सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court updates Defer mandatory service bonds for PG medical students states

Supreme Court: मेडिकल के पीजी छात्रों के लिए सेवा बॉन्ड स्थगित करें राज्य, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

राजीव सिन्हा, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 01 Feb 2026 05:11 AM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य सरकारों को आत्ममंथन करना चाहिए कि असाधारण और मेधावी उम्मीदवारों के लिए कोई तंत्र विकसित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि सेवा बॉन्ड को स्थगित करने से छात्रों को लाभ होगा।

supreme court updates Defer mandatory service bonds for PG medical students states
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सुझाव दिया है कि वे ऐसे मेधावी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित करने पर विचार करें जो अनिवार्य सेवा बॉन्ड के कारण सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। अदालत ने कहा कि सेवा बॉन्ड को स्थगित करने से न सिर्फ छात्रों को लाभ होगा बल्कि राज्य को भी भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी योग्यता प्राप्त डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकेंगी।
Trending Videos


अदालत ने क्या कहा
  • जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि कई राज्यों में पीजी मेडिकल छात्रों के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, अनिवार्य सेवा देना आवश्यक है। हालांकि यदि कोई छात्र सेवा अवधि पूरी करने के बाद सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के लिए आवेदन करता है तो कई मामलों में वह आयु या अन्य शर्तों के कारण अयोग्य हो सकता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • पीठ ने कहा, राज्य सरकारों को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या ऐसे असाधारण और मेधावी उम्मीदवारों के लिए कोई तंत्र विकसित किया जा सकता है जिन्होंने मेरिट के आधार पर प्रतिष्ठित संस्थानों में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में प्रवेश पाया है।
  • कोर्ट ने यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश के श्याम चंद्रन की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। श्याम चंद्रन ने डीएम/एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर नौवां स्थान प्राप्त किया था और उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। हालांकि पीजी के बाद अनिवार्य सेवा बॉन्ड के कारण वे तुरंत कोर्स जॉइन नहीं कर पा रहे थे।

पीजी छात्रों के मासिक वजीफा, फीस सब्सिडी के कारण सेवा बॉन्ड जरूरी
राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि पीजी छात्रों को मासिक वजीफा दिया जाता है और उनकी फीस भी सब्सिडी पर होती है। इसी कारण से राज्य दो वर्ष की सेवा का बॉन्ड लेता है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों को डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकें।

याचिकाकर्ता की दलील, तीन साल का कोर्स पूरा कर दो साल सेवा देने को तैयार...
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी का तीन साल का कोर्स पूरा करने के बाद उम्मीदवार वापस हिमाचल प्रदेश आकर दो साल की अनिवार्य सेवा देने को तैयार है। इसके अलावा राज्य के पास जमा 40 लाख रुपये का बिना तारीख का चेक भी एक निवारक उपाय के रूप में रखा जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को याचिकाकर्ता के मूल प्रमाणपत्र लौटाने का निर्देश दिया ताकि वह सुपर स्पेशियलिटी सीट का लाभ उठा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा देने के आश्वासन के उल्लंघन पर अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।

पुडुचेरी तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति अवैध, मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने पुडुचेरी तकनीकी विश्वविद्यालय (पीटीयू) के कुलपति के रूप में एस. मोहन की नियुक्ति को अवैध ठहराने वाले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्षों में कोई कानूनी खामी नहीं है, जिस पर हस्तक्षेप की जरूरत पड़े। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकार का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एस. मोहन को तत्काल हटाने से राहत दी है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार, वह दिसंबर 2026 में अपने कार्यकाल की समाप्ति तक या फिर वैधानिक प्रक्रिया के तहत नए कुलपति की नियुक्ति होने तक पद पर बने रहेंगे। यह मामला पुडुचेरी तकनीकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के बीच टकराव से जुड़ा था।  

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा में मानकों का निर्धारण संसद का विशेष अधिकार है और इस क्षेत्र में यूजीसी नियमों को सर्वोच्च माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में कानूनी त्रुटि जरूर थी, लेकिन एस मोहन की योग्यता, ईमानदारी या प्रशासनिक कामकाज पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है। इसलिए केवल प्रक्रियागत गलती के आधार पर उन्हें तुरंत हटाना अनुचित और उनके शैक्षणिक करियर के लिए नुकसानदेह होता।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed