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Pennaiyar Water Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र ट्रिब्यूनल गठित करे; तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच है विवाद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 02 Feb 2026 12:54 PM IST
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सार

Pennaiyar Water Dispute: तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पेन्नैयार नदी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के बड़ा निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा है कि इस मामले में अब देरी न हो और एक महीने के अंदर ट्रिब्यूनल गठित की जाए। पढ़ें, क्या है पेन्नैयार नदी जल विवाद और कोर्ट का निर्देश... 

Supreme Court directs Centre to set up tribunal for sharing of Pennaiyar river waters
केंद्र सरकार को सुुप्रीम कोर्ट का निर्देश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि पेन्नैयार नदी के जल विवाद के लिए एक महीने के अंदर ट्रिब्यूनल (न्यायाधिकरण) गठित की जाए। बता दें कि यह विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पेन्नैयार नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है।
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मामला सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा?
तमिलनाडु सरकार ने 2018 में केस दायर किया और आरोप लगाया कि कर्नाटक पेन्नैयार नदी पर चेक डैम, पानी मोड़ने की संरचनाएं (डायवर्जन) बना रहा है, इससे तमिलनाडु को मिलने वाला पानी प्रभावित हो रहा है।

तमिलनाडु की दलील क्या थी?
मामले में तमिलनाडु सरकार का कहना है कि अंतर-राज्यीय नदी का पानी राष्ट्रीय संपत्ति होती है। इस पर किसी एक राज्य की निजी मिल्कियत नहीं है। ऐसे मामले में कोई भी राज्य अकेले फैसले लेकर दूसरे राज्य का हक नहीं छीन सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार को अब और देर नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले में ऑफिशियल गजट में नोटिफिकेशन जारी हो और एक महीने में जल विवाद ट्रिब्यूनल बने। नदी के जल विवाद पर ट्रिब्यूनल बनने के बाद सुनवाई शुरू होगी, सबूत और रिपोर्ट्स आएंगी। हालांकि इस पर अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है। वहीं इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत फैसला अभी आना बाकी है।

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ट्रिब्यूनल कैसे सुलझाएगा मामला?
इस मामले में ट्रिब्यूनल गठित होने के बाद वो दोनों राज्यों की बात सुनेगा और फिर नदी के पानी की उपलब्धता देखेगा। इसके बाद ट्रिब्यूनल वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर फैसला देगा और साथ ही यह तय करेगा कि किस राज्य को कितना पानी कब और कैसे मिलेगा।

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