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मौसम विभाग की चेतावनी: दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो, मानसून की विदाई पर इन राज्यों में होगी बारिश
Thu, 15 Oct 2026 05:03 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Oct 2026 05:03 PM IST
सार
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार को पूरे देश से विदा हो गया और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय हो गया। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और दक्षिण भारत के अन्य क्षेत्रों में 21 अक्तूबर तक बारिश होने की संभावना है।
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दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से विदा हो गया है। इसी दिन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश भी शुरू हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में पूर्वोत्तर मानसून की गतिविधियां दर्ज की गईं।
आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा कि पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के साथ दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर तक भारी बारिश भी हो सकती है।
भारत में मानसून के दो प्रमुख चरण
भारत में मानसून के दो प्रमुख चरण होते हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है, जबकि पूर्वोत्तर मानसून को लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है। यह अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के कुछ हिस्सों को प्रभावित करता है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ता है। वहीं, पूर्वोत्तर मानसून की तीव्रता दक्षिण-पश्चिम मानसून से कम होती है, लेकिन यह रबी फसलों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश
आईएमडी के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से 12.6 प्रतिशत कम है। बारिश में कमी की एक प्रमुख वजह उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में जारी अल नीनो की स्थिति रही है। यह स्थिति जून में उभरने के बाद से मजबूत हुई है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की तीन अवस्थाओं में से एक है। यह जलवायु संबंधी घटना मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव और उसके ऊपर के वायुमंडल में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़ी है।
अल नीनो के दौरान भारत में मानसूनी बारिश कम होने की प्रवृत्ति देखी जाती है। इसका वैश्विक तापमान पर भी गर्म करने वाला प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, ला नीना की स्थिति आमतौर पर ठंडक बढ़ाने से जुड़ी होती है। ईएनएसओ की एक तीसरी अवस्था तटस्थ स्थिति भी होती है।
दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) सहित वैश्विक मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल अल नीनो दिसंबर 2026 में चरम पर पहुंच सकता है। यह 1950 में अवलोकन शुरू होने के बाद से सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है।
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आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा कि पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के साथ दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर तक भारी बारिश भी हो सकती है।
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भारत में मानसून के दो प्रमुख चरण
भारत में मानसून के दो प्रमुख चरण होते हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है, जबकि पूर्वोत्तर मानसून को लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है। यह अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश के कुछ हिस्सों को प्रभावित करता है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ता है। वहीं, पूर्वोत्तर मानसून की तीव्रता दक्षिण-पश्चिम मानसून से कम होती है, लेकिन यह रबी फसलों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश
आईएमडी के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से 12.6 प्रतिशत कम है। बारिश में कमी की एक प्रमुख वजह उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में जारी अल नीनो की स्थिति रही है। यह स्थिति जून में उभरने के बाद से मजबूत हुई है।
क्या है अल नीनो?
अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की तीन अवस्थाओं में से एक है। यह जलवायु संबंधी घटना मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव और उसके ऊपर के वायुमंडल में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़ी है।
अल नीनो के दौरान भारत में मानसूनी बारिश कम होने की प्रवृत्ति देखी जाती है। इसका वैश्विक तापमान पर भी गर्म करने वाला प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, ला नीना की स्थिति आमतौर पर ठंडक बढ़ाने से जुड़ी होती है। ईएनएसओ की एक तीसरी अवस्था तटस्थ स्थिति भी होती है।
दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) सहित वैश्विक मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल अल नीनो दिसंबर 2026 में चरम पर पहुंच सकता है। यह 1950 में अवलोकन शुरू होने के बाद से सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है।