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Supreme Court: शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट का फैसला किया रद्द, भ्रष्टाचार के मामलों में दर्ज FIR की थी अमान्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:58 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें भ्रष्टाचार के मामलों में दर्ज कुछ एफआईआर को अमान्य घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द करवाने के लिए अनुचित प्रयास किए।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट का दृष्टिकोण न्याय का मजाक है और अब हाईकोर्ट इन एफआईआर या इन मामलों में चल रही जांच के खिलाफ कोई और चुनौती स्वीकार नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह कदम केवल उस थाने के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर उठाया था जिसने कई प्राथमिकी दर्ज की थीं।
राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और अन्य ने हाईकोर्ट के पिछले साल अगस्त के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया। बेंच ने कहा कि इन एफआईआर को भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत दर्ज किया गया था और इनमें कुछ मामलों में जांच को रोक दिया गया और कुछ मामलों में आपराधिक कार्रवाई खत्म कर दी गई।
बेंच ने कहा, हमारी राय में हाईकोर्ट का दृष्टिकोण न्याय का मजाक है। अगर किसी तकनीकी आधार पर एफआईआर को रद्द किया जाता है, तो हाईकोर्ट का कर्तव्य है कि वह कानून स्पष्ट करे कि किस थाने को अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 2(एस) थाने की परिभाषित करती है।
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जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट का दृष्टिकोण न्याय का मजाक है और अब हाईकोर्ट इन एफआईआर या इन मामलों में चल रही जांच के खिलाफ कोई और चुनौती स्वीकार नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह कदम केवल उस थाने के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर उठाया था जिसने कई प्राथमिकी दर्ज की थीं।
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राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और अन्य ने हाईकोर्ट के पिछले साल अगस्त के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया। बेंच ने कहा कि इन एफआईआर को भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत दर्ज किया गया था और इनमें कुछ मामलों में जांच को रोक दिया गया और कुछ मामलों में आपराधिक कार्रवाई खत्म कर दी गई।
बेंच ने कहा, हमारी राय में हाईकोर्ट का दृष्टिकोण न्याय का मजाक है। अगर किसी तकनीकी आधार पर एफआईआर को रद्द किया जाता है, तो हाईकोर्ट का कर्तव्य है कि वह कानून स्पष्ट करे कि किस थाने को अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 2(एस) थाने की परिभाषित करती है।