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गाजियाबाद मासूम से दुष्कर्म-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने UP के DGP को SIT गठन का दिया आदेश, महिला अफसर करेंगी जांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Fri, 24 Apr 2026 12:53 PM IST
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सार
गाजियाबाद में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का निर्देश दिया है। इसमें महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल होंगी और दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच होगी।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
Supreme Court: गाजियाबाद में पिछले महीने चार साल की एक बच्ची से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम निर्देश दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पीड़ित बच्ची के माता-पिता गाजियाबाद पुलिस की अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) को शुक्रवार को ही या शनिवार सुबह 11 बजे तक अधिसूचित किया जाना चाहिए। पीठ में न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे।
एसआईटी में महिला अफसर होंगी शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एसआईटी में महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी और इसका नेतृत्व आयुक्त या महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी करेंगे। पीठ ने कहा कि एसआईटी उन सभी शिकायतों की जांच करेगी जो पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने उठाई हैं। साथ में उन दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिन्होंने कथित तौर पर पीड़िता का इलाज करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए यह जरूरी है कि वरिष्ठ अधिकारी खुद पूरे मामले की निगरानी करें।
यह भी पढ़ें: SC Updates: अगस्ता वेस्टलैंड केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, क्रिश्चियन की रिहाई याचिका दूसरी बेंच को सौंपी
दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने आदेश दिया कि एसआईटी दो सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत के समक्ष अपनी पूरक रिपोर्ट दाखिल करेगी। कोर्ट ने निचली अदालत से तब तक मामले में चल रही कार्यवाही को स्थगित रखने को कहा है। पीड़ित के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई से कराई जाए। पुलिस की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
पुलिस की जांच पर उठाए थे सवाल
इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच करने में गाजियाबाद पुलिस की अनिच्छा पर सवाल उठाए थे। 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के असंवेदनशील दृष्टिकोण की कड़ी निंदा की थी। अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की थी कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया था, जिसे बाद में एक सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। बता दें कि 16 मार्च को एक पड़ोसी ने कथित तौर पर बच्ची को चाकलेट खरीदने का झांसा देकर फुसलाया था। जब बच्ची नहीं लौटी, तो उसके पिता ने तलाश शुरू की और उसे खून से लथपथ बेहोश पाया था।
यह भी पढ़ें: आचरण पर सवाल: आई-पैक मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ममता बनर्जी को फटकार, राजनेताओं के लिए क्यों जरूरी?
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एसआईटी में महिला पुलिस अधिकारी शामिल होंगी और इसका नेतृत्व आयुक्त या महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी करेंगे। पीठ ने कहा कि एसआईटी उन सभी शिकायतों की जांच करेगी जो पीड़ित बच्ची के माता-पिता ने उठाई हैं। साथ में उन दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिन्होंने कथित तौर पर पीड़िता का इलाज करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए यह जरूरी है कि वरिष्ठ अधिकारी खुद पूरे मामले की निगरानी करें।
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दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने आदेश दिया कि एसआईटी दो सप्ताह के भीतर संबंधित निचली अदालत के समक्ष अपनी पूरक रिपोर्ट दाखिल करेगी। कोर्ट ने निचली अदालत से तब तक मामले में चल रही कार्यवाही को स्थगित रखने को कहा है। पीड़ित के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई से कराई जाए। पुलिस की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
पुलिस की जांच पर उठाए थे सवाल
इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच करने में गाजियाबाद पुलिस की अनिच्छा पर सवाल उठाए थे। 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के असंवेदनशील दृष्टिकोण की कड़ी निंदा की थी। अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की थी कि गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया था, जिसे बाद में एक सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। बता दें कि 16 मार्च को एक पड़ोसी ने कथित तौर पर बच्ची को चाकलेट खरीदने का झांसा देकर फुसलाया था। जब बच्ची नहीं लौटी, तो उसके पिता ने तलाश शुरू की और उसे खून से लथपथ बेहोश पाया था।
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