सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court in West Bengal SIR Class 10 admit cards accompanied by pass certificates can be used as ID

Supreme Court: क्या SIR में 10वीं का एडमिट कार्ड होगा मान्य? पहचान पर खत्म हुआ भ्रम, सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 25 Feb 2026 01:39 PM IST
विज्ञापन
सार

Supreme Court on West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल एसआईआर प्रक्रिया में स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 का एडमिट कार्ड पास प्रमाणपत्र के साथ सहायक पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार होगा। साथ ही अदालत ने समय सीमा और पारदर्शिता पर जोर दिया है। 

supreme court in West Bengal SIR Class 10 admit cards accompanied by pass certificates can be used as ID
सुप्रीम कोर्ट. - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पहचान सत्यापन को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता दी है। अदालत ने कहा है कि कक्षा 10 का एडमिट कार्ड, यदि पास प्रमाणपत्र के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो इसे सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। यह फैसला उन लाखों मतदाताओं के लिए अहम है जिनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज हैं।
Trending Videos


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू द्वारा उठाई गई शंका के बाद दिया। वकील ने पूछा था कि क्या 10वीं का एडमिट कार्ड अकेले पहचान पत्र के रूप में मान्य होगा। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल सहायक दस्तावेज होगा, अकेला पहचान पत्र नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


किन दस्तावेजों को लेकर दी गई स्पष्टता?
अदालत ने अपने 24 फरवरी 2026 के आदेश में कहा कि जो दस्तावेज अब तक अपलोड नहीं हुए हैं और 15 फरवरी से पहले प्राप्त हो चुके हैं, उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी कल शाम 5 बजे तक संबंधित न्यायिक अधिकारियों को सौंपें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि माध्यमिक यानी कक्षा 10 का एडमिट कार्ड, पास प्रमाणपत्र के साथ जन्मतिथि और अभिभावक संबंध साबित करने के लिए दिया जा सकता है।

ये भी पढ़ें- Supreme Court: ‘बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते’, NCERT की किताब में न्यायपालिका पर सामग्री से सीजेआई नाराज

80 लाख दावों और आपत्तियों का क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला देते हुए कहा था कि 80 लाख दावों और आपत्तियों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल के 250 जिला जजों के अलावा सिविल जजों को भी लगाया जा सकता है। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल के 22 फरवरी के पत्र पर ध्यान दिया। पत्र में कहा गया था कि 250 जिला जज भी यदि रोज 250 मामले निपटाएं, तो पूरी प्रक्रिया में करीब 80 दिन लगेंगे। जबकि SIR की अंतिम तिथि 28 फरवरी तय है।

किन जजों को लगाया जाएगा?
पीठ ने अनुमति दी कि कम से कम तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ और कनिष्ठ श्रेणी के सिविल जजों को भी इस काम में लगाया जा सकता है। साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा गया कि झारखंड और ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से समान स्तर के न्यायिक अधिकारियों की मांग करें, ताकि कार्य तेजी से पूरा हो सके।

एसआईआर प्रक्रिया में तार्किक विसंगति और अनमैप्ड श्रेणी के तहत नामों की जांच की जा रही है। इनमें 2002 की मतदाता सूची से अभिभावक का नाम न मिलना, या मतदाता और अभिभावक की उम्र में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर जैसे मामले शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed