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Palk Strait: श्रीलंकाई नौसेना ने सात भारतीय मछुआरों को पकड़ा, नावें भी जब्त कीं; तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:41 PM IST
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सार
श्रीलंका की नौसेना ने रामेश्वरम के सात मछुआरों को गिरफ्तार कर उनकी दो नावें जब्त कर ली हैं। इस घटना के विरोध में मछुआरों ने जमकर प्रदर्शन किया। मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से दखल देने और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
श्रीलंकाई नौसेना ने सात मछुआरों को गिरफ्तार किया
- फोटो : IANS
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विस्तार
पाक जलडमरूमध्य में श्रीलंका की नौसेना ने गुरुवार तड़के रामेश्वरम के सात मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। इन मछुआरों पर अवैध रूप से मछली पकड़ने का आरोप है। नौसेना ने इस कार्रवाई में मछली पकड़ने वाली दो मशीनी नावें (ट्रॉलर) भी अपने कब्जे में ले ली हैं।
अधिकारी ने दी जानकारी
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बुधवार (25 मार्च) को रामेश्वरम मछली लैंडिंग केंद्र से कुल 365 टोकन जारी हुए थे। गिरफ्तार मछुआरे दो नावों पर सवार थे। जब वे नेदुनथीवू द्वीप के पास काम कर रहे थे, तभी श्रीलंकाई अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। ये नावें सिमसन और शशिकुमार की बताई जा रही हैं। समुद्र में शुरुआती पूछताछ के बाद, नौसेना ने मछुआरों को हिरासत में ले लिया। उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह पर ले जाया गया है।
मछुआरों ने किया विरोध प्रदर्शन
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही रामनाथपुरम जिले के थंगाचीमदम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। गुस्साए मछुआरे कार्ल मार्क्स की प्रतिमा के पास इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने गिरफ्तार मछुआरों और उनकी नावों को तुरंत छोड़ने की मांग की।
ये भी पढ़ें: सावधान!: ईरान युद्ध की फर्जी तस्वीरें दिखाकर ठगी कर रहे जालसाज, आईबी ने किया अलर्ट; J&K सबसे ज्यादा प्रभावित
मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से मांगी मदद
मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली इन गिरफ्तारियों से उनकी रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए शाम 4 बजे मछुआरा प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है।
क्या बोले लोग?
मछुआरा नेता जेसु राजा ने कहा कि उनका समुदाय पिछले चार दशकों से ऐसी मुश्किलों का सामना कर रहा है। मछली पकड़ना ही उनकी आय का एकमात्र जरिया है। लगभग 90 प्रतिशत परिवार इसी पर निर्भर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकारों ने स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने पाक जलडमरूमध्य में अपने पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों को सुरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा मछुआरे ऐतिहासिक रूप से इन जलक्षेत्रों में ही मछली पकड़ते आए हैं।
एक अन्य मछुआरे एंटनी ने सवाल उठाया कि भारत और श्रीलंका के बीच दोस्ती होने के बावजूद ऐसी गिरफ्तारियां क्यों हो रही हैं। नावों को जब्त करने और भारी जुर्माना लगाने से कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं। कई मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं। एक मशीनी नाव की कीमत लगभग 40 लाख रुपये होती है। साल 2018 से अब तक 180 से ज्यादा नावें जब्त हो चुकी हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। एजेंसियां अब इस स्थिति पर नजर रख रही हैं।
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अधिकारी ने दी जानकारी
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बुधवार (25 मार्च) को रामेश्वरम मछली लैंडिंग केंद्र से कुल 365 टोकन जारी हुए थे। गिरफ्तार मछुआरे दो नावों पर सवार थे। जब वे नेदुनथीवू द्वीप के पास काम कर रहे थे, तभी श्रीलंकाई अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। ये नावें सिमसन और शशिकुमार की बताई जा रही हैं। समुद्र में शुरुआती पूछताछ के बाद, नौसेना ने मछुआरों को हिरासत में ले लिया। उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह पर ले जाया गया है।
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मछुआरों ने किया विरोध प्रदर्शन
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही रामनाथपुरम जिले के थंगाचीमदम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। गुस्साए मछुआरे कार्ल मार्क्स की प्रतिमा के पास इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने गिरफ्तार मछुआरों और उनकी नावों को तुरंत छोड़ने की मांग की।
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मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से मांगी मदद
मछुआरा संगठनों ने केंद्र सरकार से इस मामले में कड़ा रुख अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाली इन गिरफ्तारियों से उनकी रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए शाम 4 बजे मछुआरा प्रतिनिधियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है।
क्या बोले लोग?
मछुआरा नेता जेसु राजा ने कहा कि उनका समुदाय पिछले चार दशकों से ऐसी मुश्किलों का सामना कर रहा है। मछली पकड़ना ही उनकी आय का एकमात्र जरिया है। लगभग 90 प्रतिशत परिवार इसी पर निर्भर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकारों ने स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने पाक जलडमरूमध्य में अपने पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों को सुरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा मछुआरे ऐतिहासिक रूप से इन जलक्षेत्रों में ही मछली पकड़ते आए हैं।
एक अन्य मछुआरे एंटनी ने सवाल उठाया कि भारत और श्रीलंका के बीच दोस्ती होने के बावजूद ऐसी गिरफ्तारियां क्यों हो रही हैं। नावों को जब्त करने और भारी जुर्माना लगाने से कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं। कई मछुआरे बेरोजगार हो गए हैं। एक मशीनी नाव की कीमत लगभग 40 लाख रुपये होती है। साल 2018 से अब तक 180 से ज्यादा नावें जब्त हो चुकी हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। एजेंसियां अब इस स्थिति पर नजर रख रही हैं।
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