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हस्ताक्षर विवाद: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद CID मुख्यालय पहुंचे अभिषेक, परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: Rahul Kumar
Updated Thu, 11 Jun 2026 08:08 PM IST
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तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी
- फोटो : पीटीआई
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तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी गुरुवार को विधानसभा हस्ताक्षर विवाद मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार उन्हें शाम छह बजे तक जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना था। वह निर्धारित समय से पहले शाम करीब 5:50 बजे सीआईडी कार्यालय पहुंचे और मीडिया से बातचीत किए बिना सीधे अंदर चले गए। अभिषेक गुरुवार शाम दिल्ली से कोलकाता लौटे थे। दोपहर बाद उनकी फ्लाइट नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी। वहां से वह पहले कालीघाट स्थित अपने आवास गए और बाद में सीधे भवानी भवन पहुंचे।
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें सीआईडी के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत भी प्रदान की और कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक जांच एजेंसी उनके खिलाफ कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
अभिषेक की पेशी को देखते हुए भवानी भवन और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) के जवानों को तैनात किया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
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यह मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक पत्र से संबंधित है। आरोप है कि पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की गई। कुछ विधायकों ने दावा किया है कि उनके हस्ताक्षर जाली हैं या उनकी सहमति के बिना उनके नाम शामिल किए गए। चूंकि पत्र पर पार्टी महासचिव के रूप में अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर भी हैं, इसलिए सीआईडी उनसे पूछताछ कर रही है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सीआईडी के कई समन के बावजूद अभिषेक पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। एक बार उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था, जबकि दूसरी बार राजनीतिक कार्यक्रमों के चलते शहर से बाहर होने की बात कही थी। बाद में संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
इस बीच, मामले में अभिषेक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने भी खुद को मुकदमे से अलग कर लिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अभिषेक के रवैये पर नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद पार्टी के भीतर अंतर्कलह को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें सीआईडी के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत भी प्रदान की और कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक जांच एजेंसी उनके खिलाफ कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
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अभिषेक की पेशी को देखते हुए भवानी भवन और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और रैपिड एक्शन फोर्स (रैफ) के जवानों को तैनात किया गया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
यह मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक पत्र से संबंधित है। आरोप है कि पत्र में कई विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी की गई। कुछ विधायकों ने दावा किया है कि उनके हस्ताक्षर जाली हैं या उनकी सहमति के बिना उनके नाम शामिल किए गए। चूंकि पत्र पर पार्टी महासचिव के रूप में अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर भी हैं, इसलिए सीआईडी उनसे पूछताछ कर रही है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सीआईडी के कई समन के बावजूद अभिषेक पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। एक बार उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था, जबकि दूसरी बार राजनीतिक कार्यक्रमों के चलते शहर से बाहर होने की बात कही थी। बाद में संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
इस बीच, मामले में अभिषेक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने भी खुद को मुकदमे से अलग कर लिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अभिषेक के रवैये पर नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद पार्टी के भीतर अंतर्कलह को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।