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‘इतना समय क्यों चाहिए?’: खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एफएसएसएआई से पूछा सवाल
Mon, 28 Sep 2026 03:09 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:09 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल लागू करने में देरी पर एफएसएसएआई से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि नागरिकों की सेहत से जुड़े मामले में एक साल का स्वैच्छिक अनुपालन क्यों जरूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग लागू करने की प्रस्तावित समय-सीमा के बारे में सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि जब मामला नागरिकों की सेहत से जुड़ा है, तो वे इतना समय क्यों बर्बाद करना चाहते हैं।
बेंच ने क्या कहा?
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पैकेजिंग पर एक पोषण संबंधी जानकारी का ग्राफिक है। यह ग्राहकों को फ़ूड खरीदने और बेहतर खान-पान से जुड़े फैसले लेने में मदद कर सकता है।न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से संबंधित है तो एफएसएसएआई इतना समय क्यों बर्बाद करना चाहता है।
पीठ ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी की, 'आपने अब तक जो कुछ भी किया है, हम उसकी सराहना करते हैं। आपकी पहल की भी सराहना करते हैं, लेकिन हम जो हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुंचना चाहते हैं, उसे सार्थक रूप देने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। हम यह पूरी कवायद राष्ट्र और नागरिकों के हित के लिए कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अधिकारी हमारे आदेश को उसके सही अर्थ में स्वीकार करेंगे।'
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'एक साल के लिए स्वैच्छिक अनुपालन क्यों?'
पीठ ने आगे कहा, 'एक साल के लिए स्वैच्छिक अनुपालन क्यों? आपको इतना समय क्यों चाहिए? आप सुनवाई और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया को नए सिरे से क्यों शुरू करना चाहते हैं? आपने 2022 में शुरुआत की, आपने पिछले चार वर्षों में क्या किया?'
एफएसएसएआई के वकील ने क्या कहा?
एफएसएसएआई के वकील ने अदालत को बताया कि 2022 में जो शुरू किया गया था वह इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग (आईएनआर) स्टार-रेटिंग प्रणाली थी। उस समय इसका मापदंड पूरी तरह से अलग था। एफएसएसएआई ने अब चीनी, वसा और नमक जैसे हानिकारक पोषक तत्वों से भरपूर पैकेटबंद खाद्य उत्पादों के लिए लाल रंग के चेतावनी लेबल को अपनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत खाद्य पैकेजों के सामने सफेद वर्गाकार पृष्ठभूमि पर लाल रंग के षट्भुज का उपयोग किया जाएगा।
खाद्य नियामक ने कोर्ट को क्या बताया?
खाद्य नियामक ने शीर्ष अदालत को बताया कि मसौदा नियमों को जारी करने और अंतिम रूप देने में लगभग चार महीने का समय लगेगा। इसने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि मसौदा संशोधन विनियमों को 60 दिनों के लिए प्रकाशित किया जाएगा ताकि घरेलू परामर्श और डब्ल्यूटीओ मंच के माध्यम से हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई को पहले क्या कहा था?
इसके अलावा, एफएसएसएआई ने नियमों की अधिसूचना के बाद खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए 365 दिनों की स्वैच्छिक कार्यान्वयन अवधि का प्रस्ताव दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एफएसएसएआई से, जिसने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) के चरणबद्ध कार्यान्वयन का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही चिंताजनक पोषक तत्वों, वसा, चीनी और नमक के नियोजित लेबल पर अधिक स्पष्टीकरण देने को कहा था।
याचिका में क्या मांग की गई है?
सर्वोच्च न्यायालय सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट '3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य खाद्य सुरक्षा शुल्क (एफओपीएल) लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
इससे पहले एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह अतिरिक्त संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य उत्पादों के लिए पैक के सामने लाल रंग का एक प्रमुख चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव करता है।
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बेंच ने क्या कहा?
फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) खाद्य पैकेजिंग पर एक पोषण संबंधी जानकारी का ग्राफिक है। यह ग्राहकों को फ़ूड खरीदने और बेहतर खान-पान से जुड़े फैसले लेने में मदद कर सकता है।न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जब मामला नागरिकों के स्वास्थ्य से संबंधित है तो एफएसएसएआई इतना समय क्यों बर्बाद करना चाहता है।
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पीठ ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी की, 'आपने अब तक जो कुछ भी किया है, हम उसकी सराहना करते हैं। आपकी पहल की भी सराहना करते हैं, लेकिन हम जो हासिल करना चाहते हैं और जहां पहुंचना चाहते हैं, उसे सार्थक रूप देने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। हम यह पूरी कवायद राष्ट्र और नागरिकों के हित के लिए कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अधिकारी हमारे आदेश को उसके सही अर्थ में स्वीकार करेंगे।'
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'एक साल के लिए स्वैच्छिक अनुपालन क्यों?'
पीठ ने आगे कहा, 'एक साल के लिए स्वैच्छिक अनुपालन क्यों? आपको इतना समय क्यों चाहिए? आप सुनवाई और आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया को नए सिरे से क्यों शुरू करना चाहते हैं? आपने 2022 में शुरुआत की, आपने पिछले चार वर्षों में क्या किया?'
एफएसएसएआई के वकील ने क्या कहा?
एफएसएसएआई के वकील ने अदालत को बताया कि 2022 में जो शुरू किया गया था वह इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग (आईएनआर) स्टार-रेटिंग प्रणाली थी। उस समय इसका मापदंड पूरी तरह से अलग था। एफएसएसएआई ने अब चीनी, वसा और नमक जैसे हानिकारक पोषक तत्वों से भरपूर पैकेटबंद खाद्य उत्पादों के लिए लाल रंग के चेतावनी लेबल को अपनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत खाद्य पैकेजों के सामने सफेद वर्गाकार पृष्ठभूमि पर लाल रंग के षट्भुज का उपयोग किया जाएगा।
खाद्य नियामक ने कोर्ट को क्या बताया?
खाद्य नियामक ने शीर्ष अदालत को बताया कि मसौदा नियमों को जारी करने और अंतिम रूप देने में लगभग चार महीने का समय लगेगा। इसने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि मसौदा संशोधन विनियमों को 60 दिनों के लिए प्रकाशित किया जाएगा ताकि घरेलू परामर्श और डब्ल्यूटीओ मंच के माध्यम से हितधारकों से टिप्पणियां आमंत्रित की जा सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई को पहले क्या कहा था?
इसके अलावा, एफएसएसएआई ने नियमों की अधिसूचना के बाद खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए 365 दिनों की स्वैच्छिक कार्यान्वयन अवधि का प्रस्ताव दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एफएसएसएआई से, जिसने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) के चरणबद्ध कार्यान्वयन का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही चिंताजनक पोषक तत्वों, वसा, चीनी और नमक के नियोजित लेबल पर अधिक स्पष्टीकरण देने को कहा था।
याचिका में क्या मांग की गई है?
सर्वोच्च न्यायालय सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट '3एस एंड अवर हेल्थ सोसाइटी' की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य खाद्य सुरक्षा शुल्क (एफओपीएल) लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
इससे पहले एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह अतिरिक्त संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य उत्पादों के लिए पैक के सामने लाल रंग का एक प्रमुख चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव करता है।