांसद हैं। वहीं, भाजपा का फोकस भी दक्षिण के राज्य ही हैं। भाजपा को रोकने में भी थरूर कांग्रेस की काफी मदद कर सकते हैं।
1. दक्षिण में मजबूत होगी कांग्रेस
शशि थरूर 13 साल से केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद हैं। दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस को मजबूत करने में भी थरूर काफी आगे रहे हैं। वह केवल दक्षिण नहीं, बल्कि उत्तर भारत में भी काफी चर्चित हैं। ऐसे में थरूर के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को काफी फायदा हो सकता है। अभी राहुल गांधी भी केरल से ही सांसद हैं। वहीं, भाजपा का फोकस भी दक्षिण के राज्य ही हैं। भाजपा को रोकने में भी थरूर कांग्रेस की काफी मदद कर सकते हैं।
2. कांग्रेस में अंदरूनी उठा-पटक का फायदा
कांग्रेस में बदलाव चाहने वाले युवाओं के बीच थरूर की लोकप्रियता पहले से ज्यादा है। दूसरी तरफ अध्यक्ष पद के लिए गहलोत की दावेदारी को जितना समर्थन हासिल था, उतना समर्थन किसी और वरिष्ठ नेता को मिलना काफी मुश्किल है। यह बात अध्यक्ष पद के चुनाव में शशि थरूर को फायदा पहुंचा सकती है।
कांग्रेस में बदलाव चाहने वाले युवाओं के बीच थरूर की लोकप्रियता पहले से ज्यादा है। दूसरी तरफ अध्यक्ष पद के लिए गहलोत की दावेदारी को जितना समर्थन हासिल था, उतना समर्थन किसी और वरिष्ठ नेता को मिलना काफी मुश्किल है। यह बात अध्यक्ष पद के चुनाव में शशि थरूर को फायदा पहुंचा सकती है।
3. देशभर में जबरदस्त फैन फॉलोइंग
शशि थरूर के पास भले ही मल्लिकाअर्जुन खरगे जितना संगठन का अनुभव न हो, लेकिन आम लोगों में थरूर खरगे से ज्यादा लोकप्रिय चेहरा हैं। शशि थरूर एक पैन इंडिया पॉपुलर नेता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर थरूर की फॉलोइंग कांग्रेस के अधिकतर नेताओं से ज्यादा ही रही है।
शशि थरूर के पास भले ही मल्लिकाअर्जुन खरगे जितना संगठन का अनुभव न हो, लेकिन आम लोगों में थरूर खरगे से ज्यादा लोकप्रिय चेहरा हैं। शशि थरूर एक पैन इंडिया पॉपुलर नेता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर थरूर की फॉलोइंग कांग्रेस के अधिकतर नेताओं से ज्यादा ही रही है।
4. चपलता-तर्कशीलता और बोलने में ज्यादा प्रभावी थरूर
बेहतरीन अंग्रेजी, ठीक-ठाक हिंदी और कई अन्य भाषाओं में महारत होने की वजह से वे युवाओं के बीच अलग अपील लेकर पेश होते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तर्कशीलता को लेकर एक बड़ा तबका उनका फैन है। खासकर विदेश मामलों में भारत का पक्ष रखने को लेकर लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं।
बेहतरीन अंग्रेजी, ठीक-ठाक हिंदी और कई अन्य भाषाओं में महारत होने की वजह से वे युवाओं के बीच अलग अपील लेकर पेश होते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तर्कशीलता को लेकर एक बड़ा तबका उनका फैन है। खासकर विदेश मामलों में भारत का पक्ष रखने को लेकर लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं।
5. कांग्रेस में बदलाव, विपक्ष को झटका देने में सक्षम
बीते कुछ वर्षों में शशि थरूर (67) की छवि युवा नेता के तौर पर बनी है। वे पुरानी कांग्रेस में उस जरूरी बदलाव के तौर पर दिखते हैं, जो कि लंबे समय से नए चेहरों की तलाश में है, ताकि जनता के बीच पार्टी अपना नया परिप्रेक्ष्य पैदा कर सके। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मुकाबले थरूर यह ज्यादा आसानी से करने में सक्षम हैं। वे भारत की पढ़ी-लिखी जनता के बीच भी ज्यादा लोकप्रिय हैं, जो कि अधिकतर मध्यमवर्ग से है और 2014 के बाद से ही भाजपा के साथ जुड़ी है।
बीते कुछ वर्षों में शशि थरूर (67) की छवि युवा नेता के तौर पर बनी है। वे पुरानी कांग्रेस में उस जरूरी बदलाव के तौर पर दिखते हैं, जो कि लंबे समय से नए चेहरों की तलाश में है, ताकि जनता के बीच पार्टी अपना नया परिप्रेक्ष्य पैदा कर सके। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मुकाबले थरूर यह ज्यादा आसानी से करने में सक्षम हैं। वे भारत की पढ़ी-लिखी जनता के बीच भी ज्यादा लोकप्रिय हैं, जो कि अधिकतर मध्यमवर्ग से है और 2014 के बाद से ही भाजपा के साथ जुड़ी है।
मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला
खरगे क्यों लड़ रहे चुनाव?
