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Maharashtra: बजट के तीन महीने बाद पूरक मांगें क्यों? शिवसेना UBT ने महायुति सरकार को घेरा; पूछे ये सवाल
आईएएनएस, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 25 Jun 2026 01:09 PM IST
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सार
शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर आर्थिक बदहाली का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि बजट के तीन महीने बाद भारी-भरकम पूरक मांगें पेश करना वित्तीय अनुशासन की कमी है। राज्य पर कर्ज और ब्याज का बोझ बढ़ रहा है, जिससे महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अब चरमरा गई है।
उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना यूबीटी
- फोटो : ANI
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विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने दावा किया कि सरकार ने बजट पेश होने के महज तीन महीने बाद ही 97,706.40 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश कर दी हैं। पार्टी के अनुसार यह कदम राज्य के गिरते वित्तीय अनुशासन को साफ तौर पर उजागर करता है।
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो चुकी है। राज्य पर सार्वजनिक कर्ज करीब 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। हर साल केवल ब्याज चुकाने में ही 60,000 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। सरकार सरकारी खजाने से मनमाने ढंग से पैसा लुटा रही है।
संपादकीय में सरकार की तुलना उस छात्र से की गई है जो परीक्षा में एक के बाद एक सप्लीमेंट्री कॉपी जोड़ता है, लेकिन अंत में मुश्किल से पास हो पाता है। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि बजट के तुरंत बाद इतनी बड़ी रकम की मांग करना किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक बात है। पिछले चार वर्षों में महायुति सरकार ने लगभग पांच लाख करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश की हैं। पार्टी ने इसे बजट से अधिक खर्च करने का एक विश्व रिकॉर्ड बताया है।
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पार्टी का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मुख्य बजट में जरूरी आवंटन छिपाती है। बाद में राजनीतिक फायदे के लिए पूरक मांगों के रास्ते हजारों करोड़ रुपए मांगे जाते हैं। इस बार तो सरकार ने सारी हदें पार कर दीं। अगले बजट में अभी नौ महीने बाकी हैं, लेकिन सरकार के राजस्व और खर्च के अनुमान पहले तीन महीनों में ही फेल हो गए।
ये भी पढ़ें: कोलकाता हादसा: विधानसभा में बोले CM- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, मृतकों के परिजनों और घायलों को मिलेगा मुआवजा
संपादकीय में पुरानी बातों को भी याद दिलाया गया। जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार सत्ता में थी, तब मौजूदा सत्ताधारी नेता विपक्ष में थे। उस समय वे बहुत कम रकम की पूरक मांगों पर भी सरकार की कड़ी आलोचना करते थे। वे इसे वित्तीय अनुशासन का पतन बताते थे। आज वही नेता मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के पदों पर बैठे हैं। अब उन्हें 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूरक मांगें वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं लगतीं।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड बना रही है। महाराष्ट्र कभी अपने वित्तीय अनुशासन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था। पिछले चार वर्षों में यह साख पूरी तरह खत्म हो गई है। सरकार राज्य की उस आर्थिक विरासत को खुलेआम नष्ट कर रही है, जिसे कभी ईमानदारी के लिए सम्मान मिलता था। शिवसेना ने कहा कि अनुत्पादक कामों पर अंधाधुंध खर्च ने राज्य की वित्तीय योजना को पटरी से उतार दिया है।
पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो चुकी है। राज्य पर सार्वजनिक कर्ज करीब 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। हर साल केवल ब्याज चुकाने में ही 60,000 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। सरकार सरकारी खजाने से मनमाने ढंग से पैसा लुटा रही है।
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संपादकीय में सरकार की तुलना उस छात्र से की गई है जो परीक्षा में एक के बाद एक सप्लीमेंट्री कॉपी जोड़ता है, लेकिन अंत में मुश्किल से पास हो पाता है। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि बजट के तुरंत बाद इतनी बड़ी रकम की मांग करना किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक बात है। पिछले चार वर्षों में महायुति सरकार ने लगभग पांच लाख करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश की हैं। पार्टी ने इसे बजट से अधिक खर्च करने का एक विश्व रिकॉर्ड बताया है।
पार्टी का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मुख्य बजट में जरूरी आवंटन छिपाती है। बाद में राजनीतिक फायदे के लिए पूरक मांगों के रास्ते हजारों करोड़ रुपए मांगे जाते हैं। इस बार तो सरकार ने सारी हदें पार कर दीं। अगले बजट में अभी नौ महीने बाकी हैं, लेकिन सरकार के राजस्व और खर्च के अनुमान पहले तीन महीनों में ही फेल हो गए।
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संपादकीय में पुरानी बातों को भी याद दिलाया गया। जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार सत्ता में थी, तब मौजूदा सत्ताधारी नेता विपक्ष में थे। उस समय वे बहुत कम रकम की पूरक मांगों पर भी सरकार की कड़ी आलोचना करते थे। वे इसे वित्तीय अनुशासन का पतन बताते थे। आज वही नेता मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के पदों पर बैठे हैं। अब उन्हें 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूरक मांगें वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं लगतीं।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड बना रही है। महाराष्ट्र कभी अपने वित्तीय अनुशासन के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था। पिछले चार वर्षों में यह साख पूरी तरह खत्म हो गई है। सरकार राज्य की उस आर्थिक विरासत को खुलेआम नष्ट कर रही है, जिसे कभी ईमानदारी के लिए सम्मान मिलता था। शिवसेना ने कहा कि अनुत्पादक कामों पर अंधाधुंध खर्च ने राज्य की वित्तीय योजना को पटरी से उतार दिया है।