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'जीएम फसलों से पारंपरिक किस्मों को नुकसान': सुप्रीम कोर्ट में बोले प्रशांत भूषण, किया जल्द सुनवाई का आग्रह
Mon, 12 Oct 2026 03:22 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 12 Oct 2026 03:22 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जीएम फसलों से जुड़े 2024 के फैसले के कथित उल्लंघन पर अवमानना याचिका जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की गई। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि शाकनाशी-सहिष्णु जीएम बासमती चावल की खेती को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
आनुवंशिक रूप से संशोधित यानी जीएम फसलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के कथित उल्लंघन का मामला सोमवार को फिर उठा। वकील प्रशांत भूषण ने अदालत से जीएम बासमती चावल की एक किस्म की खेती को मंजूरी दिए जाने के आरोपों के बीच अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने भूषण ने कहा कि जीएम बासमती चावल की खेती को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अवमानना याचिका को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलील?
भूषण ने 2024 में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ के फैसले का हवाला दिया। उस मामले में एक मुद्दे पर दोनों न्यायाधीशों की राय अलग-अलग थी, जिसे बड़ी पीठ के पास भेजा गया था। उन्होंने कहा कि अवमानना याचिकाएं उस साझा फैसले से जुड़ी हैं और इनका जीएम सरसों के मामले में बड़ी पीठ को भेजे गए सवाल से संबंध नहीं है। इसलिए इन पर नियमित अवमानना पीठ के सामने सुनवाई हो सकती है।
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भूषण ने कहा कि 2025 में दायर अवमानना याचिका का पहले भी उल्लेख किया गया था, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, जीएम सरसों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही विशेष पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
जीएम बासमती से दूसरी किस्मों के दूषित होने की आशंका
प्रशांत भूषण ने अदालत में आशंका जताई कि जीएम बासमती चावल की खेती से पारंपरिक बासमती की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, "उन्होंने अब आनुवंशिक रूप से संशोधित बासमती चावल की एक शाकनाशी-सहिष्णु किस्म लगाने को मंजूरी दे दी है। इससे हमारी बासमती नष्ट हो जाएगी। यह दूसरी किस्मों को दूषित करेगी और भारी नुकसान पहुंचाएगी।"
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स ने 2025 में दायर अपनी जनहित याचिका के तहत दाखिल की थी। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने जीएम और जीन-संपादित फसलों को जारी करने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की।
2024 के फैसले के उल्लंघन का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के फैसले का उल्लंघन किया। उस फैसले में अदालत ने सरकार को जीएम फसलों के संबंध में एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श करने की बात कही गई थी। याचिका के अनुसार, शाकनाशी-सहिष्णु बासमती चावल की 'रोबिनोवीड' नाम से प्रचारित किस्मों को मई 2024 में व्यावसायिक रूप से जारी किया गया था।
इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया कि जीन-संपादित चावल की किस्में डीआरआर राइस 100, जिसे 'कमला' नाम दिया गया, और पूसा डीएसटी राइस 1 को मई 2025 में जारी किया गया। याचिका में कहा गया है कि ये कदम सरकार की उस पूर्व आश्वस्ति के बावजूद उठाए गए, जिसमें व्यापक नीति तैयार होने से पहले जीएम फसलों को पर्यावरण में जारी नहीं करने की बात कही गई थी।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने भूषण ने कहा कि जीएम बासमती चावल की खेती को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अवमानना याचिका को जल्द से जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
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प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलील?
भूषण ने 2024 में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ के फैसले का हवाला दिया। उस मामले में एक मुद्दे पर दोनों न्यायाधीशों की राय अलग-अलग थी, जिसे बड़ी पीठ के पास भेजा गया था। उन्होंने कहा कि अवमानना याचिकाएं उस साझा फैसले से जुड़ी हैं और इनका जीएम सरसों के मामले में बड़ी पीठ को भेजे गए सवाल से संबंध नहीं है। इसलिए इन पर नियमित अवमानना पीठ के सामने सुनवाई हो सकती है।
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भूषण ने कहा कि 2025 में दायर अवमानना याचिका का पहले भी उल्लेख किया गया था, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, जीएम सरसों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही विशेष पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
जीएम बासमती से दूसरी किस्मों के दूषित होने की आशंका
प्रशांत भूषण ने अदालत में आशंका जताई कि जीएम बासमती चावल की खेती से पारंपरिक बासमती की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, "उन्होंने अब आनुवंशिक रूप से संशोधित बासमती चावल की एक शाकनाशी-सहिष्णु किस्म लगाने को मंजूरी दे दी है। इससे हमारी बासमती नष्ट हो जाएगी। यह दूसरी किस्मों को दूषित करेगी और भारी नुकसान पहुंचाएगी।"
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स ने 2025 में दायर अपनी जनहित याचिका के तहत दाखिल की थी। इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने जीएम और जीन-संपादित फसलों को जारी करने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की।
2024 के फैसले के उल्लंघन का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के फैसले का उल्लंघन किया। उस फैसले में अदालत ने सरकार को जीएम फसलों के संबंध में एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श करने की बात कही गई थी। याचिका के अनुसार, शाकनाशी-सहिष्णु बासमती चावल की 'रोबिनोवीड' नाम से प्रचारित किस्मों को मई 2024 में व्यावसायिक रूप से जारी किया गया था।
इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया कि जीन-संपादित चावल की किस्में डीआरआर राइस 100, जिसे 'कमला' नाम दिया गया, और पूसा डीएसटी राइस 1 को मई 2025 में जारी किया गया। याचिका में कहा गया है कि ये कदम सरकार की उस पूर्व आश्वस्ति के बावजूद उठाए गए, जिसमें व्यापक नीति तैयार होने से पहले जीएम फसलों को पर्यावरण में जारी नहीं करने की बात कही गई थी।