कांग्रेस हाईकमान अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाना चाहता था। हालांकि, राजस्थान में हुए सियासी घटनाक्रम के बाद पासा पलट गया। गहलोत के अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो गए। इसके बाद गांधी परिवार को किसी दूसरे ऐसे नेता की जरूरत थी, जो उनके करीबी हों। इसमें पहले दिग्वजिय सिंह के नाम की चर्चा हुई। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दावा पेश कर दिया। अंत में खरगे की दावेदारी ज्यादा मजबूत निकली। बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने भी खरगे को हरी झंडी दे दी। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने खरगे का प्रस्तावक बनने का एलान कर दिया।
कांग्रेस हाईकमान अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाना चाहता था। हालांकि, राजस्थान में हुए सियासी घटनाक्रम के बाद पासा पलट गया। गहलोत के अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो गए। इसके बाद गांधी परिवार को किसी दूसरे ऐसे नेता की जरूरत थी, जो उनके करीबी हों। इसमें पहले दिग्वजिय सिंह के नाम की चर्चा हुई। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दावा पेश कर दिया। अंत में खरगे की दावेदारी ज्यादा मजबूत निकली। बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने भी खरगे को हरी झंडी दे दी। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने खरगे का प्रस्तावक बनने का एलान कर दिया।
खरगे की दावेदारी कितनी मजबूत?
1. दक्षिण से नाता, जमीन से जुड़े नेता रहे: खरगे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर यहां सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। यहां वह स्टूडेंट यूनियन के महासचिव भी रहे। गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। 1969 में वह एमकेएस मील्स कर्मचारी संघ के विधिक सलाहकार बन गए। तब उन्होंने मजदूरों के लिए लड़ाई लड़ी। वह संयुक्त मजदूर संघ के प्रभावशाली नेता रहे।
1969 में ही वह कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें गुलबर्गा कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल विधानसभा सीट से विधायक बने। खरगे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। 2005 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 तक वह इस पद पर बने रहे। 2009 में पहली बार सांसद चुने गए।
खरगे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं। इसका समय-समय पर उनको इनाम भी मिला। साल 2014 में खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो खरगे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।
1. दक्षिण से नाता, जमीन से जुड़े नेता रहे: खरगे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर यहां सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। यहां वह स्टूडेंट यूनियन के महासचिव भी रहे। गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। 1969 में वह एमकेएस मील्स कर्मचारी संघ के विधिक सलाहकार बन गए। तब उन्होंने मजदूरों के लिए लड़ाई लड़ी। वह संयुक्त मजदूर संघ के प्रभावशाली नेता रहे।
1969 में ही वह कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें गुलबर्गा कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल विधानसभा सीट से विधायक बने। खरगे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। 2005 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। 2008 तक वह इस पद पर बने रहे। 2009 में पहली बार सांसद चुने गए।
खरगे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं। इसका समय-समय पर उनको इनाम भी मिला। साल 2014 में खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो खरगे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।
2. विपक्ष के नेताओं से अच्छे संबंध : मल्लिमार्जुन खरगे गांधी परिवार के करीबी तो हैं हीं, विपक्ष के अन्य नेताओं से भी उनके अच्छे संबंध हैं। खरगे का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी जैसे विपक्ष के नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं।
3. मजदूरों में अच्छी पकड़, नौ बार विधायक रहे : खरगे नौ बार विधायक रहे और दो बार लोकसभा सांसद। अभी वह राज्यसभा के सांसद हैं। केंद्र में मनमोहन सिंह सरकार में खरगे श्रम व रोजगार मंत्री रहे। खरगे का नाता महाराष्ट्र से भी है। खरगे के पिता महाराष्ट्र से रहे। यही कारण है कि खड़गे बखूबी मराठी बोल और समझ लेते हैं। खरगे मजदूरों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। लंबे समय तक उन्होंने मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी है। इसका फायदा भी उन्हें मिल सकता है।
4. कर्नाटक, महाराष्ट्र में दिला सकते फायदा : आने वाले समय में कर्नाटक और फिर महाराष्ट्र में भी चुनाव होंगे। ऐसे में खरगे इन दोनों राज्यों के अलावा दक्षिण के अन्य राज्यों में कांग्रेस को अच्छा फायदा दिला सकते हैं। संगठन और प्रशासनिक कार्यों में माहिर खरगे को प्लानिंग का मास्टर कहा जाता है।
5. ज्यादातर कांग्रेस नेता समर्थन में : खरगे के समर्थन में अभी से कई दिग्गज कांग्रेसी नेता सामने आ गए हैं। राजस्थान का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सांसद प्रमोद तिवारी यहां तक की खुद चुनाव लड़ने का एलान कर चुके दिग्विजय सिंह ने भी खरगे का समर्थन कर दिया है। दिग्विजय सिंह और अशोक गहलोत दोनों ही खरगे के प्रस्तावक बनेंगे।

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